अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَقْطِينٍ (यक़्तीन): कद्दू (काश्तकारी की एक बेल जो ज़मीन पर फैलती है और जिसके फल बड़े होते हैं)।
तफ़सीर:
जब अल्लाह तआला ने अपने नबी यूनुस (अलैहिस्सलाम) को उनकी क़ौम की तरफ़ दोबारा भेजा, और वे समुद्र से निकलकर एक खाली और बंजर ज़मीन पर पहुँचे, तो उनका शरीर कमज़ोर हो चुका था और उन्हें छाँव और आराम की सख्त ज़रूरत थी। अल्लाह तआला ने अपनी रहमत से उनके ऊपर एक कद्दू की बेल उगाई, जो उन्हें अपनी छाँव से ढक लेती थी और उसके फल से वे खाना भी खा सकते थे। यह अल्लाह की उस महान कृपा का प्रतीक था जो उसने अपने नबी पर की, क्योंकि कद्दू की बेल के पत्ते बड़े और घने होते हैं, जो धूप से बचाते हैं, और इसकी मक्खियों से दूर रहने की खासियत भी है, जिससे नबी को आराम मिला।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों पर कितना मेहरबान है। जब बंदा मुसीबत में होता है और अल्लाह की तरफ़ रुजू करता है, तो अल्लाह उसके लिए ऐसे रास्ते खोल देता है जिनका उसे अंदाज़ा भी नहीं होता। यूनुस (अलैहिस्सलाम) जैसे महान नबी को भी जब उनकी क़ौम ने नहीं माना, तो वे ग़म से भर गए और अल्लाह की इजाज़त के बगैर क़ौम छोड़कर चले गए, लेकिन अल्लाह ने उन्हें मुसीबत में डालकर फिर अपनी रहमत से निकाला और उन्हें आराम दिया। यह हमारे लिए सबक़ है कि चाहे हम कितनी भी बड़ी गलती कर बैठें, अल्लाह की रहमत उससे कहीं बड़ी है। बशर्ते हम सच्चे दिल से तौबा करें और उसकी तरफ़ लौटें।
अल्लाह तआला की यह नेमत हमें याद दिलाती है कि वह हर मुश्किल में राहत देता है, हर अंधेरे में उजाला दिखाता है। हमें चाहिए कि हम हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी रहमत से कभी निराश न हों। क्योंकि अल्लाह का करम उसके गुस्से से बढ़कर है, और वह अपने बंदों की भलाई चाहने वाला है। यही इस आयत का पैग़ाम है — अल्लाह की रहमत हर चीज़ पर छाई हुई है, बस ज़रूरत है उसकी तरफ़ सच्चे दिल से लौटने की।
📜 आयत 144-148 — अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 146
सूरा अस-साफ्फात आयत 146 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (वह थोड़ी देर में) बीमार निढाल हो गए थे…सूरा आयत 146/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 144–148. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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