अस-साफ्फात · 145/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
۞ فَنَبَذْنَاهُ بِالْعَرَاءِ وَهُوَ سَقِيمٌ ۝١٤٥
Fanabaznaahu bil`araaa`i wa huwa saqeem
📖 हिंदी अर्थ
फिर हमने उनको (मछली के पेट से निकाल कर) एक खुले मैदान में डाल दिया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَنَبَذْنَاهُ: हमने उसे डाल दिया / फेंक दिया।
  • بِالْعَرَاءِ: खाली मैदान में, जहाँ न कोई पेड़ हो और न ही कोई इमारत।
  • سَقِيمٌ: बीमार और कमज़ोर।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) के उस अद्भुत चमत्कार का वर्णन करती है जब अल्लाह ने उन्हें मछली के पेट से निकालकर एक खाली मैदान में डाल दिया। वह मैदान बिल्कुल सुनसान था—न वहाँ पेड़ थे, न छाया, न कोई आश्रय। हज़रत यूनुस उस समय अत्यंत दुर्बल और बीमार थे, क्योंकि उन्होंने मछली के पेट में कई दिनों तक अंधेरे, तंगी और कठिनाई का सामना किया था। उनका शरीर कमज़ोर हो चुका था और उनका दिल उस ग़म से भरा हुआ था जो उन्होंने अपनी क़ौम की ज़िद और नाफ़रमानी की वजह से महसूस किया था।

यह दृश्य अल्लाह की रहमत और क़ुदरत का बेहतरीन नमूना है। जिस पल हज़रत यूनुस मुसीबत में थे, अल्लाह ने उन्हें उस मुसीबत से निकालकर एक ऐसी जगह पहुँचाया जहाँ उन्हें आराम मिल सके। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ा सबक़ है कि अल्लाह की रहमत कभी मायूस नहीं करती। चाहे हालात कितने भी बुरे हों, अल्लाह अपने बंदे की मदद ज़रूर करता है, बशर्ते वह उसी की तरफ़ रुजू करे।

इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि मुसीबत के बाद आसानी आती है। हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) ने जब अंधेरे में तौबा की और "ला इलाहा इल्ला अंत सुब्हानका इन्नी कुंतु मिनज़्ज़ालिमीन" पढ़ा, तो अल्लाह ने उनकी दुआ क़बूल की और उन्हें राहत दी। यह हमें सिखाता है कि हर मुश्किल में अल्लाह से जुड़ना चाहिए, उसी से मदद माँगनी चाहिए। अल्लाह अपने बंदों से बहुत प्यार करता है और जब बंदा सच्चे दिल से उसकी तरफ़ लौटता है, तो अल्लाह उसकी सारी परेशानियाँ दूर कर देता है।

यह क़िस्सा हमें यक़ीन दिलाता है कि अल्लाह की रहमत उसके ग़ज़ब से कहीं बढ़कर है। हज़रत यूनुस की यह हालत देखकर हमें अल्लाह की क़ुदरत पर भरोसा करना चाहिए और उसकी रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए। अल्लाह हर मुसीबत से निकालने की ताक़त रखता है, बस ज़रूरत है सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करने की।



📜 आयत 143-147 — सूरा अस-साफ्फात

143فَلَوْلَا أَنَّهُ كَانَ مِنَ الْمُسَبِّحِينَ
फिर अगर यूनुस (खुदा की) तसबीह (व ज़िक्र) न करते
144لَلَبِثَ فِي بَطْنِهِ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ
तो रोज़े क़यामत तक मछली के पेट में रहते
145۞ فَنَبَذْنَاهُ بِالْعَرَاءِ وَهُوَ سَقِيمٌ
फिर हमने उनको (मछली के पेट से निकाल कर) एक खुले मैदान में डाल दिया
146وَأَنبَتْنَا عَلَيْهِ شَجَرَةً مِّن يَقْطِينٍ
और (वह थोड़ी देर में) बीमार निढाल हो गए थे और हमने उन पर साये के लिए एक कद्दू का दरख्त उगा दिया
147وَأَرْسَلْنَاهُ إِلَىٰ مِائَةِ أَلْفٍ أَوْ يَزِيدُونَ
और (इसके बाद) हमने एक लाख बल्कि (एक हिसाब से) ज्यादा आदमियों की तरफ (पैग़म्बर बना कर भेजा)
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
145आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 145

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Saturday, October 3, 2026

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