साद · 47/88
अनुवाद उच्चारण — साद
وَإِنَّهُمْ عِندَنَا لَمِنَ الْمُصْطَفَيْنَ الْأَخْيَارِ ۝٤٧
Wa innahum `indanaa laminal mustafainal akhyaar
📖 हिंदी अर्थ
और इसमें शक नहीं कि ये लोग हमारी बारगाह में बरगुज़ीदा और नेक लोगों में हैं

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • المُصْطَفَيْنَ: चुने हुए, जिन्हें अल्लाह ने अपनी विशेष रहमत और करम से चुन लिया हो।
  • الأَخْيَارِ: “ख़ैर” का बहुवचन, यानी सबसे अच्छे, नेक और पाकीज़ा सिफ़त वाले लोग।

तफ़सीर:

यह आयत उन महान पैग़म्बरों (इब्राहीम, इस्हाक़ और याक़ूब अलैहिमुस्सलाम) के ज़िक्र में आई है, जिनका ज़िक्र पिछली आयात में हुआ। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग हमारे नज़दीक उन चुने हुए बंदों में से थे जिन्हें हमने अपनी इबादत और अपने दीन की ख़िदमत के लिए चुन लिया था। उन्हें दुनिया में भी बुलंदी दी गई और आख़िरत में भी उनका दर्जा सबसे ऊँचा है।

यह चुनाव अल्लाह की तरफ़ से था, जो उनके ईमान, सब्र, इख़्लास और अच्छे आचरण की बुनियाद पर हुआ। वे न सिर्फ़ ख़ुद नेक थे, बल्कि अपनी उम्मतों को भी नेकी की तरफ़ बुलाते थे। उनके दिलों में आख़िरत की याद बसी हुई थी, इसलिए उन्होंने दुनिया को आख़िरत पर तरजीह नहीं दी, बल्कि हमेशा अल्लाह की रज़ा के तलबगार रहे।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह के नज़दीक इज़्ज़त और बुलंदी का मापदंड नस्ल, माल या दुनियावी रुत्बा नहीं, बल्कि तक़वा और नेक अमल है। जो लोग अल्लाह के चुने हुए बंदे बनना चाहते हैं, उन्हें चाहिए कि वे अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत, उसके दीन की ख़िद्मत और लोगों की भलाई के लिए समर्पित कर दें। यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी तक पहुँचाता है।

अल्लाह तआला ने इन पैग़म्बरों को जो मर्तबा दिया, वह उनके अच्छे किरदार और अल्लाह के साथ उनके गहरे ताल्लुक़ की बदौलत था। हमें भी चाहिए कि अपनी ज़िंदगी को इन्हीं पाक हस्तियों के नक़्शे-क़दम पर चलाएँ, ताकि हम भी अल्लाह की रहमत और उसकी मुहब्बत के हक़दार बन सकें। याद रखें, अल्लाह की चुनाव उसकी रहमत है, लेकिन यह रहमत उन्हीं को मिलती है जो उसकी तरफ़ सच्चे दिल से रुजू करते हैं और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ ढालते हैं।



📜 आयत 45-49 — साद

45وَاذْكُرْ عِبَادَنَا إِبْرَاهِيمَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ أُولِي الْأَيْدِي وَالْأَبْصَارِ
बेशक वह हमारी बारगाह में बड़े झुकने वाले थे और (ऐ रसूल) हमारे बन्दों में इब्राहीम और इसहाक़ और बेशक वह (हमारी बारगाह में) बड़े झुकने वाले थे और (ऐ रसूल) हमारे बन्दों में इबराहीम और इसहाक़ और याकूब को याद करो जो कुवत और बसीरत वाले थे
46إِنَّا أَخْلَصْنَاهُم بِخَالِصَةٍ ذِكْرَى الدَّارِ
हमने उन लोगों को एक ख़ास सिफत आख़ेरत की याद से मुमताज़ किया था
47وَإِنَّهُمْ عِندَنَا لَمِنَ الْمُصْطَفَيْنَ الْأَخْيَارِ
और इसमें शक नहीं कि ये लोग हमारी बारगाह में बरगुज़ीदा और नेक लोगों में हैं
48وَاذْكُرْ إِسْمَاعِيلَ وَالْيَسَعَ وَذَا الْكِفْلِ ۖ وَكُلٌّ مِّنَ الْأَخْيَارِ
और (ऐ रसूल) इस्माईल और अलयसा और जुलकिफ़ल को (भी) याद करो और (ये) सब नेक बन्दों में हैं
49هَٰذَا ذِكْرٌ ۚ وَإِنَّ لِلْمُتَّقِينَ لَحُسْنَ مَآبٍ
ये एक नसीहत है और इसमें शक नहीं कि परहेज़गारों के लिए (आख़ेरत में) यक़ीनी अच्छी आरामगाह है
सादकुरान सूची
88आयत
मक्कीRevelation
47आयत

अनुवाद — साद 47

सूरा साद आयत 47 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इसमें शक नहीं कि ये लोग हमारी बारगाह में…

सूरा आयत 47/88 — साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: साद सुनें, साद अनुवाद, साद mp3, साद pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए