Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الطَّاغُوتِ (ताग़ूत): अल्लाह की शरिया (क़ानून) के अलावा हर उस चीज़ या इंसान को कहा जाता है जिसकी तरफ़ लोग फ़ैसले के लिए रुजू करें, चाहे वह शैतान हो, कोई ज़ालिम हुक्मरान हो, या कोई मनगढ़ंत क़ानून हो।
- يَتَحَاكَمُوا (यतहाकमू): अपने झगड़ों और विवादों का फ़ैसला किसी को बनाकर उसकी तरफ़ रुजू करना।
- ضَلَالًا بَعِيدًا (ज़लालन बईदा): बहुत दूर की गुमराही, यानी हक़ से इतनी दूर हो जाना कि वापस लौटने की उम्मीद भी न रहे।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! क्या आपने उन लोगों पर ग़ौर नहीं किया जो दावा करते हैं कि वे उस किताब पर ईमान लाए हैं जो आप पर उतारी गई (यानी क़ुरआन) और उन किताबों पर भी जो आपसे पहले उतारी गईं (यानी तौरात, इंजील वगैरह)? ये लोग अपने मुँह से तो ईमान का दावा करते हैं, लेकिन जब उनके बीच कोई झगड़ा या विवाद होता है, तो वे अल्लाह के क़ानून की तरफ़ नहीं जाते, बल्कि ताग़ूत की तरफ़ जाते हैं। यानी वे अपने फ़ैसले उन लोगों से करवाते हैं जो अल्लाह की शरिया के मुताबिक़ फ़ैसला नहीं करते, बल्कि अपनी मनमर्ज़ी, रिश्वत, या जाहिलियत के दस्तूर के हिसाब से फ़ैसला करते हैं।
हालाँकि उन्हें साफ़ हुक्म दिया गया था कि वे ताग़ूत को मानने से इनकार करें और उसका इंकार करें। लेकिन ये लोग अपने दावे में झूठे हैं, क्योंकि अगर वे सच में ईमान लाए होते, तो अल्लाह के हुक्म को ही मानते। ईमान का तक़ाज़ा यही है कि इंसान हर मामले में अल्लाह और उसके रसूल के फ़ैसले को बिना किसी हिचकिचाहट के क़बूल करे।
शैतान इन लोगों को और गुमराह करना चाहता है, और उन्हें हक़ से इतनी दूर ले जाना चाहता है कि वे कभी सीधे रास्ते पर वापस ही न आ सकें। शैतान की यही कोशिश होती है कि इंसान अल्लाह के क़ानून को छोड़कर अपनी बनाई हुई चीज़ों की तरफ़ रुजू करे, ताकि वह उन्हें पूरी तरह अपने क़ाबू में कर ले।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि सच्चा ईमान सिर्फ़ ज़ुबान से दावा करने का नाम नहीं है, बल्कि हर मामले में अल्लाह के फ़ैसले को मानना और उसी के हुक्म के आगे सर झुकाना ज़रूरी है। जो इंसान अल्लाह के क़ानून को छोड़कर दूसरे क़ानूनों की तरफ़ जाता है, वह अपने ईमान के दावे में झूठा है। अल्लाह तआला हम सबको सच्चा ईमान अता करे और हमें ताग़ूत से बचाकर अपनी राह पर चलाए। आमीन।
📜 आयत 58-62 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 60
सूरा अन-निसा आयत 60 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों की (हालत) पर नज़र…सूरा आयत 60/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 58–62. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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