साद · 18/88
अनुवाद उच्चारण — साद
إِنَّا سَخَّرْنَا الْجِبَالَ مَعَهُ يُسَبِّحْنَ بِالْعَشِيِّ وَالْإِشْرَاقِ ۝١٨
Innaa sakhkharnal jibaala ma`ahoo yusabbihna bil`ashaiyi wal ishraaq
📖 हिंदी अर्थ
बेशक वह हमारी बारगाह में बड़े रूजू करने वाले थे हमने पहाड़ों को भी ताबेदार बना दिया था कि उनके साथ सुबह और शाम (खुदा की) तस्बीह करते थे

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سَخَّرْنَا: हमने वश में कर दिया, अधीन कर दिया।
  • يُسَبِّحْنَ: वे तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करते थे।
  • بِالْعَشِيِّ: शाम का समय, दिन के अंतिम भाग में।
  • وَالإِشْرَاقِ: सूर्योदय के बाद का समय, जब सूरज पूरी तरह चमक उठता है।

तफसीर:

यह आयत हमें हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) की महान शान और अल्लाह की उन पर विशेष कृपा का वर्णन करती है। अल्लाह तआला ने पहाड़ों को उनके वश में कर दिया था, यानी पहाड़ उनके साथ मिलकर अल्लाह की तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करते थे। यह कोई साधारण बात नहीं थी, बल्कि यह अल्लाह की ओर से एक चमत्कार और सम्मान था जो उन्हें विशेष रूप से प्रदान किया गया था।

यह तस्बीह "बिल-अशिय्यि वल-इशराक" यानी शाम के समय और सूर्योदय के बाद होती थी। ये दोनों समय इबादत और अल्लाह की याद के लिए बहुत ही अफ़ज़ल (उत्तम) हैं। जब सुबह सूरज निकलता है और रोशनी फैलती है, और जब शाम को दिन ढलता है, तो ये वो घड़ियाँ हैं जब दिल खुद-ब-खुद अल्लाह की ओर मुड़ता है। पहाड़ों का इन समयों में तस्बीह करना इस बात की निशानी है कि पूरी कायनात अल्लाह की तस्बीह कर रही है, और हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) की आवाज़ के साथ पहाड़ भी गूँज उठते थे।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को ऐसी ख़ास नेमतें और मु'जिज़ात देता है जो उनके ईमान और इबादत को और बढ़ाते हैं। हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) को पहाड़ों के साथ-साथ पक्षियों का भी वश में किया गया था, जो उनके साथ तस्बीह करते थे। यह अल्लाह की कुदरत का एक अज़ीम नमूना है।

हमें भी चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में सुबह और शाम के समय अल्लाह की याद और तस्बीह को अपनी आदत बनाएँ। जब हम देखते हैं कि पहाड़ और पक्षी जैसी मख़लूक़ात अल्लाह की तस्बीह करती हैं, तो हम इंसानों को और अधिक अल्लाह की इबादत और उसकी याद में लगे रहना चाहिए। यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह के नेक बंदों की इबादत में एक ख़ास रौनक़ और असर होता है, जिससे पूरी कायनात जुड़ जाती है।

आइए हम अपने दिलों को अल्लाह की याद से रोशन करें और सुबह-शाम उसकी तस्बीह और तहलील को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ, ताकि हम भी उन नेक बंदों की तरह अल्लाह के क़रीब हो सकें जिन्होंने अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत में गुज़ारा।



📜 आयत 16-20 — साद

16وَقَالُوا رَبَّنَا عَجِّل لَّنَا قِطَّنَا قَبْلَ يَوْمِ الْحِسَابِ
और ये लोग (मज़ाक से) कहते हैं कि परवरदिगार हिसाब के दिन (क़यामत के) क़ब्ल ही (जो) हमारी क़िस्मत को लिखा (हो) हमें जल्दी दे दे
17اصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَاذْكُرْ عَبْدَنَا دَاوُودَ ذَا الْأَيْدِ ۖ إِنَّهُ أَوَّابٌ
(ऐ रसूल) जैसी जैसी बातें ये लोग करते हैं उन पर सब्र करो और हमारे बन्दे दाऊद को याद करो जो बड़े कूवत वाले थे
18إِنَّا سَخَّرْنَا الْجِبَالَ مَعَهُ يُسَبِّحْنَ بِالْعَشِيِّ وَالْإِشْرَاقِ
बेशक वह हमारी बारगाह में बड़े रूजू करने वाले थे हमने पहाड़ों को भी ताबेदार बना दिया था कि उनके साथ सुबह और शाम (खुदा की) तस्बीह करते थे
19وَالطَّيْرَ مَحْشُورَةً ۖ كُلٌّ لَّهُ أَوَّابٌ
और परिन्दे भी (यादे खुदा के वक्त सिमट) आते और उनके फरमाबरदार थे
20وَشَدَدْنَا مُلْكَهُ وَآتَيْنَاهُ الْحِكْمَةَ وَفَصْلَ الْخِطَابِ
और हमने उनकी सल्तनत को मज़बूत कर दिया और हमने उनको हिकमत और बहस के फैसले की कूवत अता फरमायी थी
सादकुरान सूची
88आयत
मक्कीRevelation
18आयत

अनुवाद — साद 18

सूरा साद आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक वह हमारी बारगाह में बड़े रूजू करने वाले थे…

सूरा आयत 18/88 — साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: साद सुनें, साद अनुवाद, साद mp3, साद pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए