यासीन · 18/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
قَالُوا إِنَّا تَطَيَّرْنَا بِكُمْ ۖ لَئِن لَّمْ تَنتَهُوا لَنَرْجُمَنَّكُمْ وَلَيَمَسَّنَّكُم مِّنَّا عَذَابٌ أَلِيمٌ ۝١٨
Qaaloo innaa tataiyarnaa bikum la`il-lam tantahoo lanar jumannakum wa la-yamassan nakum minnaa `azaabun aleem
📖 हिंदी अर्थ
वह बोले हमने तुम लोगों को बहुत नहस क़दम पाया कि (तुम्हारे आते ही क़हत में मुबतेला हुए) तो अगर तुम (अपनी बातों से) बाज़ न आओगे तो हम लोग तुम्हें ज़रूर संगसार कर देगें और तुमको यक़ीनी हमारा दर्दनाक अज़ाब पहुँचेगा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَطَيَّرْنَا: हमने तुम्हें अशुभ समझा, तुम्हें अपशकुन माना।
  • لَنَرْجُمَنَّكُمْ: हम तुम्हें पत्थर मारकर जान से मार देंगे।
  • عَذَابٌ أَلِيمٌ: दर्दनाक (दुखदायी) यातना।

तफ़सीर:

जब अल्लाह के भेजे हुए रसूलों ने उस बस्ती के लोगों को एकेश्वरवाद (तौहीद) की ओर बुलाया और उन्हें अल्लाह की इबादत की दावत दी, तो उस बस्ती के लोगों ने रसूलों से कहा: "हम तुम्हें अपशकुन मानते हैं, तुम्हारी वजह से हम पर मुसीबतें आई हैं। अगर तुम अपनी इस दावत और बात से बाज़ नहीं आए, तो हम तुम्हें पत्थर मारकर जान से मार देंगे, और हमारी तरफ से तुम्हें बहुत ही दर्दनाक और तकलीफ़देह अज़ाब पहुँचेगा।"

यह उन लोगों की ज़िद, सरकशी और हक़ के सामने झुकने से इनकार था। उन्होंने रसूलों की नेक दावत का जवाब धमकियों और अत्याचार से दिया। वे यह नहीं समझ पाए कि रसूल उनके लिए रहमत बनकर आए थे, न कि अज़ाब का सबब। उन्होंने अपनी नाफ़रमानी और हठधर्मी की वजह से अल्लाह के रसूलों को ठुकरा दिया।

दावती पहलू:

यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि हक़ की राह पर चलने वालों को हमेशा मुख़ालिफ़त और तकलीफ़ों का सामना करना पड़ता है। लेकिन सब्र और अल्लाह पर भरोसा ही कामयाबी की कुंजी है। रसूलों ने धमकियों के बावजूद अपनी दावत नहीं छोड़ी, और अल्लाह ने उनकी मदद की। आज भी जो लोग अल्लाह की राह में निकलते हैं, उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, लेकिन अल्लाह का वादा है कि वह अपने नेक बंदों की मदद करता है। हमें भी चाहिए कि हक़ की राह पर साबित-क़दम रहें, चाहे दुनिया कितनी भी मुख़ालिफ़त क्यों न करे। याद रखें, अल्लाह की मदद सब्र और तक़वा के साथ है।

🎧 सुनें

📜 आयत 16-20 — यासीन

16قَالُوا رَبُّنَا يَعْلَمُ إِنَّا إِلَيْكُمْ لَمُرْسَلُونَ
तब उन पैग़म्बरों ने कहा हमारा परवरदिगार जानता है कि हम यक़ीनन उसी के भेजे हुए (आए) हैं और (तुम मानो या न मानो)
17وَمَا عَلَيْنَا إِلَّا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ
हम पर तो बस खुल्लम खुल्ला एहकामे खुदा का पहुँचा देना फर्ज़ है
18قَالُوا إِنَّا تَطَيَّرْنَا بِكُمْ ۖ لَئِن لَّمْ تَنتَهُوا لَنَرْجُمَنَّكُمْ وَلَيَمَسَّنَّكُم مِّنَّا عَذَابٌ أَلِيمٌ
वह बोले हमने तुम लोगों को बहुत नहस क़दम पाया कि (तुम्हारे आते ही क़हत में मुबतेला हुए) तो अगर तुम (अपनी बातों से) बाज़ न आओगे तो हम लोग तुम्हें ज़रूर संगसार कर देगें और तुमको यक़ीनी हमारा दर्दनाक अज़ाब पहुँचेगा
19قَالُوا طَائِرُكُم مَّعَكُمْ ۚ أَئِن ذُكِّرْتُم ۚ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌ مُّسْرِفُونَ
पैग़म्बरों ने कहा कि तुम्हारी बद शुगूनी (तुम्हारी करनी से) तुम्हारे साथ है क्या जब नसीहत की जाती है (तो तुम उसे बदफ़ाली कहते हो नहीं) बल्कि तुम खुद (अपनी) हद से बढ़ गए हो
20وَجَاءَ مِنْ أَقْصَى الْمَدِينَةِ رَجُلٌ يَسْعَىٰ قَالَ يَا قَوْمِ اتَّبِعُوا الْمُرْسَلِينَ
और (इतने में) शहर के उस सिरे से एक शख्स (हबीब नज्जार) दौड़ता हुआ आया और कहने लगा कि ऐ मेरी क़ौम (इन) पैग़म्बरों का कहना मानो
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अनुवाद — यासीन 18

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सूरा आयत 18/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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