Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- قَصَصْنَاهُمْ: हमने उनके वृत्तांत (किस्से) बयान किए।
- لَمْ نَقْصُصْهُمْ: जिनके वृत्तांत हमने आपको नहीं सुनाए।
- تَكْلِيمًا: सीधे बात करना, बिना किसी माध्यम के, जो मूसा (अलैहिस्सलाम) के सम्मान के लिए विशेष रूप से ज़िक्र किया गया।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में बताया कि उसने कई रसूल भेजे। उनमें से कुछ ऐसे हैं जिनके किस्से उसने कुरआन में पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को सुनाए, जैसे नूह, इब्राहीम, मूसा, ईसा (अलैहिमुस्सलाम) आदि। और कुछ ऐसे रसूल भी हैं जिनके नाम और किस्से कुरआन में बयान नहीं किए गए — यह अल्लाह की हिकमत (बुद्धिमत्ता) से था, क्योंकि उसने जो चाहा बयान किया और जो चाहा छिपा रखा।
इसके बाद अल्लाह तआला ने मूसा (अलैहिस्सलाम) का विशेष सम्मान बयान किया कि उसने उनसे सीधे बात की — बिना किसी माध्यम या फ़रिश्ते के — और यह बात "تَكْلِيمًا" (तकलीमन) शब्द से पुष्ट की गई, जो इस बात पर दलील है कि अल्लाह की बात करना सच्चा और वास्तविक है, जैसा उसकी शान के लायक़ है। यह उन लोगों के ख़िलाफ़ भी सबूत है जो कहते हैं कि अल्लाह ने एक पेड़ में आवाज़ पैदा की और मूसा ने वह सुनी — नहीं, बल्कि अल्लाह ने खुद मूसा से बात की, जो उसकी कुदरत और करम का एक बड़ा इज़हार है।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह तआला ने हर ज़माने में रसूल भेजे ताकि लोगों को सीधा रास्ता दिखाएँ, और यह उसकी रहमत का सबूत है कि उसने इंसानों को बिना रहनुमा के नहीं छोड़ा।
- कुछ रसूलों के किस्से न बताने में अल्लाह की हिकमत है — हमें चाहिए कि हम उसकी बात पर भरोसा करें और उन चीज़ों में उलझें नहीं जो हमें बताई नहीं गईं।
- अल्लाह की सिफ़ात (विशेषताओं) में से "कलाम" (बात करना) उसकी शान के लायक़ है — यह हमें सिखाता है कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है और वह अपने नेक बंदों से बात कर सकता है, जैसा उसने मूसा (अलैहिस्सलाम) से किया।
- मूसा (अलैहिस्सलाम) का यह सम्मान हमें सिखाता है कि अल्लाह के करीब होने का रास्ता उसकी इबादत और आज्ञाकारिता है, और यह दुनिया की किसी भी दौलत से बड़ा सम्मान है।
- यह आयत हमें पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की महानता भी बताती है कि अल्लाह ने उन्हें पिछले रसूलों के किस्से बताए ताकि उनकी उम्मत को नसीहत और हिम्मत मिले।
📜 आयत 162-166 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 164
सूरा अन-निसा आयत 164 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिनका हाल हमने तुमसे पहले ही बयान कर दिया और…सूरा आयत 164/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 162–166. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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