अस-साफ्फात · 59/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
إِلَّا مَوْتَتَنَا الْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ ۝٥٩
Illa mawtatanal oola wa maa nahnu bimu`azzabeen
📖 हिंदी अर्थ
और न हम पर (आख़ेरत) में अज़ाब होगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِلَّا مَوْتَتَنَا الْأُولَىٰ: हमारी पहली मौत के अलावा (यानी दुनिया की मौत)।
  • وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ: और हम पर कोई अज़ाब (यातना) नहीं होगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस मुबारक मौके का ज़िक्र करती है जब जन्नत के लोग अपनी नेमतों (आशीर्वादों) को देखकर हैरान और शुक्रगुज़ार होते हैं। वे एक-दूसरे से कहते हैं: "क्या यह सच है कि हम हमेशा के लिए यहाँ रहेंगे? हमें तो सिर्फ़ एक ही मौत आई थी—दुनिया की मौत—और अब हमें कभी मरना नहीं है। और न ही हमें कोई अज़ाब होगा, जैसा कि काफ़िरों और गुनाहगारों को होगा।" यह उनकी खुशी और इत्मिनान का इज़हार है कि अल्लाह ने उन्हें हमेशा की ज़िंदगी और सुकून से भरी नेमतें अता की हैं।

यहाँ "إِلَّا" (सिवाय) का इस्तेमाल इस बात के लिए है कि उनकी ज़िंदगी में सिर्फ़ एक ही मौत आई—दुनिया में—और उसके बाद कोई मौत नहीं। यानी जन्नत की ज़िंदगी हमेशा की है, और वहाँ से निकलना या मरना नहीं है। साथ ही, वे यह भी बयान कर रहे हैं कि उन्हें अज़ाब से बिल्कुल महफ़ूज़ (सुरक्षित) रखा गया है, क्योंकि अल्लाह ने उनके गुनाह माफ़ कर दिए और उन्हें अपनी रहमत से नवाज़ा।

यह आयत हमें बताती है कि जन्नत की नेमतें सिर्फ़ दुनिया के कामों का बदला नहीं हैं, बल्कि अल्लाह की असीम रहमत और करम का नतीजा हैं। जो लोग दुनिया में अल्लाह के हुक्मों पर चले और उसकी राह में सब्र किया, उनके लिए यह इनाम है कि वे हमेशा की खुशियों में रहेंगे और किसी भी तरह के दुख या अज़ाब से दूर होंगे।

दावती पहलू:

यह आयत मोमिनों के दिलों में उम्मीद और खुशी पैदा करती है कि अल्लाह की राह में की गई मेहनत और नेकियाँ कभी ज़ाया नहीं होतीं। जन्नत की यह ख़बर हमें बताती है कि दुनिया की मुश्किलें और परेशानियाँ अस्थायी हैं, और असली सुकून उस ज़िंदगी में है जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए तैयार की है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा (खुशी) के मुताबिक बनाएँ, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हों जिन्हें यह पुकारना नसीब हो: "हमें सिर्फ़ एक मौत आई, और अब हम हमेशा की नेमतों में हैं, और हम पर कोई अज़ाब नहीं।" यही सबसे बड़ी कामयाबी है—ऐसी कामयाबी जो कभी खत्म नहीं होती।

🎧 सुनें

📜 आयत 57-61 — अस-साफ्फात

57وَلَوْلَا نِعْمَةُ رَبِّي لَكُنتُ مِنَ الْمُحْضَرِينَ
और अगर मेरे परवरदिगार का एहसान न होता तो मैं भी (इस वक्त) तेरी तरह जहन्नुम में गिरफ्तार किया गया होता
58أَفَمَا نَحْنُ بِمَيِّتِينَ
(अब बताओ) क्या (मैं तुम से न कहता था) कि हम को इस पहली मौत के सिवा फिर मरना नहीं है
59إِلَّا مَوْتَتَنَا الْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ
और न हम पर (आख़ेरत) में अज़ाब होगा
60إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
(तो तुम्हें यक़ीन न होता था) ये यक़ीनी बहुत बड़ी कामयाबी है
61لِمِثْلِ هَٰذَا فَلْيَعْمَلِ الْعَامِلُونَ
ऐसी (ही कामयाबी) के वास्ते काम करने वालों को कारगुज़ारी करनी चाहिए
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीRevelation
59आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 59

सूरा अस-साफ्फात आयत 59 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और न हम पर (आख़ेरत) में अज़ाब होगा

सूरा आयत 59/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 57–61. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए