अस-साफ्फात · 164/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
وَمَا مِنَّا إِلَّا لَهُ مَقَامٌ مَّعْلُومٌ ۝١٦٤
Wa maa minnasa illaa lahoo maqaamum ma`loom
📖 हिंदी अर्थ
और फरिश्ते या आइम्मा तो ये कहते हैं कि मैं हर एक का एक दरजा मुक़र्रर है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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📜 आयत 162-166 — सूरा अस-साफ्फात

162مَا أَنتُمْ عَلَيْهِ بِفَاتِنِينَ
उसके ख़िलाफ (किसी को) बहका नहीं सकते
163إِلَّا مَنْ هُوَ صَالِ الْجَحِيمِ
मगर उसको जो जहन्नुम में झोंका जाने वाला है
164وَمَا مِنَّا إِلَّا لَهُ مَقَامٌ مَّعْلُومٌ
और फरिश्ते या आइम्मा तो ये कहते हैं कि मैं हर एक का एक दरजा मुक़र्रर है
165وَإِنَّا لَنَحْنُ الصَّافُّونَ
और हम तो यक़ीनन (उसकी इबादत के लिए) सफ बाँधे खड़े रहते हैं
166وَإِنَّا لَنَحْنُ الْمُسَبِّحُونَ
और हम तो यक़ीनी (उसकी) तस्बीह पढ़ा करते हैं
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
164आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 164

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Saturday, October 3, 2026

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