यासीन · 64/83
अनुवाद उच्चारण — सूरा यासीन
اصْلَوْهَا الْيَوْمَ بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ ۝٦٤
Islawhal Yawma bimaa kuntum takfuroon
📖 हिंदी अर्थ
तो अब चूँकि तुम कुफ्र करते थे इस वजह से आज इसमें (चुपके से) चले जाओ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اصْلَوْهَا: इसमें प्रवेश करो और इसकी आग की तपिश को महसूस करो।
  • الْيَوْمَ: आज, यानी क़ियामत के दिन।
  • بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ: उस कारण से जो तुम दुनिया में कुफ़्र (अल्लाह को न मानना) करते थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

आज उस आग में प्रवेश करो और उसकी तपिश को अपनी जान से महसूस करो। यह सज़ा उस कुफ़्र और इन्कार का नतीजा है जो तुम दुनिया की ज़िन्दगी में करते थे। जब तुम्हारे पास अल्लाह के रसूल और उसकी आयतें आईं, तो तुमने उन्हें झुठलाया और उनका मज़ाक उड़ाया। आज वही इन्कार तुम्हारे लिए इस आग का ईंधन बन गया है।

यह आयत हमें एक बड़ी सीख देती है कि दुनिया में हमारा हर अमल, हर क़ौल और हर इन्कार आज के दिन हमारे सामने पेश किया जाएगा। जो लोग अल्लाह की रहमत और उसके दीन से मुँह मोड़ते हैं, वे इसका नतीजा उस दिन भुगतेंगे। लेकिन अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है—उसने हमें दुनिया में मौका दिया है कि हम अपने कुफ़्र और गुनाहों से तौबा कर लें, अपने रब की तरफ लौट आएं। यह आयत डराने के साथ-साथ हमें जगाने के लिए है, ताकि हम आज ही अपनी ज़िन्दगी को सुधार लें और उस आग से बचने का रास्ता अपनाएं, जो अल्लाह के इन्कार करने वालों के लिए तैयार की गई है।

अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे और उस आग से महफूज़ रखे। आमीन।



📜 आयत 62-66 — सूरा यासीन

62وَلَقَدْ أَضَلَّ مِنكُمْ جِبِلًّا كَثِيرًا ۖ أَفَلَمْ تَكُونُوا تَعْقِلُونَ
और (बावजूद इसके) उसने तुममें से बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते थे
63هَٰذِهِ جَهَنَّمُ الَّتِي كُنتُمْ تُوعَدُونَ
ये वही जहन्नुम है जिसका तुमसे वायदा किया गया था
64اصْلَوْهَا الْيَوْمَ بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ
तो अब चूँकि तुम कुफ्र करते थे इस वजह से आज इसमें (चुपके से) चले जाओ
65الْيَوْمَ نَخْتِمُ عَلَىٰ أَفْوَاهِهِمْ وَتُكَلِّمُنَا أَيْدِيهِمْ وَتَشْهَدُ أَرْجُلُهُم بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ
आज हम उनके मुँह पर मुहर लगा देगें और (जो) कारसतानियाँ ये लोग दुनिया में कर रहे थे खुद उनके हाथ हमको बता देगें और उनके पाँव गवाही देगें
66وَلَوْ نَشَاءُ لَطَمَسْنَا عَلَىٰ أَعْيُنِهِمْ فَاسْتَبَقُوا الصِّرَاطَ فَأَنَّىٰ يُبْصِرُونَ
और अगर हम चाहें तो उनकी ऑंखों पर झाडू फेर दें तो ये लोग राह को पड़े चक्कर लगाते ढूँढते फिरें मगर कहाँ देख पाँएगे
यासीनकुरान सूची
83आयत
मक्कीअवतरण स्थान
64आयत

अनुवाद — यासीन 64

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Monday, September 28, 2026

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