अस-साफ्फात · 121/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ ۝١٢١
Innaa kazaalika najzil muhsineen
📖 हिंदी अर्थ
हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَذَٰلِكَ: इसी प्रकार, ऐसे ही।
  • نَجْزِي: हम बदला देते हैं, प्रतिफल प्रदान करते हैं।
  • الْمُحْسِنِينَ: नेकी करने वाले, जो अपने कर्मों को अच्छे ढंग से और ख़ालिस नियत से करते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में फ़रमाता है कि हमने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) और हज़रत हारून (अलैहिस्सलाम) को जो इज़्ज़त और सलामती अता की, और उनके नाम को आने वाली पीढ़ियों में ज़िंदा रखा, यह हमारा उन्हें दिया गया बदला था। और यह कोई अलग बात नहीं है, बल्कि हमारा स्थापित नियम है कि हम नेकी करने वालों को ऐसा ही बदला देते हैं।

यानी जो लोग अपने ईमान में सच्चे होते हैं, अपनी इबादत को ख़ालिस अल्लाह के लिए करते हैं, और अपने अमल को अच्छे ढंग से अंजाम देते हैं — अल्लाह उन्हें दुनिया में भी इज़्ज़त देता है और आख़िरत में भी उनके लिए बेहतरीन जज़ा तैयार करता है। यह अल्लाह की सुन्नत (रिवायत) है जो कभी नहीं बदलती।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और उसका इनाम किसी ख़ास व्यक्ति या ख़ानदान के साथ ख़त्म नहीं होता, बल्कि हर वह बंदा जो इहसान (नेकी) का रास्ता अपनाए — यानी अल्लाह की इबादत इस तरह करे जैसे वह उसे देख रहा है — वह अल्लाह की मुहब्बत और उसके इनाम का हक़दार बन जाता है।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है। अल्लाह ने यह नहीं कहा कि हम सिर्फ़ नबियों को ही यह बदला देते हैं, बल्कि फ़रमाया कि हम मुहसिनीन (नेकी करने वालों) को ऐसा ही बदला देते हैं। तो अगर हम भी अपने अमल को अच्छा कर लें, अपनी नियत को सही कर लें, और अल्लाह से वादा कर लें कि हम अपनी ज़िंदगी में जो भी अच्छा काम करेंगे, सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए करेंगे — तो हम भी इस वादे में शामिल हो सकते हैं। अल्लाह कभी अपना वादा नहीं तोड़ता, और वह नेकी करने वालों का बदला ज़रूर देता है।



📜 आयत 119-123 — सूरा अस-साफ्फात

119وَتَرَكْنَا عَلَيْهِمَا فِي الْآخِرِينَ
और बाद को आने वालों में उनका ज़िक्रे ख़ैर बाक़ी रखा
120سَلَامٌ عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَارُونَ
कि (हर जगह) मूसा और हारून पर सलाम (ही सलाम) है
121إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं
122إِنَّهُمَا مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ
बेशक ये दोनों हमारे (ख़ालिस ईमानदार बन्दों में से थे)
123وَإِنَّ إِلْيَاسَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ
और इसमें शक नहीं कि इलियास यक़ीनन पैग़म्बरों में से थे
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
121आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 121

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Sunday, October 11, 2026

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