अन-निसा · 163/176
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-निसा
۞ إِنَّا أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ كَمَا أَوْحَيْنَا إِلَىٰ نُوحٍ وَالنَّبِيِّينَ مِن بَعْدِهِ ۚ وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَالْأَسْبَاطِ وَعِيسَىٰ وَأَيُّوبَ وَيُونُسَ وَهَارُونَ وَسُلَيْمَانَ ۚ وَآتَيْنَا دَاوُودَ زَبُورًا ۝١٦٣
innaaa awhainaaa ilaika kamaaa awhainaaa ilaa Noohinw wan nabiyyeena mim ba`dih; wa awhainaaa ilaaa ibraaheema wa Ismaaa`eela wa Ishaaqa wa Ya`qooba wal Asbaati wa `Eesaa wa Ayyooba wa Yoonusa wa haaroona wa Sulaimaan; wa aatainaa Daawooda Zabooraa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) हमने तुम्हारे पास (भी) तो इसी तरह 'वही' भेजी जिस तरह नूह और उसके बाद वाले पैग़म्बरों पर भेजी थी और जिस तरह इबराहीम और इस्माइल और इसहाक़ और याक़ूब और औलादे याक़ूब व ईसा व अय्यूब व युनुस व हारून व सुलेमान के पास 'वही' भेजी थी और हमने दाऊद को ज़ुबूर अता की

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • औहैना: हमने वह्य भेजी (प्रकाशना उतारी)।
  • अस्बात: हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) की बारह औलादों की नस्लों से निकले नबी, जो बनी इसराईल के बारह क़बीलों में मब'अस हुए।
  • ज़बूर: वह किताब जो हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) पर उतारी गई, जो भजनों और नसीहतों पर मुश्तमिल थी।

तफ़सीर:

ऐ नबी! हमने आपकी तरफ़ वह्य भेजी है, जैसे हमने नूह (अलैहिस्सलाम) और उनके बाद आने वाले सभी नबियों की तरफ़ भेजी थी। यह बात अहले-किताब के उस एतराज़ का जवाब है जो वे आपकी नुबुव्वत पर उठा रहे थे। हमने इब्राहीम, इस्माईल, इस्तक़ (इसहाक़), याक़ूब और उनकी औलाद में से नबी बनाए गए अस्बात (बारह क़बीलों के नबियों) की तरफ़ भी वह्य भेजी। इसी तरह हमने ईसा, अय्यूब, यूनुस, हारून और सुलेमान (अलैहिमुस्सलाम) की तरफ़ भी वह्य भेजी। और हमने दाऊद (अलैहिस्सलाम) को ज़बूर नामी किताब अता की, जो नसीहत और हिकमत से भरी हुई थी। यह सिलसिला-ए-वह्य आप तक पहुँचा है, इसलिए आप रिसालत के सिलसिले में कोई नई या अनोखी चीज़ नहीं हैं, बल्कि उन्हीं नबियों की कड़ी हैं जिन पर अल्लाह ने अपना पैग़ाम उतारा।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से मालूम होता है कि वह्य और नुबुव्वत का सिलसिला एक ही अल्लाह की तरफ़ से है, और सभी नबी एक ही दीन (इस्लाम) पर थे। इससे मुसलमानों को यक़ीन होता है कि हमारा दीन अल्लाह का चुना हुआ दीन है, जो आदम (अलैहिस्सलाम) से लेकर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तक जारी रहा।
  2. अल्लाह ने हर ज़माने में अपने बंदों की हिदायत के लिए नबी भेजे, जिससे उसकी रहमत और मेहरबानी ज़ाहिर होती है। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह अपने बंदों को कभी गुमराही में नहीं छोड़ता।
  3. इस आयत में उन नबियों के नाम लेकर उनकी ताज़ीम की गई है, जिन्हें अहले-किताब मानते थे। यह अहले-किताब के लिए एक दावत है कि वे मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की नुबुव्वत को क़ुबूल करें, क्योंकि यह उन्हीं नबियों की तरह अल्लाह की तरफ़ से है।
  4. ज़बूर का ज़िक्र बताता है कि अल्लाह ने अपने नबियों को अलग-अलग किताबें अता कीं, और आख़िरी किताब क़ुरआन है जो तमाम किताबों की तस्दीक़ और निगरानी करती है। यह हमें क़ुरआन की अज़मत और उस पर अमल की तरग़ीब देता है।


