अस-साफ्फात · 61/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
لِمِثْلِ هَٰذَا فَلْيَعْمَلِ الْعَامِلُونَ ۝٦١
Limisli haaza falya`ma lil `aamiloon
📖 हिंदी अर्थ
ऐसी (ही कामयाबी) के वास्ते काम करने वालों को कारगुज़ारी करनी चाहिए

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لِمِثْلِ هَذَا: ऐसे (इनाम) के समान के लिए
  • فَلْيَعْمَلِ الْعَامِلُونَ: तो कर्म करने वालों को कर्म करना चाहिए

तफसीर:

यह आयत उस महान नेमत और स्थायी सुख की ओर संकेत करती है जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए जन्नत में तैयार किया है। अल्लाह तआला फरमाता है कि ऐसे ही इनाम के लिए, ऐसी ही सफलता के लिए, और ऐसे ही स्थायी आनंद के लिए कर्म करने वालों को कर्म करना चाहिए। यानी दुनिया की फानी और अस्थायी चीज़ों के लिए नहीं, बल्कि उस शाश्वत सुख के लिए मेहनत करनी चाहिए जो कभी खत्म नहीं होता।

यह वही "लाभदायक व्यापार" है जिसका ज़िक्र कुरआन में किया गया है—अपने ईमान और अच्छे कर्मों के बदले जन्नत खरीदना। यह वह काम है जिसमें नुकसान का कोई डर नहीं, क्योंकि अल्लाह अपने वादे में कभी खिलाफ नहीं करता।

दुनिया के कामों में इंसान मेहनत करता है, थकता है, लेकिन उसका फल अनिश्चित होता है और मिल भी जाए तो अस्थायी होता है। लेकिन आख़िरत के कामों में की गई मेहनत का फल पक्का है, और वह भी ऐसा फल जिसके सामने दुनिया की सारी दौलतें और सुख-सुविधाएं बौनी हैं। जन्नत की नेमतें ऐसी हैं जिन्हें न किसी आंख ने देखा, न किसी कान ने सुना, और न किसी दिल ने उनका ख्याल किया।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें बताना चाहते हैं कि हमारी कोशिशें और हमारे कर्म उसी लक्ष्य के लिए होने चाहिए। जो लोग दुनिया की चमक-दमक और अस्थायी सुखों के पीछे भागते हैं, वे उस चीज़ को खो देते हैं जो हमेशा रहने वाली है। लेकिन जो लोग अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के लिए समर्पित कर देते हैं, वे असली कामयाबी हासिल करते हैं।

याद रखिए, यह दुनिया एक खेल और मनोरंजन है, लेकिन आख़िरत का घर असली ज़िंदगी है। काश लोग इस हकीकत को समझ लें! तो आइए, हम अपने कर्मों को उसी महान लक्ष्य के लिए समर्पित करें, और उस स्थायी सुख की ओर दौड़ें जो अल्लाह ने अपने प्यारे बंदों के लिए तैयार किया है। यही असली कामयाबी है, और यही वह चीज़ है जिसके लिए हमें अपनी पूरी ताकत लगा देनी चाहिए।



📜 आयत 59-63 — सूरा अस-साफ्फात

59إِلَّا مَوْتَتَنَا الْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ
और न हम पर (आख़ेरत) में अज़ाब होगा
60إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
(तो तुम्हें यक़ीन न होता था) ये यक़ीनी बहुत बड़ी कामयाबी है
61لِمِثْلِ هَٰذَا فَلْيَعْمَلِ الْعَامِلُونَ
ऐसी (ही कामयाबी) के वास्ते काम करने वालों को कारगुज़ारी करनी चाहिए
62أَذَٰلِكَ خَيْرٌ نُّزُلًا أَمْ شَجَرَةُ الزَّقُّومِ
भला मेहमानी के वास्ते ये (सामान) बेहतर है या थोहड़ का दरख्त (जो जहन्नुमियों के वास्ते होगा)
63إِنَّا جَعَلْنَاهَا فِتْنَةً لِّلظَّالِمِينَ
जिसे हमने यक़ीनन ज़ालिमों की आज़माइश के लिए बनाया है
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
61आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 61

सूरा अस-साफ्फात आयत 61 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐसी (ही कामयाबी) के वास्ते काम करने वालों को कारगुज़ारी…

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Saturday, October 3, 2026

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