अस-साफ्फात · 27/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَاءَلُونَ ۝٢٧
Wa aqbala ba`duhum `alaa ba`diny yatasaaa`aloon
📖 हिंदी अर्थ
और एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे होकर बाहम पूछताछ करेंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَقْبَلَ – एक-दूसरे की ओर मुड़े, रुख किया
  • بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ – उनमें से एक दूसरे की ओर (आमना-सामना)
  • يَتَسَاءَلُونَ – एक-दूसरे से सवाल-जवाब करेंगे, एक-दूसरे को मलामत करेंगे और झगड़ेंगे

विस्तृत तफसीर:

जब क़यामत का दिन आएगा और हर इंसान अपने किए हुए आमाल का सामना करेगा, तो काफ़िरों की हालत बड़ी दर्दनाक होगी। उस दिन वे एक-दूसरे की तरफ रुख करेंगे और आपस में सवाल-जवाब करने लगेंगे। लेकिन यह सवाल-जवाब किसी भलाई या रहमत के लिए नहीं होगा, बल्कि यह एक-दूसरे को मलामत करने, इल्ज़ाम लगाने और झगड़ने का सिलसिला होगा।

उस दिन पैरोकार (अनुयायी) अपने सरदारों और रहनुमाओं से कहेंगे: "तुमने हमें गुमराह किया, तुमने हमें सच्चे रास्ते से भटकाया।" और सरदार जवाब देंगे: "तुम खुद अपनी मर्ज़ी से हमारे पीछे चले थे, हमने तुम्हें ज़बरदस्ती नहीं किया।" इस तरह वे एक-दूसरे पर दोष मढ़ेंगे, लेकिन यह सब बेकार होगा, क्योंकि उस दिन कोई बहाना काम नहीं आएगा और न ही किसी की सुनवाई होगी।

यह वह समय होगा जब न तो कोई दोस्त किसी दोस्त के काम आएगा, न कोई रिश्तेदार किसी रिश्तेदार की मदद कर सकेगा। हर इंसान अपने ही फिक्र में डूबा होगा। यह तिलावत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आज हम जिन लोगों की बात मानते हैं, जिनके पीछे चलते हैं, क्या वे हमें उस दिन बचा सकेंगे? हरगिज़ नहीं!

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें आगाह करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में उन लोगों की पैरवी करें जो हमें अल्लाह की राह दिखाएं, जो हमें नेकी की तरफ बुलाएं। रसूलुल्लाह ﷺ की सुन्नत और क़ुरआन की तालीमात ही वह रास्ता है जो हमें जहन्नुम की आग से बचाकर जन्नत की राह पर ले जाएगा। आज हमें यह फैसला करना है कि किसके पीछे चलना है — उन लोगों के जो हमें गुमराह करेंगे और क़यामत के दिन हमसे झगड़ेंगे, या उनके जो हमें सच्चाई की तरफ बुलाते हैं और जिनकी पैरवी पर हमें सुकून और कामयाबी मिलेगी।

अल्लाह हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 25-29 — सूरा अस-साफ्फात

25مَا لَكُمْ لَا تَنَاصَرُونَ
(अरे कमबख्तों) अब तुम्हें क्या होगा कि एक दूसरे की मदद नहीं करते
26بَلْ هُمُ الْيَوْمَ مُسْتَسْلِمُونَ
(जवाब क्या देंगे) बल्कि वह तो आज गर्दन झुकाए हुए हैं
27وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَاءَلُونَ
और एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे होकर बाहम पूछताछ करेंगे
28قَالُوا إِنَّكُمْ كُنتُمْ تَأْتُونَنَا عَنِ الْيَمِينِ
(और इन्सान शयातीन से) कहेंगे कि तुम ही तो हमारी दाहिनी तरफ से (हमें बहकाने को) चढ़ आते थे
29قَالُوا بَل لَّمْ تَكُونُوا مُؤْمِنِينَ
वह जवाब देगें (हम क्या जानें) तुम तो खुद ईमान लाने वाले न थे
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
27आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 27

सूरा अस-साफ्फात आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे होकर बाहम पूछताछ करेंगे

सूरा आयत 27/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Saturday, October 3, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए