अस-साफ्फात · 136/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
ثُمَّ دَمَّرْنَا الْآخَرِينَ ۝١٣٦
Summa dammarnal aakhareen
📖 हिंदी अर्थ
फिर हमने बाक़ी लोगों को तबाह व बर्बाद कर दिया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ثُمَّ (फिर): इसके बाद
  • دَمَّرْنَا (हमने विनष्ट किया): हमने सत्यानाश कर दिया, जड़ से उखाड़ फेंका
  • الْآخَرِينَ (दूसरों को): बाकी बचे हुए लोगों को, यानी जो हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) पर ईमान नहीं लाए थे

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जब हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने अपनी शर्मनाक हरकतों और ज़ुल्म से तौबा नहीं किया, और अपने नबी की दावत को ठुकरा दिया, तो अल्लाह ने उन पर अपना अज़ाब नाज़िल किया।

अल्लाह तआला ने हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) और उनके ईमानदार साथियों को उस शहर से निकालकर महफ़ूज़ रखा, और फिर बाकी सब लोगों को — जिन्होंने नबी की बात नहीं मानी और अपनी बुराइयों पर अड़े रहे — पूरी तरह विनष्ट कर दिया। उनका शहर उलट दिया गया और उन पर पत्थरों की बारिश की गई। यह विनाश ऐसा था कि उनमें से कोई भी बाकी नहीं बचा।

यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है कि जब कोई क़ौम अपने नबी को झुठलाती है और हद से गुज़र जाती है, तो अल्लाह उन्हें पकड़ लेता है। यह सिर्फ़ इतिहास का एक वाक़िया नहीं है, बल्कि हर ज़माने के लिए एक सबक़ है कि अल्लाह की नाफ़रमानी का अंजाम बहुत बुरा होता है।

इस क़िस्से से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त ज़रूर करता है, और ज़ालिमों को उनकी सज़ा देकर रहता है। यह हमारे लिए ख़ुशख़बरी है कि अगर हम अल्लाह के हुक्मों पर चलें और नेकी की राह अपनाएँ, तो अल्लाह हमें हर मुसीबत से बचाएगा। और यह डरावनी ख़बर भी है कि अल्लाह की नाफ़रमानी और ज़ुल्म कभी बेनज़ीर नहीं जाता।

आज भी जो लोग अल्लाह के दीन से मुँह मोड़ते हैं और अपनी हवस-ओ-ख्वाहिशों की पैरवी करते हैं, उन्हें इस आयत से सबक़ लेना चाहिए। अल्लाह की रहमत बहुत वसीअ है, लेकिन उसका अज़ाब भी बहुत सख्त है। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के हुक्मों को मानें, अपने नबी की सुन्नत पर चलें, और उन लोगों की तरह न बनें जिन पर अल्लाह का अज़ाब नाज़िल हुआ।



📜 आयत 134-138 — सूरा अस-साफ्फात

134إِذْ نَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ أَجْمَعِينَ
जब हमने उनको और उनके लड़के वालों सब को नजात दी
135إِلَّا عَجُوزًا فِي الْغَابِرِينَ
मगर एक (उनकी) बूढ़ी बीबी जो पीछे रह जाने वालों ही में थीं
136ثُمَّ دَمَّرْنَا الْآخَرِينَ
फिर हमने बाक़ी लोगों को तबाह व बर्बाद कर दिया
137وَإِنَّكُمْ لَتَمُرُّونَ عَلَيْهِم مُّصْبِحِينَ
और ऐ अहले मक्का तुम लोग भी उन पर से (कभी) सुबह को और (कभी) शाम को (आते जाते गुज़रते हो)
138وَبِاللَّيْلِ ۗ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
136आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 136

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Sunday, October 4, 2026

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