📜 आयत 161-165 — सूरा अन-निसा

161وَأَخْذِهِمُ الرِّبَا وَقَدْ نُهُوا عَنْهُ وَأَكْلِهِمْ أَمْوَالَ النَّاسِ بِالْبَاطِلِ ۚ وَأَعْتَدْنَا لِلْكَافِرِينَ مِنْهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا
और बावजूद मुमानिअत सूद खा लेने और नाहक़ ज़बरदस्ती लोगों के माल खाने की वजह से उनमें से जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनके वास्ते हमने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है
162لَّٰكِنِ الرَّاسِخُونَ فِي الْعِلْمِ مِنْهُمْ وَالْمُؤْمِنُونَ يُؤْمِنُونَ بِمَا أُنزِلَ إِلَيْكَ وَمَا أُنزِلَ مِن قَبْلِكَ ۚ وَالْمُقِيمِينَ الصَّلَاةَ ۚ وَالْمُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَالْمُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ أُولَٰئِكَ سَنُؤْتِيهِمْ أَجْرًا عَظِيمًا
लेकिन (ऐ रसूल) उनमें से जो लोग इल्म (दीन) में बड़े मज़बूत पाए पर फ़ायज़ हैं वह और ईमान वाले तो जो (किताब) तुमपर नाज़िल हुई है (सब पर ईमान रखते हैं) और से नमाज़ पढ़ते हैं और ज़कात अदा करते हैं और ख़ुदा और रोज़े आख़ेरत का यक़ीन रखते हैं ऐसे ही लोगों को हम अनक़रीब बहुत बड़ा अज्र अता फ़रमाएंगे
163۞ إِنَّا أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ كَمَا أَوْحَيْنَا إِلَىٰ نُوحٍ وَالنَّبِيِّينَ مِن بَعْدِهِ ۚ وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَالْأَسْبَاطِ وَعِيسَىٰ وَأَيُّوبَ وَيُونُسَ وَهَارُونَ وَسُلَيْمَانَ ۚ وَآتَيْنَا دَاوُودَ زَبُورًا
(ऐ रसूल) हमने तुम्हारे पास (भी) तो इसी तरह 'वही' भेजी जिस तरह नूह और उसके बाद वाले पैग़म्बरों पर भेजी थी और जिस तरह इबराहीम और इस्माइल और इसहाक़ और याक़ूब और औलादे याक़ूब व ईसा व अय्यूब व युनुस व हारून व सुलेमान के पास 'वही' भेजी थी और हमने दाऊद को ज़ुबूर अता की
164وَرُسُلًا قَدْ قَصَصْنَاهُمْ عَلَيْكَ مِن قَبْلُ وَرُسُلًا لَّمْ نَقْصُصْهُمْ عَلَيْكَ ۚ وَكَلَّمَ اللَّهُ مُوسَىٰ تَكْلِيمًا
जिनका हाल हमने तुमसे पहले ही बयान कर दिया और बहुत से ऐसे रसूल (भेजे) जिनका हाल तुमसे बयान नहीं किया और ख़ुदा ने मूसा से (बहुत सी) बातें भी कीं
165رُّسُلًا مُّبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ لِئَلَّا يَكُونَ لِلنَّاسِ عَلَى اللَّهِ حُجَّةٌ بَعْدَ الرُّسُلِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًا
और हमने नेक लोगों को बेहिश्त की ख़ुशख़बरी देने वाले और बुरे लोगों को अज़ाब से डराने वाले पैग़म्बर (भेजे) ताकि पैग़म्बरों के आने के बाद लोगों की ख़ुदा पर कोई हुज्जत बाक़ी न रह जाए और ख़ुदा तो बड़ा ज़बरदस्त हकीम है (ये कुफ्फ़ार नहीं मानते न मानें)
अन-निसाकुरान सूची
176आयत
मदनीअवतरण स्थान
163आयत

अनुवाद — अन-निसा 163

सूरा अन-निसा आयत 163 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) हमने तुम्हारे पास (भी) तो इसी तरह 'वही'…

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Saturday, October 3, 2026

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