अस-साफ्फात · 97/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
قَالُوا ابْنُوا لَهُ بُنْيَانًا فَأَلْقُوهُ فِي الْجَحِيمِ ۝٩٧
Qaalub noo lahoo bun yaanan fa alqoohu fil jaheem
📖 हिंदी अर्थ
हालाँकि तुमको और जिसको तुम लोग बनाते हो (सबको) खुदा ही ने पैदा किया है (ये सुनकर) वह लोग (आपस में कहने लगे) इसके लिए (भट्टी की सी) एक इमारत बनाओ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بُنْيَانًا: ऊँची इमारत या भट्ठी जैसी कोई संरचना।
  • الْجَحِيمِ: अत्यधिक भयंकर और भड़कती हुई आग।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम के सामने स्पष्ट प्रमाण और तर्क पेश कर दिए, और उनके देवताओं की निरर्थकता को बड़ी ही सूझ-बूझ से साबित कर दिया, तो उनकी क़ौम के पास जवाब देने की कोई शक्ति नहीं बची। जब वे तर्क और बुद्धि के मैदान में हार गए, तो उन्होंने अपनी कमज़ोरी और निराशा के कारण ज़ोर और ताक़त का सहारा लिया। यह उन लोगों की आदत है जो सत्य के सामने हथियार डाल देते हैं, लेकिन अपनी ग़लतफ़हमी और अहंकार के कारण सत्य को स्वीकार नहीं करते।

उन्होंने आपस में सलाह-मशविरा करके कहा: "इब्राहीम के लिए एक ऊँची इमारत (भट्ठी) बनाओ, उसे लकड़ियों से भर दो, और जब आग भड़क उठे तो उसे उसमें फेंक दो।" उन्होंने यह कहकर अपनी बर्बरता और ज़ुल्म की पूरी मंशा ज़ाहिर कर दी। वे चाहते थे कि इस तरह वे उस सच्चे दीन को ख़त्म कर दें जो हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ला रहे थे।

यह घटना हमें सिखाती है कि सत्य के पैरोकारों को हमेशा मुश्किलों और अज़ीयतों का सामना करना पड़ता है, लेकिन अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद करता है और उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। जिस तरह आग हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के लिए ठंडी और सलामती वाली हो गई, उसी तरह अल्लाह अपने मोमिन बंदों के लिए हर मुश्किल में राहत पैदा करता है। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम सच्चाई पर डटे रहें, चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, क्योंकि अल्लाह की मदद सच्चे लोगों के साथ होती है।



📜 आयत 95-99 — सूरा अस-साफ्फात

95قَالَ أَتَعْبُدُونَ مَا تَنْحِتُونَ
जब उन लोगों को ख़बर हुई तो इबराहीम के पास दौड़ते हुए पहुँचे
96وَاللَّهُ خَلَقَكُمْ وَمَا تَعْمَلُونَ
इबराहीम ने कहा (अफ़सोस) तुम लोग उसकी परसतिश करते हो जिसे तुम लोग खुद तराश कर बनाते हो
97قَالُوا ابْنُوا لَهُ بُنْيَانًا فَأَلْقُوهُ فِي الْجَحِيمِ
हालाँकि तुमको और जिसको तुम लोग बनाते हो (सबको) खुदा ही ने पैदा किया है (ये सुनकर) वह लोग (आपस में कहने लगे) इसके लिए (भट्टी की सी) एक इमारत बनाओ
98فَأَرَادُوا بِهِ كَيْدًا فَجَعَلْنَاهُمُ الْأَسْفَلِينَ
और (उसमें आग सुलगा कर उसी दहकती हुई आग में इसको डाल दो) फिर उन लोगों ने इबराहीम के साथ मक्कारी करनी चाही
99وَقَالَ إِنِّي ذَاهِبٌ إِلَىٰ رَبِّي سَيَهْدِينِ
तो हमने (आग सर्द गुलज़ार करके) उन्हें नीचा दिखाया और जब (आज़र ने) इबराहीम को निकाल दिया तो बोले मैं अपने परवरदिगार की तरफ जाता हूँ
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
97आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 97

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Friday, October 2, 2026

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