यासीन · 65/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
الْيَوْمَ نَخْتِمُ عَلَىٰ أَفْوَاهِهِمْ وَتُكَلِّمُنَا أَيْدِيهِمْ وَتَشْهَدُ أَرْجُلُهُم بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ ۝٦٥
Al-Yawma nakhtimu `alaaa afwaahihim wa tukallimunaaa aideehim wa tashhadu arjuluhum bimaa kaanoo yaksiboon
📖 हिंदी अर्थ
आज हम उनके मुँह पर मुहर लगा देगें और (जो) कारसतानियाँ ये लोग दुनिया में कर रहे थे खुद उनके हाथ हमको बता देगें और उनके पाँव गवाही देगें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नख़्तिमु (نَخْتِمُ): हम मोहर लगा देंगे, बंद कर देंगे।
  • अफ़वाहिहिम (أَفْوَاهِهِمْ): उनके मुँह।
  • तुकल्लिमुनā (تُكَلِّمُنَا): हमसे बात करेंगी।
  • अय्दीहिम (أَيْدِيهِمْ): उनके हाथ।
  • तश्हदु (تَشْهَدُ): गवाही देंगी।
  • अर्जुलुहुम (أَرْجُلُهُمْ): उनके पैर।
  • यक्सिबून (يَكْسِبُونَ): वे कमाते थे (अर्थात् कर्म करते थे)।

तफ़सीर (व्याख्या):

क़यामत के दिन जब अल्लाह तआला सभी लोगों को ज़िंदा करके हिसाब के लिए इकट्ठा करेंगे, तो मुशरिकीन और काफ़िर लोग अपने किए हुए गुनाहों से मुकरने की कोशिश करेंगे और झूठी क़समें खाकर कहेंगे कि हमने कोई बुराई नहीं की। उस वक़्त अल्लाह तआला उनके मुँह पर मोहर लगा देंगे, यानी उनके मुँह बंद कर दिए जाएँगे और वे कुछ बोल नहीं पाएँगे। यह अल्लाह की क़ुदरत का अज़ीमुश्शान नमूना होगा कि जो ज़ुबान दुनिया में बोलती थी, वह उस दिन ख़ामोश हो जाएगी।

फिर अल्लाह तआला उनके हाथों को बोलने की ताक़त देगा, और उनके हाथ गवाही देंगे कि उन्होंने दुनिया में क्या-क्या काम किए — चोरी की, ज़ुल्म किया, किसी को मारा-पीटा, या कोई और बुराई की। उसी तरह उनके पैर भी गवाही देंगे कि वे किन-किन बुरे कामों की तरफ़ चले, किस-किस गुनाह की जगह पर गए। हर अंग अपने किए हुए काम की गवाही देगा, और यह गवाही अल्लाह के हुक्म से होगी।

यहाँ सिर्फ़ हाथ और पैरों का ज़िक्र है, लेकिन मतलब यह है कि इंसान के सारे अंग — आँखें, कान, ज़ुबान, हाथ, पैर, त्वचा — सब उसके किए हुए कामों की गवाही देंगे। यह अल्लाह की क़ुदरत का कमाल है कि वह बोलने वाली ज़ुबान को ख़ामोश कर देगा और ख़ामोश अंगों को बोलने वाला बना देगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला की पकड़ कितनी सख़्त है और उसका हिसाब कितना बारीक है। कोई भी काम छोटा हो या बड़ा, वह क़यामत के दिन सामने आ जाएगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने हर अंग को अल्लाह की इताअत में लगाएँ — अपनी ज़ुबान को सच बोलने के लिए, अपने हाथों को नेक कामों के लिए, अपने पैरों को अच्छे कामों की तरफ़ चलने के लिए। यह आयत हमें डराती भी है और सिखाती भी है कि अगर हम दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी से बचें और नेक काम करें, तो क़यामत के दिन हमारे अंग हमारे ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि हमारे हक़ में गवाही देंगे। अल्लाह तआला रहम करने वाला है, और जो कोई तौबा करके अपनी ज़िंदगी सुधार ले, उसके लिए अल्लाह की रहमत के दरवाज़े खुले हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 63-67 — यासीन

63هَٰذِهِ جَهَنَّمُ الَّتِي كُنتُمْ تُوعَدُونَ
ये वही जहन्नुम है जिसका तुमसे वायदा किया गया था
64اصْلَوْهَا الْيَوْمَ بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ
तो अब चूँकि तुम कुफ्र करते थे इस वजह से आज इसमें (चुपके से) चले जाओ
65الْيَوْمَ نَخْتِمُ عَلَىٰ أَفْوَاهِهِمْ وَتُكَلِّمُنَا أَيْدِيهِمْ وَتَشْهَدُ أَرْجُلُهُم بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ
आज हम उनके मुँह पर मुहर लगा देगें और (जो) कारसतानियाँ ये लोग दुनिया में कर रहे थे खुद उनके हाथ हमको बता देगें और उनके पाँव गवाही देगें
66وَلَوْ نَشَاءُ لَطَمَسْنَا عَلَىٰ أَعْيُنِهِمْ فَاسْتَبَقُوا الصِّرَاطَ فَأَنَّىٰ يُبْصِرُونَ
और अगर हम चाहें तो उनकी ऑंखों पर झाडू फेर दें तो ये लोग राह को पड़े चक्कर लगाते ढूँढते फिरें मगर कहाँ देख पाँएगे
67وَلَوْ نَشَاءُ لَمَسَخْنَاهُمْ عَلَىٰ مَكَانَتِهِمْ فَمَا اسْتَطَاعُوا مُضِيًّا وَلَا يَرْجِعُونَ
और अगर हम चाहे तो जहाँ ये हैं (वहीं) उनकी सूरतें बदल (करके) (पत्थर मिट्टी बना) दें फिर न तो उनमें आगे जाने का क़ाबू रहे और न (घर) लौट सकें
यासीनकुरान सूची
83आयत
मक्कीRevelation
65आयत

अनुवाद — यासीन 65

सूरा यासीन आयत 65 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : आज हम उनके मुँह पर मुहर लगा देगें और (जो)…

सूरा आयत 65/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 63–67. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए