अस-साफ्फात · 60/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ ۝٦٠
Inna haazaa falya`ma lil`aamiloon
📖 हिंदी अर्थ
(तो तुम्हें यक़ीन न होता था) ये यक़ीनी बहुत बड़ी कामयाबी है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الفَوْزُ: कामयाबी, सफलता, छुटकारा पाना।
  • العَظِيمُ: बहुत बड़ा, महान, जिसके बराबर कोई और न हो।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत जन्नत (स्वर्ग) में दाखिल होने वाले नेक बंदों का कलाम है। जब वे जन्नत की नेमतों और आराम को देखेंगे, और यह महसूस करेंगे कि उन्हें हमेशा के लिए यहाँ रहना है, न मौत आएगी और न कोई अज़ाब (यातना) — तो वे खुशी और शुक्र के साथ कहेंगे: "बेशक यही सबसे बड़ी कामयाबी है!"

यानी, यह वह कामयाबी है जिसके आगे दुनिया की हर कामयाबी बेमानी है। दुनिया में इंसान जो कुछ भी हासिल करता है — धन, पद, शोहरत — वह सब फानी (नाशवान) है और उसमें कोई कमी या खतरा हमेशा बना रहता है। लेकिन जन्नत की कामयाबी ऐसी है जो कभी खत्म नहीं होती, न उसमें कोई कमी आती है और न ही कोई डर या गम। यही असली और हमेशा रहने वाली सफलता है।

अल्लाह तआला ने अपने नेक बंदों को यह बड़ी नेमत इसलिए दी क्योंकि उन्होंने दुनिया में अल्लाह की इबादत की, उसके हुक्मों पर अमल किया और उसकी राह में मुश्किलें सहन कीं। उनका यह अंजाम देखकर हमें समझना चाहिए कि असली ज़िंदगी आख़िरत की ज़िंदगी है। अगर हम चाहते हैं कि हम भी उस दिन यह खुशी का पैगाम सुनें और यह कलाम कहें, तो आज हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा (खुशी) के मुताबिक ढालना होगा।

याद रखिए! यह दुनिया इम्तिहान की जगह है, और जन्नत इनाम की जगह। जिसने इस इम्तिहान को अच्छी तरह पास किया, उसके लिए यही "फ़ौज़-ए-अज़ीम" (महान सफलता) है। अल्लाह से दुआ है कि वह हम सबको इसी कामयाबी तक पहुँचाए — आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 58-62 — अस-साफ्फात

58أَفَمَا نَحْنُ بِمَيِّتِينَ
(अब बताओ) क्या (मैं तुम से न कहता था) कि हम को इस पहली मौत के सिवा फिर मरना नहीं है
59إِلَّا مَوْتَتَنَا الْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ
और न हम पर (आख़ेरत) में अज़ाब होगा
60إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
(तो तुम्हें यक़ीन न होता था) ये यक़ीनी बहुत बड़ी कामयाबी है
61لِمِثْلِ هَٰذَا فَلْيَعْمَلِ الْعَامِلُونَ
ऐसी (ही कामयाबी) के वास्ते काम करने वालों को कारगुज़ारी करनी चाहिए
62أَذَٰلِكَ خَيْرٌ نُّزُلًا أَمْ شَجَرَةُ الزَّقُّومِ
भला मेहमानी के वास्ते ये (सामान) बेहतर है या थोहड़ का दरख्त (जो जहन्नुमियों के वास्ते होगा)
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अनुवाद — अस-साफ्फात 60

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Tuesday, August 18, 2026

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