अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لِيَأْكُلُوا – ताकि वे खाएँ
- مِن ثَمَرِهِ – उसके फलों में से
- وَمَا عَمِلَتْهُ أَيْدِيهِمْ – और जो उनके हाथों ने किया (उगाया/पैदा किया)
- أَفَلَا يَشْكُرُونَ – तो क्या वे आभार/कृतज्ञता नहीं जताते?
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने यह सारी नेमतें – यानी बाग़, खेत, फल, अनाज और तरह-तरह की पैदावार – इसलिए पैदा कीं ताकि इंसान उनसे खाए और अपनी ज़िंदगी गुज़ार सके। यह ध्यान देने वाली बात है कि ये सब चीज़ें अल्लाह की रहमत से मिलती हैं, न कि सिर्फ़ इंसान की मेहनत या ताक़त से। इंसान ज़मीन जोतता है, बीज बोता है, पानी देता है, लेकिन असल में फल और अनाज पैदा करने वाला अल्लाह ही है। अगर अल्लाह न चाहे तो बीज से पौधा न निकले, बारिश न हो, और ज़मीन कुछ भी न उगाए।
क़ुरआन में यह भी बताया गया है कि इंसान जो कुछ भी अपने हाथों से कमाता है या उगाता है, वह भी अल्लाह ही की देन है। अल्लाह ने ज़मीन, पानी, हवा, धूप और सारे ज़राए उपलब्ध कराए हैं। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह इन नेमतों को देखकर अल्लाह का शुक्र अदा करे, उसकी इबादत करे और उसके साथ किसी को शरीक न करे।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी रोज़ी-रोज़गार और खाने-पीने की चीज़ें अल्लाह की तरफ़ से हैं। हमें चाहिए कि हर नेमत पर अल्लाह का शुक्र अदा करें, क्योंकि शुक्र अदा करने से नेमतें बढ़ती हैं और अल्लाह की मोहब्बत दिल में पैदा होती है। जो इंसान अल्लाह का शुक्र नहीं करता, वह बड़ी नेमत से महरूम रहता है।
याद रखिए! अल्लाह ने यह सब कुछ हमारे लिए बनाया है, और वह चाहता है कि हम उसे पहचानें, उसका शुक्र करें और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें। यही इंसान की कामयाबी है – दुनिया में भी और आख़िरत में भी।
📜 आयत 33-37 — सूरा यासीन
अनुवाद — यासीन 35
सूरा यासीन आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि लोग उनके फल खाएँ और कुछ उनके हाथों ने…सूरा आयत 35/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 8, 2026
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