अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- كَذَٰلِكَ: इसी प्रकार, ऐसे ही।
- نَجْزِي: हम बदला देते हैं, प्रतिफल प्रदान करते हैं।
- الْمُحْسِنِينَ: नेकी करने वाले, जो अपने कर्मों को अच्छे ढंग से और ख़ालिस नियत से करते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में फ़रमाता है कि हमने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) और हज़रत हारून (अलैहिस्सलाम) को जो इज़्ज़त और सलामती अता की, और उनके नाम को आने वाली पीढ़ियों में ज़िंदा रखा, यह हमारा उन्हें दिया गया बदला था। और यह कोई अलग बात नहीं है, बल्कि हमारा स्थापित नियम है कि हम नेकी करने वालों को ऐसा ही बदला देते हैं।
यानी जो लोग अपने ईमान में सच्चे होते हैं, अपनी इबादत को ख़ालिस अल्लाह के लिए करते हैं, और अपने अमल को अच्छे ढंग से अंजाम देते हैं — अल्लाह उन्हें दुनिया में भी इज़्ज़त देता है और आख़िरत में भी उनके लिए बेहतरीन जज़ा तैयार करता है। यह अल्लाह की सुन्नत (रिवायत) है जो कभी नहीं बदलती।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और उसका इनाम किसी ख़ास व्यक्ति या ख़ानदान के साथ ख़त्म नहीं होता, बल्कि हर वह बंदा जो इहसान (नेकी) का रास्ता अपनाए — यानी अल्लाह की इबादत इस तरह करे जैसे वह उसे देख रहा है — वह अल्लाह की मुहब्बत और उसके इनाम का हक़दार बन जाता है।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है। अल्लाह ने यह नहीं कहा कि हम सिर्फ़ नबियों को ही यह बदला देते हैं, बल्कि फ़रमाया कि हम मुहसिनीन (नेकी करने वालों) को ऐसा ही बदला देते हैं। तो अगर हम भी अपने अमल को अच्छा कर लें, अपनी नियत को सही कर लें, और अल्लाह से वादा कर लें कि हम अपनी ज़िंदगी में जो भी अच्छा काम करेंगे, सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए करेंगे — तो हम भी इस वादे में शामिल हो सकते हैं। अल्लाह कभी अपना वादा नहीं तोड़ता, और वह नेकी करने वालों का बदला ज़रूर देता है।
📜 आयत 119-123 — अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 121
सूरा अस-साफ्फात आयत 121 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते…सूरा आयत 121/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 119–123. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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