ग़ाफिर · 45/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
فَوَقَاهُ اللَّهُ سَيِّئَاتِ مَا مَكَرُوا ۖ وَحَاقَ بِآلِ فِرْعَوْنَ سُوءُ الْعَذَابِ ۝٤٥
Fa waqaahul laahu saiyiaati maa makaroo wa haaqa bi Aali-Fir`awna sooo`ul `azaab
📖 हिंदी अर्थ
तो ख़ुदा ने उसे उनकी तद्बीरों की बुराई से महफूज़ रखा और फिरऔनियों को बड़े अज़ाब ने ( हर तरफ ) से घेर लिया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَوَقَاهُ: अल्लाह ने उसे बचा लिया / सुरक्षित रख लिया।
  • سَيِّئَاتِ مَا مَكَرُوا: उनकी चालों के बुरे अंजाम (जो वे उसके विरुद्ध रच रहे थे)।
  • حَاقَ: घेर लिया / उतर पड़ा / चारों ओर से आ घेरा।
  • آلِ فِرْعَوْنَ: फ़िरऔन की क़ौम, उसके सरदार और उसके साथी।
  • سُوءُ الْعَذَابِ: बुरा अज़ाब, यानी डूबने की यातना (दुनिया में) और आख़िरत में जहन्नुम की आग।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस मोमिन (ईमानवाले) इंसान के बारे में है जो फ़िरऔन के दरबार में अपनी क़ौम को छिपकर नसीहत कर रहा था। जब फ़िरऔन और उसके सरदारों को उसकी दावत का पता चला और उन्होंने उसे मार डालने की साज़िश रची, तो अल्लाह ने उस बंदे को उन सारी बुरी चालों से महफ़ूज़ रखा। अल्लाह ने उसे उनके जाल से निकाल लिया और वह मूसा (अलैहिस्सलाम) के साथ नजात पा गया। उसकी जान को किसी भी तरह का नुक़्सान नहीं पहुँचा, क्योंकि अल्लाह अपने मोमिन बंदों की हिफ़ाज़त करता है, जब वे उसकी राह में सब्र और ईमान पर क़ायम रहते हैं।

इसके बाद अल्लाह ने फ़िरऔन और उसकी क़ौम पर अपना अज़ाब नाज़िल किया — वही अज़ाब जिससे वे डरा रहे थे और जिसे वे झुठला रहे थे। उन्हें दुनिया में डूबने की यातना ने घेर लिया, यहाँ तक कि फ़िरऔन अपने लश्कर समेत समुद्र में ग़र्क हो गया। और आख़िरत में उनके लिए जहन्नुम की आग है, जो उससे भी कहीं बदतर और स्थायी अज़ाब है।

इस आयत में अल्लाह ने यह सबक़ सिखाया है कि सच्चाई और ईमान की राह पर चलने वालों को अल्लाह कभी अकेला नहीं छोड़ता। भले ही दुश्मन कितनी भी ताक़तवर और चालाक क्यों न हों, अल्लाह की हिफ़ाज़त उनके मुक़ाबले में सबसे बड़ी ढाल है। और जो लोग अल्लाह के नबियों और उनके साथियों के ख़िलाफ़ साज़िशें रचते हैं, उनका अंजाम हमेशा ज़िल्लत और अज़ाब होता है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी।

यह आयत हर उस इंसान के लिए तसल्ली और उम्मीद का पैग़ाम है जो अल्लाह की राह में अकेला महसूस करता है। याद रखिए, अल्लाह अपने बंदों की मदद करता है, चाहे दुश्मन कितने भी ज़्यादा क्यों न हों। ईमान वालों के लिए यह बशारत है कि अल्लाह की निगरानी और हिफ़ाज़त उनके साथ है, और ज़ालिमों का अंजाम हमेशा बर्बादी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 43-47 — ग़ाफिर

43لَا جَرَمَ أَنَّمَا تَدْعُونَنِي إِلَيْهِ لَيْسَ لَهُ دَعْوَةٌ فِي الدُّنْيَا وَلَا فِي الْآخِرَةِ وَأَنَّ مَرَدَّنَا إِلَى اللَّهِ وَأَنَّ الْمُسْرِفِينَ هُمْ أَصْحَابُ النَّارِ
बेशक तुम जिस चीज़ की तरफ़ मुझे बुलाते हो वह न तो दुनिया ही में पुकारे जाने के क़ाबिल है और न आख़िरत में और आख़िर में हम सबको ख़ुदा ही की तरफ लौट कर जाना है और इसमें तो शक ही नहीं कि हद से बढ़ जाने वाले जहन्नुमी हैं
44فَسَتَذْكُرُونَ مَا أَقُولُ لَكُمْ ۚ وَأُفَوِّضُ أَمْرِي إِلَى اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ بَصِيرٌ بِالْعِبَادِ
तो जो मैं तुमसे कहता हूँ अनक़रीब ही उसे याद करोगे और मैं तो अपना काम ख़ुदा ही को सौंपे देता हूँ कुछ शक नहीं की ख़ुदा बन्दों ( के हाल ) को ख़ूब देख रहा है
45فَوَقَاهُ اللَّهُ سَيِّئَاتِ مَا مَكَرُوا ۖ وَحَاقَ بِآلِ فِرْعَوْنَ سُوءُ الْعَذَابِ
तो ख़ुदा ने उसे उनकी तद्बीरों की बुराई से महफूज़ रखा और फिरऔनियों को बड़े अज़ाब ने ( हर तरफ ) से घेर लिया
46النَّارُ يُعْرَضُونَ عَلَيْهَا غُدُوًّا وَعَشِيًّا ۖ وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ أَدْخِلُوا آلَ فِرْعَوْنَ أَشَدَّ الْعَذَابِ
और अब तो कब्र में दोज़ख़ की आग है कि वह लोग (हर) सुबह व शाम उसके सामने ला खड़े किए जाते हैं और जिस दिन क़यामत बरपा होगी (हुक्म होगा) फिरऔन के लोगों को सख्त से सख्त अज़ाब में झोंक दो
47وَإِذْ يَتَحَاجُّونَ فِي النَّارِ فَيَقُولُ الضُّعَفَاءُ لِلَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا إِنَّا كُنَّا لَكُمْ تَبَعًا فَهَلْ أَنتُم مُّغْنُونَ عَنَّا نَصِيبًا مِّنَ النَّارِ
और ये लोग जिस वक्त ज़हन्नुम में बाहम झगड़ेंगें तो कम हैसियत लोग बड़े आदमियों से कहेंगे कि हम तुम्हारे ताबे थे तो क्या तुम इस वक्त (दोज़ख़ की) आग का कुछ हिस्सा हमसे हटा सकते हो
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अनुवाद — ग़ाफिर 45

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Tuesday, August 18, 2026

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