अस-साफ्फात · 137/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
وَإِنَّكُمْ لَتَمُرُّونَ عَلَيْهِم مُّصْبِحِينَ ۝١٣٧
Wa innakum latamurroona `alaihim musbiheen
📖 हिंदी अर्थ
और ऐ अहले मक्का तुम लोग भी उन पर से (कभी) सुबह को और (कभी) शाम को (आते जाते गुज़रते हो)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَتَمُرُّونَ — तुम अवश्य गुज़रते हो
  • عَلَيْهِم — उन (क़ौमे लूत) के (निवास स्थानों) पर
  • مُصْبِحِينَ — सुबह के समय

तफ़सीर:

ऐ मक्का के निवासियों! तुम लोग अपने सफ़र (व्यापारिक यात्राओं) में शाम की ओर जाते हुए उस बस्ती के पास से गुज़रते हो, जहाँ क़ौमे लूत (हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की उम्मत) रहती थी। तुम सुबह के समय उनके खंडहरों और वीरान घरों के पास से गुज़रते हो, और रात के समय भी तुम्हारा गुज़र होता है। ये वही जगहें हैं जहाँ अल्लाह का अज़ाब नाज़िल हुआ था, जब उन्होंने नबी की दावत को ठुकराया और अपनी शर्मनाक हरकतों पर अड़े रहे।

ये नज़ारा तुम्हारी आँखों के सामने है — वीरान खंडहर, उजड़ी बस्तियाँ, और मिट्टी के ढेर — जो उस क़ौम की तबाही की गवाही दे रहे हैं। क्या तुम इनसे सबक़ नहीं लेते? क्या तुम्हारे दिलों में इन्हें देखकर खौफ़ पैदा नहीं होता? क्या तुम ये नहीं सोचते कि जिस अल्लाह ने उन्हें उनके गुनाहों की वजह से हलाक किया, वही अल्लाह आज भी क़ादिर है कि गुनाहगारों को सज़ा दे?

ये महज़ एक इतिहास की बात नहीं है, बल्कि तुम्हारे सामने एक ज़िंदा निशानी है। अल्लाह ने ये मंज़र इसलिए बाक़ी रखा ताकि लोग देखें, समझें और अपनी ज़िंदगी सुधार लें। जो लोग अल्लाह के नबियों को झुठलाते हैं और गुनाहों पर अड़े रहते हैं, उनका अंजाम यही होता है — तबाही और बर्बादी।

तो ऐ अक़्लमंदों! इन निशानियों से सीख लो। अल्लाह की रहमत और मग़फिरत की तरफ़ लौट आओ, क्योंकि अल्लाह तौबा करने वालों को बहुत प्यार करता है और उनके गुनाह माफ़ कर देता है। ये क़ुरआन की आयतें हमें बताती हैं कि अल्लाह का अज़ाब सिर्फ़ पुरानी उम्मतों के लिए नहीं था, बल्कि हर उस इंसान के लिए है जो हक़ को ठुकराए और गुनाह पर ज़िद करे। लेकिन साथ ही, अल्लाह की रहमत भी हर उस इंसान के लिए खुली है जो सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करे।



📜 आयत 135-139 — अस-साफ्फात

135إِلَّا عَجُوزًا فِي الْغَابِرِينَ
मगर एक (उनकी) बूढ़ी बीबी जो पीछे रह जाने वालों ही में थीं
136ثُمَّ دَمَّرْنَا الْآخَرِينَ
फिर हमने बाक़ी लोगों को तबाह व बर्बाद कर दिया
137وَإِنَّكُمْ لَتَمُرُّونَ عَلَيْهِم مُّصْبِحِينَ
और ऐ अहले मक्का तुम लोग भी उन पर से (कभी) सुबह को और (कभी) शाम को (आते जाते गुज़रते हो)
138وَبِاللَّيْلِ ۗ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते
139وَإِنَّ يُونُسَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ
और इसमें शक नहीं कि यूनुस (भी) पैग़म्बरों में से थे
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अनुवाद — अस-साफ्फात 137

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Tuesday, August 18, 2026

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