अस-साफ्फात · 122/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
إِنَّهُمَا مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ ۝١٢٢
Innahumaa min `ibaadinal mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
बेशक ये दोनों हमारे (ख़ालिस ईमानदार बन्दों में से थे)
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • إِنَّهُمَا: निस्संदेह वे दोनों (मूसा और हारून अलैहिमुस्सलाम)
  • مِنْ عِبَادِنَا: हमारे (अल्लाह के) बंदों में से
  • الْمُؤْمِنِينَ: पूर्ण ईमान वाले (सच्चे विश्वासी)

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने दो महान पैग़म्बरों — हज़रत मूसा और हज़रत हारून (अलैहिमुस्सलाम) — की प्रशंसा कर रहे हैं। यह उन दोनों के लिए अल्लाह की ओर से एक विशेष सम्मान और प्रशंसा है। अल्लाह फ़रमाता है कि ये दोनों मेरे उन बंदों में से हैं जो सच्चे ईमान वाले हैं।

यहाँ "ईमान" का अर्थ केवल ज़ुबान से कलमा पढ़ लेना नहीं है, बल्कि वह ईमान जो दिल में पैठा हो, जो अमल (कर्मों) में दिखाई दे, और जो पूरी ज़िंदगी को अल्लाह की राह पर चलाने वाला हो। हज़रत मूसा और हारून (अलैहिमुस्सलाम) ने फ़िरऔन जैसे ज़ालिम के सामने सच बोलने का साहस दिखाया, उसकी धमकियों से नहीं डरे, और अल्लाह के दीन की रक्षा के लिए हर क़ुर्बानी देने को तैयार रहे। यही सच्चे ईमान की निशानी है।

इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अल्लाह के यहाँ इंसान की असली पहचान उसका ईमान और अच्छे कर्म हैं। चाहे इंसान कितना भी बड़ा पैग़म्बर हो, उसकी बड़ाई इसी बात में है कि वह अल्लाह का सच्चा और मोमिन बंदा है। यह हमारे लिए भी एक प्रेरणा है कि हम अपने जीवन में ईमान को सिर्फ़ दिल तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने अमल में उतारें — नमाज़, रोज़ा, सच्चाई, ईमानदारी, अच्छे आचरण और अल्लाह की राह में कठिनाइयों का सामना करने के जज़्बे के साथ।

अल्लाह तआला ने मूसा और हारून (अलैहिमुस्सलाम) को दुनिया में भी अच्छा नाम दिया और आख़िरत में भी उनके लिए सलामती और अज्र (इनाम) का वादा किया। यह दिखाता है कि जो लोग अल्लाह पर सच्चा ईमान रखते हैं और उसकी राह पर चलते हैं, अल्लाह उन्हें कभी निराश नहीं करता। उन्हें दुनिया में भी इज़्ज़त देता है और आख़िरत में भी। यह हमारे लिए एक बड़ी ख़ुशख़बरी है कि अगर हम सच्चे दिल से अल्लाह के बंदे बन जाएँ, तो अल्लाह हमें भी अपनी मोहब्बत, मदद और रहमत से नवाज़ेगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 120-124 — अस-साफ्फात

120سَلَامٌ عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَارُونَ
कि (हर जगह) मूसा और हारून पर सलाम (ही सलाम) है
121إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं
122إِنَّهُمَا مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ
बेशक ये दोनों हमारे (ख़ालिस ईमानदार बन्दों में से थे)
123وَإِنَّ إِلْيَاسَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ
और इसमें शक नहीं कि इलियास यक़ीनन पैग़म्बरों में से थे
124إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ أَلَا تَتَّقُونَ
जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते
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अनुवाद — अस-साफ्फात 122

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Tuesday, August 18, 2026

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