अन-निसा · 56/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِنَا سَوْفَ نُصْلِيهِمْ نَارًا كُلَّمَا نَضِجَتْ جُلُودُهُم بَدَّلْنَاهُمْ جُلُودًا غَيْرَهَا لِيَذُوقُوا الْعَذَابَ ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَزِيزًا حَكِيمًا ۝٥٦
Innal lazeena kafaroo bi Aayaatinaa sawfa nusleehim Naaran kullamaa nadijat julooduhum baddalnaahum juloodan ghairahaa liyazooqul `azaab; innallaaha kaana `Azeezan Hakeemaa
📖 हिंदी अर्थ
(याद रहे) कि जिन लोगों ने हमारी आयतों से इन्कार किया उन्हें ज़रूर अनक़रीब जहन्नुम की आग में झोंक देंगे (और जब उनकी खालें जल कर) जल जाएंगी तो हम उनके लिए दूसरी खालें बदल कर पैदा करे देंगे ताकि वह अच्छी तरह अज़ाब का मज़ा चखें बेशक ख़ुदा हरचीज़ पर ग़ालिब और हिकमत वाला है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَصْلِيهِمْ – हम उन्हें (आग में) झोंक देंगे / दाखिल करेंगे।
  • نَضِجَتْ – पक गई, यानी जलकर खत्म हो गई।
  • بَدَّلْنَاهُمْ – हम बदल देंगे।
  • عَزِيزًا – सर्वशक्तिमान, जिसे कोई हरा न सके, प्रभुत्वशाली।
  • حَكِيمًا – पूर्ण ज्ञान और तदबीर वाला, हर काम में हिकमत रखने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन लोगों ने हमारी आयतों (निशानियों, किताबों, रसूलों और दलीलों) को झुठलाया और कुफ्र किया, उनके लिए अंजाम यह है कि हम उन्हें जहन्नम की आग में डाल देंगे। यह आग ऐसी होगी कि जब उनकी खालें जलकर पक जाएंगी और दर्द महसूस करने की क्षमता खत्म हो जाएगी, तो अल्लाह उन्हें नई खालें अता कर देगा, ताकि वे अज़ाब का पूरा-पूरा मज़ा चखते रहें। यह अज़ाब कभी खत्म नहीं होगा, बल्कि हर बार नई खाल बनाकर उन्हें तकलीफ़ में रखा जाएगा।

यह आयत उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं, उनका मज़ाक उड़ाते हैं, या उनसे मुँह मोड़ते हैं। अल्लाह ने यहाँ साफ़ कर दिया कि वह عزیز है, यानी उसकी शक्ति के आगे कोई नहीं टिक सकता, और वह حکیم है, यानी उसका हर फैसला हिकमत पर आधारित है। वह जिसे सज़ा देता है, उसे उसके कर्मों के अनुसार ही देता है, और जिसे रहमत देता है, वह भी उसकी हिकमत से होती है।


दावती पहलू (आमंत्रण का पहलू):

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि अल्लाह का अज़ाब कितना सख्त है, लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि अल्लाह ने हमें आगाह कर दिया है ताकि हम उसकी रहमत की तरफ लौटें। अल्लाह तआला चाहता तो हमें बिना चेतावनी के पकड़ लेता, लेकिन उसने अपने रसूलों और किताबों के ज़रिए हमें रास्ता दिखाया है। यह उसकी रहमत है कि हमें मौका मिला है कि हम तौबा करें, अपने अमल सुधारें और उसकी आयतों पर ईमान लाएँ।

जो लोग आज कुरान की आयतों को सुनकर दिल नहीं पसीजते, वे कल उस आग का सामना करेंगे जिसकी तकलीफ़ का अंदाज़ा हम नहीं कर सकते। लेकिन अल्लाह का दरवाज़ा अभी भी खुला है — तौबा का दरवाज़ा। आइए, हम सब अपने जीवन को कुरान और सुन्नत के अनुसार ढालें, ताकि हम उस दिन उन लोगों में से न हों जिनकी खालें बदल-बदलकर जलाई जाएंगी, बल्कि उन लोगों में से हों जिन्हें अल्लाह की रहमत और जन्नत की नेमतें मिलेंगी। याद रखिए, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत उससे भी बढ़कर है। जो उसकी तरफ एक कदम बढ़ाता है, अल्लाह उसकी तरफ दौड़कर आता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 54-58 — अन-निसा

