अस-साफ्फात · 98/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
فَأَرَادُوا بِهِ كَيْدًا فَجَعَلْنَاهُمُ الْأَسْفَلِينَ ۝٩٨
Fa araadoo bihee kaidan faja `alnaahumul asfaleen
📖 हिंदी अर्थ
और (उसमें आग सुलगा कर उसी दहकती हुई आग में इसको डाल दो) फिर उन लोगों ने इबराहीम के साथ मक्कारी करनी चाही

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • कैदन (كيدًا): चालाकी, धोखा, बुरी योजना।
  • अस्फ़लीन (الأسفلين): सबसे नीचे वाले, अपमानित, पराजित।

तफ़सीर:

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की क़ौम ने जब देखा कि वे उन्हें मानने से इनकार कर रहे हैं और उनके देवताओं को बुरा भला कह रहे हैं, तो उन्होंने एक भयानक साज़िश रची। उन्होंने इब्राहीम अलैहिस्सलाम को आग में डालने का फ़ैसला किया, ताकि उन्हें जला कर ख़त्म कर दें और इस तरह अपने धर्म और अपने देवताओं की इज़्ज़त बचा लें। उन्होंने एक विशाल आग तैयार की और हज़रत इब्राहीम को उसमें फेंक दिया।

लेकिन अल्लाह तआला ने अपने नबी की मदद की और उनकी साज़िश को नाकाम कर दिया। अल्लाह ने आग को हुक्म दिया कि वह इब्राहीम के लिए ठंडी और सलामती वाली हो जाए। इस तरह जो लोग इब्राहीम अलैहिस्सलाम को नीचा दिखाना चाहते थे, अल्लाह ने उन्हें ख़ुद नीचा कर दिया। वे अपनी चालाकी में नाकाम रहे और उनका मकसद पूरा न हुआ। बल्कि अल्लाह ने उन्हें रुसवा किया और उनकी साज़िश को उन्हीं पर उलट दिया।

यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को कोई ताक़त नुक़सान नहीं पहुँचा सकती। चाहे दुनिया की तमाम ताक़तें इकट्ठा हो जाएँ, लेकिन अल्लाह की मर्ज़ी के बग़ैर कुछ नहीं हो सकता। जो लोग अल्लाह के नबियों और उनके दीन के ख़िलाफ़ साज़िशें करते हैं, वे हमेशा नाकाम होते हैं और आख़िरत में उनका अंजाम और भी बुरा होगा।

यह भी सबक है कि मुसीबत के वक़्त में अल्लाह से दुआ करें और उसी पर भरोसा रखें। जिस तरह अल्लाह ने हज़रत इब्राहीम को आग से बचाया, उसी तरह वह अपने मोमिन बंदों को हर मुसीबत से निकालने की ताक़त रखता है। अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है और उसकी मदद मोमिनों के साथ है।



📜 आयत 96-100 — सूरा अस-साफ्फात

96وَاللَّهُ خَلَقَكُمْ وَمَا تَعْمَلُونَ
इबराहीम ने कहा (अफ़सोस) तुम लोग उसकी परसतिश करते हो जिसे तुम लोग खुद तराश कर बनाते हो
97قَالُوا ابْنُوا لَهُ بُنْيَانًا فَأَلْقُوهُ فِي الْجَحِيمِ
हालाँकि तुमको और जिसको तुम लोग बनाते हो (सबको) खुदा ही ने पैदा किया है (ये सुनकर) वह लोग (आपस में कहने लगे) इसके लिए (भट्टी की सी) एक इमारत बनाओ
98فَأَرَادُوا بِهِ كَيْدًا فَجَعَلْنَاهُمُ الْأَسْفَلِينَ
और (उसमें आग सुलगा कर उसी दहकती हुई आग में इसको डाल दो) फिर उन लोगों ने इबराहीम के साथ मक्कारी करनी चाही
99وَقَالَ إِنِّي ذَاهِبٌ إِلَىٰ رَبِّي سَيَهْدِينِ
तो हमने (आग सर्द गुलज़ार करके) उन्हें नीचा दिखाया और जब (आज़र ने) इबराहीम को निकाल दिया तो बोले मैं अपने परवरदिगार की तरफ जाता हूँ
100رَبِّ هَبْ لِي مِنَ الصَّالِحِينَ
वह अनक़रीब ही मुझे रूबरा कर देगा (फिर ग़रज की) परवरदिगार मुझे एक नेको कार (फरज़न्द) इनायत फरमा
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
98आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 98

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Friday, October 2, 2026

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