अस-साफ्फात · 28/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
قَالُوا إِنَّكُمْ كُنتُمْ تَأْتُونَنَا عَنِ الْيَمِينِ ۝٢٨
Qaalooo innakum kuntum taatoonanaa `anil yameen
📖 हिंदी अर्थ
(और इन्सान शयातीन से) कहेंगे कि तुम ही तो हमारी दाहिनी तरफ से (हमें बहकाने को) चढ़ आते थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • तातूनना – तुम हमारे पास आते थे
  • अनिल यमीन – दाहिनी ओर से, अर्थात धर्म और सत्य के रास्ते से

तफसीर:

जब अल्लाह तआला जहन्नम के आग और अज़ाब का सामना करने के लिए गुनाहगारों को इकट्ठा करेगा, तो वहाँ नेताओं और अनुयायियों के बीच बहस और झगड़ा होगा। अनुयायी अपने बड़ों और रहनुमाओं से कहेंगे: "तुम ही तो थे जो हमारे पास धर्म और सत्य की ओर से आते थे। तुम हमें धोखा देते थे, हमारे सामने झूठ को सच के रूप में पेश करते थे, और हमें अल्लाह के सीधे रास्ते से भटकाते थे। तुम हमारे पास इस तरह आते थे जैसे तुम सच्चाई और भलाई की तरफ बुला रहे हो, लेकिन असल में तुम हमें गुमराह कर रहे थे।"

यह वही बात है जो कुरआन ने दूसरी जगह बयान की है कि अनुयायी कहेंगे: "बल्कि तुम ही लोग रात-दिन चालें चलते थे, तुम हमें हुक्म देते थे कि हम अल्लाह के साथ कुफ्र करें और उसके साथ दूसरों को शरीक ठहराएं।" यानी ये नेता अपने अनुयायियों को धोखा देने के लिए हर हथकंडा अपनाते थे, और उन्हें ऐसे रास्ते से गुमराह करते थे जिसे देखकर लोग समझते थे कि यह सच्चाई और भलाई का रास्ता है।

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी सीख है कि हमें अपने रहनुमाओं, बड़ों और उन लोगों से सावधान रहना चाहिए जो हमें धर्म के नाम पर गुमराह करते हैं। हमें हर बात को कुरआन और सुन्नत की कसौटी पर परखना चाहिए। अल्लाह तआला ने हमें अक्ल दी है और कुरआन को हिदायत के लिए भेजा है, ताकि हम सच और झूठ में फर्क कर सकें। जो लोग दुनिया में सच्चाई की तरफ बुलाते हैं, वे अल्लाह के नेक बंदे होते हैं, लेकिन जो लोग धर्म के नाम पर लोगों को गुमराह करते हैं, वे शैतान के साथी होते हैं। क़यामत के दिन उनका यह धोखा खुल जाएगा और वे एक-दूसरे को दोष देंगे, लेकिन वहाँ कोई बहाना काम नहीं आएगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने दीन को खुद समझें, कुरआन और सही हदीस से रोशनी हासिल करें, और किसी की अंधी पैरवी न करें। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफीक दे। आमीन।



📜 आयत 26-30 — अस-साफ्फात

26بَلْ هُمُ الْيَوْمَ مُسْتَسْلِمُونَ
(जवाब क्या देंगे) बल्कि वह तो आज गर्दन झुकाए हुए हैं
27وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَاءَلُونَ
और एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे होकर बाहम पूछताछ करेंगे
28قَالُوا إِنَّكُمْ كُنتُمْ تَأْتُونَنَا عَنِ الْيَمِينِ
(और इन्सान शयातीन से) कहेंगे कि तुम ही तो हमारी दाहिनी तरफ से (हमें बहकाने को) चढ़ आते थे
29قَالُوا بَل لَّمْ تَكُونُوا مُؤْمِنِينَ
वह जवाब देगें (हम क्या जानें) तुम तो खुद ईमान लाने वाले न थे
30وَمَا كَانَ لَنَا عَلَيْكُم مِّن سُلْطَانٍ ۖ بَلْ كُنتُمْ قَوْمًا طَاغِينَ
और (साफ़ तो ये है कि) हमारी तुम पर कुछ हुकूमत तो थी नहीं बल्कि तुम खुद सरकश लोग थे
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अनुवाद — अस-साफ्फात 28

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Tuesday, August 18, 2026

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