अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नज्जैना: हमने नजात दी, बचा लिया।
- अह्ल: परिवार, घर वाले।
- कर्ब: संकट, कठिनाई, दुख।
- अज़ीम: बहुत बड़ा, महान।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपने नबी हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि हमने उन्हें और उनके परिवार वालों को उस बड़े संकट से नजात दी, जो उनके ऊपर आया था। यह संकट दो तरह का था: एक तो उनकी क़ौम के ज़ालिमों की तरफ से आने वाला अत्याचार और दुख, और दूसरा वह तूफान (सैलाब) जो अल्लाह ने काफ़िरों पर भेजा था। हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) और उनके साथ ईमान लाने वाले मोमिनीन को अल्लाह ने इस भयानक तूफान से महफ़ूज़ रखा, जबकि उनकी क़ौम के इनकार करने वाले लोग उसमें डूब कर हलाक हो गए।
यह अल्लाह की उस रहमत और क़ुदरत का ज़िंदा सबूत है कि जो लोग उस पर भरोसा करते हैं और उसके नबी की पैरवी करते हैं, अल्लाह उन्हें हर मुसीबत से निकाल लेता है। हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने सैकड़ों साल तक अपनी क़ौम को तौहीद की दावत दी, मगर उनमें से बहुत कम लोग ईमान लाए। जब काफ़िरों ने सरकशी की हद पार कर दी, तो अल्लाह ने उन पर अपना अज़ाब नाज़िल किया, लेकिन अपने नबी और उनके साथियों को उस अज़ाब से महफ़ूज़ रखा।
इस आयत में मोमिनीन के लिए बड़ी तसल्ली और सबक़ है कि दुनिया में चाहे कितनी भी मुसीबतें आ जाएँ, अल्लाह पर भरोसा रखने वालों के लिए हमेशा नजात का रास्ता खुला रहता है। अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। यही वजह है कि हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की याद को अल्लाह ने हमेशा के लिए बाक़ी रखा और उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त अता की। हमें भी चाहिए कि अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की इताअत और उसके रसूल की पैरवी को अपनाएँ, ताकि हम भी उसी रहमत के हक़दार बन सकें जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों को अता की।
📜 आयत 74-78 — अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 76
सूरा अस-साफ्फात आयत 76 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने उनको और उनके लड़के वालों को बड़ी (सख्त)…सूरा आयत 76/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 74–78. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








