अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَتَمُرُّونَ — तुम अवश्य गुज़रते हो
- عَلَيْهِم — उन (क़ौमे लूत) के (निवास स्थानों) पर
- مُصْبِحِينَ — सुबह के समय
तफ़सीर:
ऐ मक्का के निवासियों! तुम लोग अपने सफ़र (व्यापारिक यात्राओं) में शाम की ओर जाते हुए उस बस्ती के पास से गुज़रते हो, जहाँ क़ौमे लूत (हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की उम्मत) रहती थी। तुम सुबह के समय उनके खंडहरों और वीरान घरों के पास से गुज़रते हो, और रात के समय भी तुम्हारा गुज़र होता है। ये वही जगहें हैं जहाँ अल्लाह का अज़ाब नाज़िल हुआ था, जब उन्होंने नबी की दावत को ठुकराया और अपनी शर्मनाक हरकतों पर अड़े रहे।
ये नज़ारा तुम्हारी आँखों के सामने है — वीरान खंडहर, उजड़ी बस्तियाँ, और मिट्टी के ढेर — जो उस क़ौम की तबाही की गवाही दे रहे हैं। क्या तुम इनसे सबक़ नहीं लेते? क्या तुम्हारे दिलों में इन्हें देखकर खौफ़ पैदा नहीं होता? क्या तुम ये नहीं सोचते कि जिस अल्लाह ने उन्हें उनके गुनाहों की वजह से हलाक किया, वही अल्लाह आज भी क़ादिर है कि गुनाहगारों को सज़ा दे?
ये महज़ एक इतिहास की बात नहीं है, बल्कि तुम्हारे सामने एक ज़िंदा निशानी है। अल्लाह ने ये मंज़र इसलिए बाक़ी रखा ताकि लोग देखें, समझें और अपनी ज़िंदगी सुधार लें। जो लोग अल्लाह के नबियों को झुठलाते हैं और गुनाहों पर अड़े रहते हैं, उनका अंजाम यही होता है — तबाही और बर्बादी।
तो ऐ अक़्लमंदों! इन निशानियों से सीख लो। अल्लाह की रहमत और मग़फिरत की तरफ़ लौट आओ, क्योंकि अल्लाह तौबा करने वालों को बहुत प्यार करता है और उनके गुनाह माफ़ कर देता है। ये क़ुरआन की आयतें हमें बताती हैं कि अल्लाह का अज़ाब सिर्फ़ पुरानी उम्मतों के लिए नहीं था, बल्कि हर उस इंसान के लिए है जो हक़ को ठुकराए और गुनाह पर ज़िद करे। लेकिन साथ ही, अल्लाह की रहमत भी हर उस इंसान के लिए खुली है जो सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करे।
📜 आयत 135-139 — अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 137
सूरा अस-साफ्फात आयत 137 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ऐ अहले मक्का तुम लोग भी उन पर से…सूरा आयत 137/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 135–139. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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