अस-साफ्फात · 146/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
وَأَنبَتْنَا عَلَيْهِ شَجَرَةً مِّن يَقْطِينٍ ۝١٤٦
Wa ambatnaa `alaihi shajaratam mai yaqteen
📖 हिंदी अर्थ
और (वह थोड़ी देर में) बीमार निढाल हो गए थे और हमने उन पर साये के लिए एक कद्दू का दरख्त उगा दिया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَقْطِينٍ (यक़्तीन): कद्दू (काश्तकारी की एक बेल जो ज़मीन पर फैलती है और जिसके फल बड़े होते हैं)।

तफ़सीर:

जब अल्लाह तआला ने अपने नबी यूनुस (अलैहिस्सलाम) को उनकी क़ौम की तरफ़ दोबारा भेजा, और वे समुद्र से निकलकर एक खाली और बंजर ज़मीन पर पहुँचे, तो उनका शरीर कमज़ोर हो चुका था और उन्हें छाँव और आराम की सख्त ज़रूरत थी। अल्लाह तआला ने अपनी रहमत से उनके ऊपर एक कद्दू की बेल उगाई, जो उन्हें अपनी छाँव से ढक लेती थी और उसके फल से वे खाना भी खा सकते थे। यह अल्लाह की उस महान कृपा का प्रतीक था जो उसने अपने नबी पर की, क्योंकि कद्दू की बेल के पत्ते बड़े और घने होते हैं, जो धूप से बचाते हैं, और इसकी मक्खियों से दूर रहने की खासियत भी है, जिससे नबी को आराम मिला।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों पर कितना मेहरबान है। जब बंदा मुसीबत में होता है और अल्लाह की तरफ़ रुजू करता है, तो अल्लाह उसके लिए ऐसे रास्ते खोल देता है जिनका उसे अंदाज़ा भी नहीं होता। यूनुस (अलैहिस्सलाम) जैसे महान नबी को भी जब उनकी क़ौम ने नहीं माना, तो वे ग़म से भर गए और अल्लाह की इजाज़त के बगैर क़ौम छोड़कर चले गए, लेकिन अल्लाह ने उन्हें मुसीबत में डालकर फिर अपनी रहमत से निकाला और उन्हें आराम दिया। यह हमारे लिए सबक़ है कि चाहे हम कितनी भी बड़ी गलती कर बैठें, अल्लाह की रहमत उससे कहीं बड़ी है। बशर्ते हम सच्चे दिल से तौबा करें और उसकी तरफ़ लौटें।

अल्लाह तआला की यह नेमत हमें याद दिलाती है कि वह हर मुश्किल में राहत देता है, हर अंधेरे में उजाला दिखाता है। हमें चाहिए कि हम हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी रहमत से कभी निराश न हों। क्योंकि अल्लाह का करम उसके गुस्से से बढ़कर है, और वह अपने बंदों की भलाई चाहने वाला है। यही इस आयत का पैग़ाम है — अल्लाह की रहमत हर चीज़ पर छाई हुई है, बस ज़रूरत है उसकी तरफ़ सच्चे दिल से लौटने की।



📜 आयत 144-148 — सूरा अस-साफ्फात

144لَلَبِثَ فِي بَطْنِهِ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ
तो रोज़े क़यामत तक मछली के पेट में रहते
145۞ فَنَبَذْنَاهُ بِالْعَرَاءِ وَهُوَ سَقِيمٌ
फिर हमने उनको (मछली के पेट से निकाल कर) एक खुले मैदान में डाल दिया
146وَأَنبَتْنَا عَلَيْهِ شَجَرَةً مِّن يَقْطِينٍ
और (वह थोड़ी देर में) बीमार निढाल हो गए थे और हमने उन पर साये के लिए एक कद्दू का दरख्त उगा दिया
147وَأَرْسَلْنَاهُ إِلَىٰ مِائَةِ أَلْفٍ أَوْ يَزِيدُونَ
और (इसके बाद) हमने एक लाख बल्कि (एक हिसाब से) ज्यादा आदमियों की तरफ (पैग़म्बर बना कर भेजा)
148فَآمَنُوا فَمَتَّعْنَاهُمْ إِلَىٰ حِينٍ
तो वह लोग (उन पर) ईमान लाए फिर हमने (भी) एक ख़ास वक्त तक उनको चैन से रखा
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
146आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 146

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Saturday, October 3, 2026

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