Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- نَصْلِيهِمْ – हम उन्हें (आग में) झोंक देंगे / दाखिल करेंगे।
- نَضِجَتْ – पक गई, यानी जलकर खत्म हो गई।
- بَدَّلْنَاهُمْ – हम बदल देंगे।
- عَزِيزًا – सर्वशक्तिमान, जिसे कोई हरा न सके, प्रभुत्वशाली।
- حَكِيمًا – पूर्ण ज्ञान और तदबीर वाला, हर काम में हिकमत रखने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन लोगों ने हमारी आयतों (निशानियों, किताबों, रसूलों और दलीलों) को झुठलाया और कुफ्र किया, उनके लिए अंजाम यह है कि हम उन्हें जहन्नम की आग में डाल देंगे। यह आग ऐसी होगी कि जब उनकी खालें जलकर पक जाएंगी और दर्द महसूस करने की क्षमता खत्म हो जाएगी, तो अल्लाह उन्हें नई खालें अता कर देगा, ताकि वे अज़ाब का पूरा-पूरा मज़ा चखते रहें। यह अज़ाब कभी खत्म नहीं होगा, बल्कि हर बार नई खाल बनाकर उन्हें तकलीफ़ में रखा जाएगा।
यह आयत उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं, उनका मज़ाक उड़ाते हैं, या उनसे मुँह मोड़ते हैं। अल्लाह ने यहाँ साफ़ कर दिया कि वह عزیز है, यानी उसकी शक्ति के आगे कोई नहीं टिक सकता, और वह حکیم है, यानी उसका हर फैसला हिकमत पर आधारित है। वह जिसे सज़ा देता है, उसे उसके कर्मों के अनुसार ही देता है, और जिसे रहमत देता है, वह भी उसकी हिकमत से होती है।
दावती पहलू (आमंत्रण का पहलू):
यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि अल्लाह का अज़ाब कितना सख्त है, लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि अल्लाह ने हमें आगाह कर दिया है ताकि हम उसकी रहमत की तरफ लौटें। अल्लाह तआला चाहता तो हमें बिना चेतावनी के पकड़ लेता, लेकिन उसने अपने रसूलों और किताबों के ज़रिए हमें रास्ता दिखाया है। यह उसकी रहमत है कि हमें मौका मिला है कि हम तौबा करें, अपने अमल सुधारें और उसकी आयतों पर ईमान लाएँ।
जो लोग आज कुरान की आयतों को सुनकर दिल नहीं पसीजते, वे कल उस आग का सामना करेंगे जिसकी तकलीफ़ का अंदाज़ा हम नहीं कर सकते। लेकिन अल्लाह का दरवाज़ा अभी भी खुला है — तौबा का दरवाज़ा। आइए, हम सब अपने जीवन को कुरान और सुन्नत के अनुसार ढालें, ताकि हम उस दिन उन लोगों में से न हों जिनकी खालें बदल-बदलकर जलाई जाएंगी, बल्कि उन लोगों में से हों जिन्हें अल्लाह की रहमत और जन्नत की नेमतें मिलेंगी। याद रखिए, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत उससे भी बढ़कर है। जो उसकी तरफ एक कदम बढ़ाता है, अल्लाह उसकी तरफ दौड़कर आता है।
📜 आयत 54-58 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 56
सूरा अन-निसा आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (याद रहे) कि जिन लोगों ने हमारी आयतों से इन्कार…सूरा आयत 56/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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