Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- سَخَّرْنَا: हमने वश में कर दिया, अधीन कर दिया।
- يُسَبِّحْنَ: वे तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करते थे।
- بِالْعَشِيِّ: शाम का समय, दिन के अंतिम भाग में।
- وَالإِشْرَاقِ: सूर्योदय के बाद का समय, जब सूरज पूरी तरह चमक उठता है।
तफसीर:
यह आयत हमें हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) की महान शान और अल्लाह की उन पर विशेष कृपा का वर्णन करती है। अल्लाह तआला ने पहाड़ों को उनके वश में कर दिया था, यानी पहाड़ उनके साथ मिलकर अल्लाह की तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करते थे। यह कोई साधारण बात नहीं थी, बल्कि यह अल्लाह की ओर से एक चमत्कार और सम्मान था जो उन्हें विशेष रूप से प्रदान किया गया था।
यह तस्बीह "बिल-अशिय्यि वल-इशराक" यानी शाम के समय और सूर्योदय के बाद होती थी। ये दोनों समय इबादत और अल्लाह की याद के लिए बहुत ही अफ़ज़ल (उत्तम) हैं। जब सुबह सूरज निकलता है और रोशनी फैलती है, और जब शाम को दिन ढलता है, तो ये वो घड़ियाँ हैं जब दिल खुद-ब-खुद अल्लाह की ओर मुड़ता है। पहाड़ों का इन समयों में तस्बीह करना इस बात की निशानी है कि पूरी कायनात अल्लाह की तस्बीह कर रही है, और हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) की आवाज़ के साथ पहाड़ भी गूँज उठते थे।
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को ऐसी ख़ास नेमतें और मु'जिज़ात देता है जो उनके ईमान और इबादत को और बढ़ाते हैं। हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) को पहाड़ों के साथ-साथ पक्षियों का भी वश में किया गया था, जो उनके साथ तस्बीह करते थे। यह अल्लाह की कुदरत का एक अज़ीम नमूना है।
हमें भी चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में सुबह और शाम के समय अल्लाह की याद और तस्बीह को अपनी आदत बनाएँ। जब हम देखते हैं कि पहाड़ और पक्षी जैसी मख़लूक़ात अल्लाह की तस्बीह करती हैं, तो हम इंसानों को और अधिक अल्लाह की इबादत और उसकी याद में लगे रहना चाहिए। यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह के नेक बंदों की इबादत में एक ख़ास रौनक़ और असर होता है, जिससे पूरी कायनात जुड़ जाती है।
आइए हम अपने दिलों को अल्लाह की याद से रोशन करें और सुबह-शाम उसकी तस्बीह और तहलील को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ, ताकि हम भी उन नेक बंदों की तरह अल्लाह के क़रीब हो सकें जिन्होंने अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत में गुज़ारा।
📜 आयत 16-20 — सूरा साद
अनुवाद — साद 18
सूरा साद आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक वह हमारी बारगाह में बड़े रूजू करने वाले थे…सूरा आयत 18/88 — सूरा साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा साद सुनें, सूरा साद अनुवाद, सूरा साद mp3, सूरा साद pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा साद
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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