Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَخَذْتُ: मैंने पकड़ा, मैंने अपनी पकड़ में लिया (अर्थात उन्हें यातना देकर पकड़ा)।
- نَكِيرِ: मेरा इनकार, मेरी सज़ा, मेरा क्रोध और मेरी भर्त्सना (जो मैंने उनके कुकर्मों के कारण उन पर उतारी)।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को संबोधित करते हुए उन काफ़िरों की स्थिति बयान कर रहे हैं, जिन्होंने अल्लाह के रसूलों को झुठलाया और उनके द्वारा लाए गए सत्य को नकार दिया। अल्लाह फ़रमाता है कि जब ये काफ़िर लोग अपनी सरकशी और हठधर्मी पर अड़े रहे, और उन्होंने अल्लाह के दीन को कबूल करने से इनकार किया, तो अल्लाह ने उन्हें अपनी पकड़ में ले लिया। यानी उन पर अपनी यातना और अज़ाब नाज़िल किया।
अल्लाह फ़रमाता है: "फिर मैंने उन काफ़िरों को पकड़ लिया, तो देखो मेरा इनकार कैसा था!" यानी जब अल्लाह किसी क़ौम को यातना देता है, तो उसका अज़ाब बहुत सख्त, भयानक और ऐसा होता है जिसे कोई टाल नहीं सकता। यह अल्लाह की ओर से उनके कुकर्मों का बदला था, क्योंकि उन्होंने अल्लाह के रसूलों को झुठलाया और उनके साथ मुक़ाबला किया।
इस आयत में अल्लाह ने अपने नबी ﷺ को और उनके ज़रिए पूरी उम्मत को यह सबक सिखाया है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। जो लोग सच्चाई को नकारते हैं और अल्लाह के दीन के दुश्मन बनते हैं, उनका अंजाम कभी अच्छा नहीं होता। अल्लाह उन्हें उनके कर्मों का पूरा बदला देता है, और उसका अज़ाब ऐसा होता है जिससे बचने की कोई सूरत नहीं होती।
यह आयत हमारे लिए एक चेतावनी है कि हम अल्लाह के हुक्मों की उल्लंघना न करें और उसके रसूल ﷺ की लाई हुई शिक्षाओं को अपनाएँ। अल्लाह की रहमत बहुत बड़ी है, लेकिन उसका अज़ाब भी बहुत सख्त है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की तरफ़ लौटें, उसकी इबादत करें और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलें, ताकि हम उस अज़ाब से बच सकें जो काफ़िरों और नाफ़रमानों पर आता है।
अल्लाह तआला इस आयत में हमें यह भी बताना चाहते हैं कि उसकी पकड़ से कोई नहीं बच सकता, चाहे वह कितना ही ताकतवर क्यों न हो। इसलिए हमें अपने जीवन में अल्लाह के दीन को अपनाना चाहिए और उसकी राह पर चलना चाहिए, क्योंकि यही हमारी कामयाबी का ज़रिया है।
📜 आयत 24-28 — सूरा फातिर
अनुवाद — फातिर 26
सूरा फातिर आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर हमने उन लोगों को जो काफ़िर हो बैठे ले…सूरा आयत 26/45 — सूरा फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा फातिर सुनें, सूरा फातिर अनुवाद, सूरा फातिर mp3, सूरा फातिर pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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