Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ثَوَابَ الدُّنْيَا: सांसारिक प्रतिफल, दुनिया का सामान और उसकी अस्थायी सुख-सुविधाएँ।
- سَمِيعًا بَصِيرًا: सब कुछ सुनने वाला और सब कुछ देखने वाला। अर्थात अल्लाह हर बात सुनता है और हर कर्म तथा नीयत को देखता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे लोगों! जो कोई अपने अमल (कर्म) से केवल दुनिया का प्रतिफल और उसके अस्थायी सुख चाहता है, तो उसे मालूम होना चाहिए कि दुनिया और आख़िरत दोनों का प्रतिफल अल्लाह ही के पास है। वह अकेला ही इन दोनों का मालिक है। अतः बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने कर्मों से केवल अल्लाह से दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई माँगे, क्योंकि वही इन दोनों का स्वामी है। जो व्यक्ति अपने अमल से केवल दुनिया का सामान चाहता है, अल्लाह उसे उसमें से उतना ही दे सकता है जितना उसके भाग्य में लिखा है, लेकिन आख़िरत में उसका कोई हिस्सा नहीं होगा। इसके विपरीत जो व्यक्ति आख़िरत का प्रतिफल चाहता है, अल्लाह उसे दुनिया से भी वह देता है जो उसके लिए अच्छा होता है और आख़िरत में उसे जन्नत का प्रतिफल प्रदान करता है। अल्लाह अपने बंदों की हर बात सुनता है और उनके हर कर्म तथा नीयत को देखता है। वह हर व्यक्ति को उसकी नीयत और इरादे के अनुसार प्रतिफल देगा। यदि किसी का इरादा केवल दुनिया है, तो उसे दुनिया मिलेगी, और यदि किसी का इरादा आख़िरत है, तो उसे आख़िरत मिलेगी, और अल्लाह उसे दुनिया से भी महरूम नहीं रखेगा।
फ़ायदे (लाभ):
- यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी नीयत और इरादे का हमारे कर्मों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अल्लाह हर व्यक्ति को उसकी नीयत के अनुसार बदला देता है।
- हमें चाहिए कि अपने सभी कर्मों में केवल अल्लाह की रज़ा और आख़िरत की सफलता को सामने रखें, क्योंकि यही सच्ची भलाई है।
- अल्लाह की असीम दया और उदारता का पता चलता है कि वह दुनिया और आख़िरत दोनों का मालिक है, और अपने बंदों को दोनों जगहों की भलाई दे सकता है।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह हमारी हर छोटी-बड़ी बात सुनता है और हर कर्म देखता है, इसलिए हमें अपने अमल और नीयत को सुधारना चाहिए और अल्लाह से डरते हुए नेक कर्म करने चाहिए।
- इस आयत से यह भी सीख मिलती है कि मुसलमान को चाहिए कि वह दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई की दुआ करे, जैसा कि क़ुरआन में सिखाया गया है: "हमारे रब! हमें दुनिया में भी भलाई दे और आख़िरत में भी भलाई दे।"
📜 आयत 132-136 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 134
सूरा अन-निसा आयत 134 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो शख्स (अपने आमाल का) बदला दुनिया ही में…सूरा आयत 134/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 132–136. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


