यासीन · 17/83
अनुवाद उच्चारण — सूरा यासीन
وَمَا عَلَيْنَا إِلَّا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ ۝١٧
Wa maa `alainaaa illal balaaghul mubeen
📖 हिंदी अर्थ
हम पर तो बस खुल्लम खुल्ला एहकामे खुदा का पहुँचा देना फर्ज़ है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْبَلَاغُ: पहुँचाना, संदेश को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना।
  • الْمُبِينُ: स्पष्ट, खुला हुआ, जिसमें कोई अस्पष्टता या छिपाव न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में नबियों (अलैहिमुस्सलाम) का अपनी क़ौम को संबोधित करते हुए कहना है कि हमारा काम केवल अल्लाह का संदेश स्पष्ट रूप से पहुँचाना है। हमारी ज़िम्मेदारी यही है कि जो हुक्म अल्लाह ने दिया है, उसे बिना किसी कमी या मिलावट के तुम तक पहुँचा दें। हम तुम्हें हिदायत देने की शक्ति नहीं रखते, क्योंकि हिदायत देना केवल अल्लाह के हाथ में है।

यह बात नबियों की ओर से एक स्पष्ट घोषणा है कि उनका दायित्व सिर्फ़ संदेश पहुँचाना है, जबकि दिलों को बदलने और उन्हें सीधे रास्ते पर लाने का काम अल्लाह ही करता है। इसलिए नबियों पर किसी की हिदायत की ज़िम्मेदारी नहीं डाली जा सकती।

यह आयत हमें सिखाती है कि दीन के मामले में हर मुसलमान का फ़र्ज़ है कि वह अल्लाह का संदेश स्पष्ट रूप से लोगों तक पहुँचाए, लेकिन नतीजा अल्लाह पर छोड़ दे। हमें यह भी समझना चाहिए कि जब नबियों ने अपनी उम्मतों को यह बताया कि हमारा काम सिर्फ़ पहुँचाना है, तो यह उनकी नम्रता और अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रमाण है।

इस आयत से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हम अपने आस-पास के लोगों को अच्छे अख़लाक़ और हिकमत के साथ अल्लाह के दीन की ओर बुलाएँ, लेकिन कभी यह न समझें कि हमारी कोशिशों का नतीजा हमारे हाथ में है। नतीजा तो अल्लाह ही देता है। यही नबियों का तरीक़ा था, और यही हमारे लिए सबसे अच्छा नमूना है।

अल्लाह तआला ने इस आयत में हमें यह भी बताया कि सच्चाई को पेश करने में कोई झिझक या डर नहीं होना चाहिए। जब हमारे पास स्पष्ट दलीलें हों, तो हमें बेबाकी से उन्हें पेश करना चाहिए, चाहे लोग मानें या न मानें। यही ईमान की मज़बूती और अल्लाह पर भरोसे की निशानी है।

इस आयत की रोशनी में हमें अपने जीवन में यह सबक लेना चाहिए कि हम सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए काम करें, और अपनी ज़िम्मेदारी पूरी करने के बाद अल्लाह पर भरोसा रखें। अल्लाह हमें सच्चे दावत देने वालों में शामिल करे। आमीन।



📜 आयत 15-19 — सूरा यासीन

15قَالُوا مَا أَنتُمْ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُنَا وَمَا أَنزَلَ الرَّحْمَٰنُ مِن شَيْءٍ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا تَكْذِبُونَ
वह लोग कहने लगे कि तुम लोग भी तो बस हमारे ही जैसे आदमी हो और खुदा ने कुछ नाज़िल (वाज़िल) नहीं किया है तुम सब के सब बस बिल्कुल झूठे हो
16قَالُوا رَبُّنَا يَعْلَمُ إِنَّا إِلَيْكُمْ لَمُرْسَلُونَ
तब उन पैग़म्बरों ने कहा हमारा परवरदिगार जानता है कि हम यक़ीनन उसी के भेजे हुए (आए) हैं और (तुम मानो या न मानो)
17وَمَا عَلَيْنَا إِلَّا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ
हम पर तो बस खुल्लम खुल्ला एहकामे खुदा का पहुँचा देना फर्ज़ है
18قَالُوا إِنَّا تَطَيَّرْنَا بِكُمْ ۖ لَئِن لَّمْ تَنتَهُوا لَنَرْجُمَنَّكُمْ وَلَيَمَسَّنَّكُم مِّنَّا عَذَابٌ أَلِيمٌ
वह बोले हमने तुम लोगों को बहुत नहस क़दम पाया कि (तुम्हारे आते ही क़हत में मुबतेला हुए) तो अगर तुम (अपनी बातों से) बाज़ न आओगे तो हम लोग तुम्हें ज़रूर संगसार कर देगें और तुमको यक़ीनी हमारा दर्दनाक अज़ाब पहुँचेगा
19قَالُوا طَائِرُكُم مَّعَكُمْ ۚ أَئِن ذُكِّرْتُم ۚ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌ مُّسْرِفُونَ
पैग़म्बरों ने कहा कि तुम्हारी बद शुगूनी (तुम्हारी करनी से) तुम्हारे साथ है क्या जब नसीहत की जाती है (तो तुम उसे बदफ़ाली कहते हो नहीं) बल्कि तुम खुद (अपनी) हद से बढ़ गए हो
यासीनकुरान सूची
83आयत
मक्कीअवतरण स्थान
17आयत

अनुवाद — यासीन 17

सूरा यासीन आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हम पर तो बस खुल्लम खुल्ला एहकामे खुदा का पहुँचा…

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Sunday, October 11, 2026

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