अस-साफ्फात · 76/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
وَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ ۝٧٦
Wa jajainaahu wa ahlahoo minal karbil `azeem
📖 हिंदी अर्थ
और हमने उनको और उनके लड़के वालों को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नज्जैना: हमने नजात दी, बचा लिया।
  • अह्ल: परिवार, घर वाले।
  • कर्ब: संकट, कठिनाई, दुख।
  • अज़ीम: बहुत बड़ा, महान।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने नबी हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि हमने उन्हें और उनके परिवार वालों को उस बड़े संकट से नजात दी, जो उनके ऊपर आया था। यह संकट दो तरह का था: एक तो उनकी क़ौम के ज़ालिमों की तरफ से आने वाला अत्याचार और दुख, और दूसरा वह तूफान (सैलाब) जो अल्लाह ने काफ़िरों पर भेजा था। हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) और उनके साथ ईमान लाने वाले मोमिनीन को अल्लाह ने इस भयानक तूफान से महफ़ूज़ रखा, जबकि उनकी क़ौम के इनकार करने वाले लोग उसमें डूब कर हलाक हो गए।

यह अल्लाह की उस रहमत और क़ुदरत का ज़िंदा सबूत है कि जो लोग उस पर भरोसा करते हैं और उसके नबी की पैरवी करते हैं, अल्लाह उन्हें हर मुसीबत से निकाल लेता है। हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने सैकड़ों साल तक अपनी क़ौम को तौहीद की दावत दी, मगर उनमें से बहुत कम लोग ईमान लाए। जब काफ़िरों ने सरकशी की हद पार कर दी, तो अल्लाह ने उन पर अपना अज़ाब नाज़िल किया, लेकिन अपने नबी और उनके साथियों को उस अज़ाब से महफ़ूज़ रखा।

इस आयत में मोमिनीन के लिए बड़ी तसल्ली और सबक़ है कि दुनिया में चाहे कितनी भी मुसीबतें आ जाएँ, अल्लाह पर भरोसा रखने वालों के लिए हमेशा नजात का रास्ता खुला रहता है। अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। यही वजह है कि हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की याद को अल्लाह ने हमेशा के लिए बाक़ी रखा और उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त अता की। हमें भी चाहिए कि अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की इताअत और उसके रसूल की पैरवी को अपनाएँ, ताकि हम भी उसी रहमत के हक़दार बन सकें जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों को अता की।



📜 आयत 74-78 — अस-साफ्फात

74إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ
मगर (हाँ) खुदा के निरे खरे बन्दे (महफूज़ रहे)
75وَلَقَدْ نَادَانَا نُوحٌ فَلَنِعْمَ الْمُجِيبُونَ
और नूह ने (अपनी कौम से मायूस होकर) हमें ज़रूर पुकारा था (देखो हम) क्या खूब जवाब देने वाले थे
76وَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ
और हमने उनको और उनके लड़के वालों को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी
77وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهُ هُمُ الْبَاقِينَ
और हमने (उनमें वह बरकत दी कि) उनकी औलाद को (दुनिया में) बरक़रार रखा
78وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ
और बाद को आने वाले लोगों में उनका अच्छा चर्चा बाक़ी रखा
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अनुवाद — अस-साफ्फात 76

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Tuesday, August 18, 2026

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