54أَمْ يَحْسُدُونَ النَّاسَ عَلَىٰ مَا آتَاهُمُ اللَّهُ مِن فَضْلِهِ ۖ فَقَدْ آتَيْنَا آلَ إِبْرَاهِيمَ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَآتَيْنَاهُم مُّلْكًا عَظِيمًا
या ख़ुदा ने जो अपने फ़ज़ल से (तुम) लोगों को (कुरान) अता फ़रमाया है इसके रश्क पर चले जाते हैं (तो उसका क्या इलाज है) हमने तो इबराहीम की औलाद को किताब और अक्ल की बातें अता फ़रमायी हैं और उनको बहुत बड़ी सल्तनत भी दी
55فَمِنْهُم مَّنْ آمَنَ بِهِ وَمِنْهُم مَّن صَدَّ عَنْهُ ۚ وَكَفَىٰ بِجَهَنَّمَ سَعِيرًا
फिर कुछ लोग तो इस (किताब) पर ईमान लाए और कुछ लोगों ने उससे इन्कार किया और इसकी सज़ा के लिए जहन्नुम की दहकती हुई आग काफ़ी है
56إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِنَا سَوْفَ نُصْلِيهِمْ نَارًا كُلَّمَا نَضِجَتْ جُلُودُهُم بَدَّلْنَاهُمْ جُلُودًا غَيْرَهَا لِيَذُوقُوا الْعَذَابَ ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَزِيزًا حَكِيمًا
(याद रहे) कि जिन लोगों ने हमारी आयतों से इन्कार किया उन्हें ज़रूर अनक़रीब जहन्नुम की आग में झोंक देंगे (और जब उनकी खालें जल कर) जल जाएंगी तो हम उनके लिए दूसरी खालें बदल कर पैदा करे देंगे ताकि वह अच्छी तरह अज़ाब का मज़ा चखें बेशक ख़ुदा हरचीज़ पर ग़ालिब और हिकमत वाला है
57وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ سَنُدْخِلُهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۖ لَّهُمْ فِيهَا أَزْوَاجٌ مُّطَهَّرَةٌ ۖ وَنُدْخِلُهُمْ ظِلًّا ظَلِيلًا
और जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम किए हम उनको अनक़रीब ही (बेहिश्त के) ऐसे ऐसे (हरे भरे) बाग़ों में जा पहुंचाएंगे जिन के नीचे नहरें जारी होंगी और उनमें हमेशा रहेंगे वहां उनकी साफ़ सुथरी बीवियॉ होंगी और उन्हे घनी छॉव में ले जाकर रखेंगे
58۞ إِنَّ اللَّهَ يَأْمُرُكُمْ أَن تُؤَدُّوا الْأَمَانَاتِ إِلَىٰ أَهْلِهَا وَإِذَا حَكَمْتُم بَيْنَ النَّاسِ أَن تَحْكُمُوا بِالْعَدْلِ ۚ إِنَّ اللَّهَ نِعِمَّا يَعِظُكُم بِهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ سَمِيعًا بَصِيرًا
ऐ ईमानदारों ख़ुदा तुम्हें हुक्म देता है कि लोगों की अमानतें अमानत रखने वालों के हवाले कर दो और जब लोगों के बाहमी झगड़ों का फैसला करने लगो तो इन्साफ़ से फैसला करो (ख़ुदा तुमको) इसकी क्या ही अच्छी नसीहत करता है इसमें तो शक नहीं कि ख़ुदा सबकी सुनता है (और सब कुछ) देखता है
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अनुवाद — अन-निसा 56

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Tuesday, August 18, 2026

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