यासीन · 16/83
अनुवाद उच्चारण — सूरा यासीन
قَالُوا رَبُّنَا يَعْلَمُ إِنَّا إِلَيْكُمْ لَمُرْسَلُونَ ۝١٦
Qaaloo Rabbunaa ya`lamu innaaa ilaikum lamursaloon
📖 हिंदी अर्थ
तब उन पैग़म्बरों ने कहा हमारा परवरदिगार जानता है कि हम यक़ीनन उसी के भेजे हुए (आए) हैं और (तुम मानो या न मानो)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَبُّنَا يَعْلَمُ: हमारा रब जानता है।
  • إِنَّا إِلَيْكُمْ لَمُرْسَلُونَ: हम निश्चित रूप से तुम्हारी ओर भेजे गए हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब उस बस्ती के लोगों ने तीनों रसूलों (संदेशवाहकों) को झुठलाया और उनकी रिसालत (पैग़म्बरी) पर शक किया, तो रसूलों ने अपनी सच्चाई और दावे की पुष्टि के लिए सबसे मज़बूत गवाह पेश किया—अल्लाह तआला की इल्म (ज्ञान) को। उन्होंने कहा: "हमारा रब, जिसने हमें भेजा है, वह सब कुछ जानता है। वह जानता है कि हम सच में तुम्हारी ओर भेजे गए हैं।" यह उनका उत्तर था, जिसमें उन्होंने अपनी बात को अल्लाह की गवाही पर टिकाया, क्योंकि अल्लाह की गवाही सबसे बड़ी और सबसे सच्ची होती है।

यहाँ रसूलों ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनका काम केवल संदेश पहुँचाना है, न कि लोगों को हिदायत देना। हिदायत तो सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। वे केवल सच्चाई को स्पष्ट रूप से बयान करने के ज़िम्मेदार हैं, और यही उनकी नबुव्वत की निशानी है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि सच्चाई पर क़ायम रहने वालों को चाहिए कि वे अपने दावे में अल्लाह पर भरोसा करें और उसी की गवाही को काफ़ी समझें। जब इंसान का दिल अल्लाह की मदद पर यक़ीन रखता है, तो उसे किसी की परवाह नहीं होती, चाहे पूरी दुनिया ही उसका विरोध क्यों न करे। रसूलों का यह जवाब हमें सिखाता है कि सब्र, सच्चाई और अल्लाह पर भरोसा—यही वे गुण हैं जो इंसान को कामयाबी की राह दिखाते हैं।

और यह भी याद रखें कि अल्लाह तआला अपने बंदों की हर हालत से वाक़िफ़ है। वह जानता है कि कौन सच्चा है और कौन झूठा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में सच्चाई को अपनाएँ और अल्लाह की राह में किसी भी मुश्किल का सामना करने के लिए तैयार रहें, क्योंकि अल्लाह की मदद सच्चे लोगों के साथ होती है। यही वह विश्वास है जो मुसलमान को हर हाल में मज़बूत रखता है और उसे दुनिया और आख़िरत की भलाई तक पहुँचाता है।



📜 आयत 14-18 — सूरा यासीन

14إِذْ أَرْسَلْنَا إِلَيْهِمُ اثْنَيْنِ فَكَذَّبُوهُمَا فَعَزَّزْنَا بِثَالِثٍ فَقَالُوا إِنَّا إِلَيْكُم مُّرْسَلُونَ
इस तरह कि जब हमने उनके पास दो (पैग़म्बर योहना और यूनुस) भेजे तो उन लोगों ने दोनों को झुठलाया जब हमने एक तीसरे (पैग़म्बर शमऊन) से (उन दोनों को) मद्द दी तो इन तीनों ने कहा कि हम तुम्हारे पास खुदा के भेजे हुए (आए) हैं
15قَالُوا مَا أَنتُمْ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُنَا وَمَا أَنزَلَ الرَّحْمَٰنُ مِن شَيْءٍ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا تَكْذِبُونَ
वह लोग कहने लगे कि तुम लोग भी तो बस हमारे ही जैसे आदमी हो और खुदा ने कुछ नाज़िल (वाज़िल) नहीं किया है तुम सब के सब बस बिल्कुल झूठे हो
16قَالُوا رَبُّنَا يَعْلَمُ إِنَّا إِلَيْكُمْ لَمُرْسَلُونَ
तब उन पैग़म्बरों ने कहा हमारा परवरदिगार जानता है कि हम यक़ीनन उसी के भेजे हुए (आए) हैं और (तुम मानो या न मानो)
17وَمَا عَلَيْنَا إِلَّا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ
हम पर तो बस खुल्लम खुल्ला एहकामे खुदा का पहुँचा देना फर्ज़ है
18قَالُوا إِنَّا تَطَيَّرْنَا بِكُمْ ۖ لَئِن لَّمْ تَنتَهُوا لَنَرْجُمَنَّكُمْ وَلَيَمَسَّنَّكُم مِّنَّا عَذَابٌ أَلِيمٌ
वह बोले हमने तुम लोगों को बहुत नहस क़दम पाया कि (तुम्हारे आते ही क़हत में मुबतेला हुए) तो अगर तुम (अपनी बातों से) बाज़ न आओगे तो हम लोग तुम्हें ज़रूर संगसार कर देगें और तुमको यक़ीनी हमारा दर्दनाक अज़ाब पहुँचेगा
यासीनकुरान सूची
83आयत
मक्कीअवतरण स्थान
16आयत

अनुवाद — यासीन 16

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Thursday, October 1, 2026

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