अस-साफ्फात · 120/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
سَلَامٌ عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَارُونَ ۝١٢٠
Salaamun `alaa Moosaa wa Haaroon
📖 हिंदी अर्थ
कि (हर जगह) मूसा और हारून पर सलाम (ही सलाम) है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَلَامٌ: शांति, सलामती, और हर बुराई से सुरक्षा।
  • مُوسَىٰ وَهَارُون: अल्लाह के दो महान पैगंबर, मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके भाई हारून (अलैहिस्सलाम)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत अल्लाह तआला की ओर से मूसा (अलैहिस्सलाम) और हारून (अलैहिस्सलाम) के लिए एक विशेष सम्मान और प्रशंसा है। अल्लाह ने उन्हें सलामती और शांति की दुआ दी है, और उनके ऊपर अपनी रहमत और कृपा की घोषणा की है। यह सलाम सिर्फ एक साधारण अभिवादन नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की ओर से उनके लिए एक विशेष सम्मान और उनके उच्च दर्जे की पुष्टि है।

ये दोनों पैगंबर अपने समय में अल्लाह के दीन की स्थापना के लिए डटे रहे, फिरौन के अत्याचारों का सामना किया, और अपनी उम्मत को सच्चाई और ईमान की राह पर चलाया। अल्लाह ने उन्हें इस कठिन मिशन में सफलता दी और उन्हें अपने नेक बंदों में शामिल किया। यह सलाम उनके धैर्य, सच्चाई, और अल्लाह के प्रति समर्पण का इनाम है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नेक और मुख़लिस बंदों को कभी नहीं भूलता। जो लोग अल्लाह की राह में मेहनत करते हैं, उन्हें दुनिया और आखिरत दोनों में सम्मान और सलामती मिलती है। यह हमारे लिए एक प्रेरणा है कि हम भी अपने जीवन में सच्चाई, ईमान, और अच्छे कर्मों को अपनाएं, ताकि हम भी अल्लाह की रहमत और सलामती के हकदार बन सकें।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह अपने पैगंबरों की कितनी इज़्ज़त करता है और उन्हें कितना प्यार करता है। यह हमारे लिए एक सबक है कि अगर हम अल्लाह की राह में चलें, उसकी इबादत करें, और उसके बताए हुए रास्ते पर अमल करें, तो हमें भी अल्लाह की मुहब्बत और सलामती हासिल होगी। यह सलाम सिर्फ मूसा और हारून के लिए नहीं है, बल्कि यह उन सभी लोगों के लिए एक खुशखबरी है जो अल्लाह की राह में सब्र और इस्तिक़ामत (स्थिरता) दिखाते हैं। आइए, हम भी अपने जीवन को अल्लाह की राह पर चलाने की कोशिश करें और उसकी रहमत और सलामती के हकदार बनें।



📜 आयत 118-122 — सूरा अस-साफ्फात

118وَهَدَيْنَاهُمَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ
और दोनों को सीधी राह की हिदायत फ़रमाई
119وَتَرَكْنَا عَلَيْهِمَا فِي الْآخِرِينَ
और बाद को आने वालों में उनका ज़िक्रे ख़ैर बाक़ी रखा
120سَلَامٌ عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَارُونَ
कि (हर जगह) मूसा और हारून पर सलाम (ही सलाम) है
121إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं
122إِنَّهُمَا مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ
बेशक ये दोनों हमारे (ख़ालिस ईमानदार बन्दों में से थे)
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
120आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 120

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Saturday, October 3, 2026

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