ग़ाफिर · 68/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
هُوَ الَّذِي يُحْيِي وَيُمِيتُ ۖ فَإِذَا قَضَىٰ أَمْرًا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُ كُن فَيَكُونُ ۝٦٨
Huwal lazee yuhyee wa yumeetu fa izaa qadaaa amran fa innamaa yaqoolu lahoo kun fa yakon
📖 हिंदी अर्थ
और ताकि तुम (उसकी क़ुदरत को समझो) वह वही (ख़ुदा) है जो जिलाता और मारता है, फिर जब वह किसी काम का करना ठान लेता है तो बस उससे कह देता है कि 'हो जा' तो वह फ़ौरन हो जाता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُحْيِي: जीवन प्रदान करता है।
  • يُمِيتُ: मृत्यु देता है।
  • قَضَى أَمْرًا: किसी कार्य का फैसला करना या उसे दृढ़तापूर्वक तय कर लेना।
  • كُن فَيَكُونُ: "हो जा" कहते ही वह हो जाता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत अल्लाह तआला की उस महान शक्ति और कुदरत को बयान करती है जो उसके सिवा किसी और को हासिल नहीं। अल्लाह ही वह इकलौता मालिक है जो जीवन देता है और मौत लाता है। उसकी इन दोनों सिफ़तों में कोई उसका साझी नहीं। जब वह किसी काम को करने का इरादा कर लेता है, तो उसके लिए किसी साधन या समय की ज़रूरत नहीं होती। बस वह उस चीज़ को कहता है "हो जा", और वह फौरन हो जाती है। उसके फैसले को कोई टाल नहीं सकता, न कोई उसकी मर्ज़ी के आगे रुकावट डाल सकता है।

यह अल्लाह की उस ताक़त का सबूत है जो हर चीज़ पर हावी है। जब वह किसी मामले का फैसला कर लेता है, तो उसमें देरी या इनकार की कोई गुंजाइश नहीं रहती। उसका हुक्म बस एक शब्द है, और वह पूरा हो जाता है। यही वह सच्चाई है जो हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह के आगे हर चीज़ बेबस है, और उसकी कुदरत के सामने हर ताक़त नाचीज़ है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह पर पूरा भरोसा रखने की तालीम देती है। जिस अल्लाह के पास जीवन और मौत की कुंजियाँ हैं, जो बस "कहने" से किसी भी चीज़ को अस्तित्व में ला सकता है, उस पर हमें अपने हर मामले में भरोसा करना चाहिए। जब हमारे पास ऐसा क़ादिर-ए-मुतलक़ (सर्वशक्तिमान) रब है, तो हमें किसी और से डरने या किसी और की उम्मीद रखने की ज़रूरत नहीं। यही ईमान की असली मिठास है — यह जानना कि हर काम उसी के हाथ में है, और वह अपने बंदों के लिए सबसे बेहतर फैसला करता है। जो शख्स इस हक़ीक़त को समझ लेता है, उसका दिल कभी मायूस नहीं होता, क्योंकि उसे यक़ीन होता है कि अल्लाह की मर्ज़ी के बिना कुछ नहीं हो सकता, और जो वह चाहता है, वह होकर रहता है।



📜 आयत 66-70 — ग़ाफिर

66۞ قُلْ إِنِّي نُهِيتُ أَنْ أَعْبُدَ الَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ لَمَّا جَاءَنِيَ الْبَيِّنَاتُ مِن رَّبِّي وَأُمِرْتُ أَنْ أُسْلِمَ لِرَبِّ الْعَالَمِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि जब मेरे पास मेरे परवरदिगार की बारगाह से खुले हुए मौजिज़े आ चुके तो मुझे इस बात की मनाही कर दी गयी है कि ख़ुदा को छोड़ कर जिनको तुम पूजते हो मैं उनकी परसतिश करूँ और मुझे तो यह हुक्म हो चुका है कि मैं सारे जहाँन के पालने वाले का फरमाबरदार बनु
67هُوَ الَّذِي خَلَقَكُم مِّن تُرَابٍ ثُمَّ مِن نُّطْفَةٍ ثُمَّ مِنْ عَلَقَةٍ ثُمَّ يُخْرِجُكُمْ طِفْلًا ثُمَّ لِتَبْلُغُوا أَشُدَّكُمْ ثُمَّ لِتَكُونُوا شُيُوخًا ۚ وَمِنكُم مَّن يُتَوَفَّىٰ مِن قَبْلُ ۖ وَلِتَبْلُغُوا أَجَلًا مُّسَمًّى وَلَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
वही वह ख़ुदा है जिसने तुमको पहले (पहल) मिटटी से पैदा किया फिर नुत्फे से, फिर जमे हुए ख़ून फिर तुमको बच्चा बनाकर (माँ के पेट) से निकलता है (ताकि बढ़ों) फिर (ज़िन्दा रखता है) ताकि तुम अपनी जवानी को पहुँचो फिर (और ज़िन्दा रखता है ताकि तुम बूढ़े हो जाओ और तुममें से कोई ऐसा भी है जो (इससे) पहले मर जाता है ग़रज़ (तुमको उस वक्त तक ज़िन्दा रखता है) की तुम (मौत के) मुकर्रर वक्त तक पहुँच जाओ
68هُوَ الَّذِي يُحْيِي وَيُمِيتُ ۖ فَإِذَا قَضَىٰ أَمْرًا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُ كُن فَيَكُونُ
और ताकि तुम (उसकी क़ुदरत को समझो) वह वही (ख़ुदा) है जो जिलाता और मारता है, फिर जब वह किसी काम का करना ठान लेता है तो बस उससे कह देता है कि 'हो जा' तो वह फ़ौरन हो जाता है
69أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِي آيَاتِ اللَّهِ أَنَّىٰ يُصْرَفُونَ
(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों (की हालत) पर ग़ौर नहीं किया जो ख़ुदा की आयतों में झगड़े निकाला करते हैं
70الَّذِينَ كَذَّبُوا بِالْكِتَابِ وَبِمَا أَرْسَلْنَا بِهِ رُسُلَنَا ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ
ये कहाँ भटके चले जा रहे हैं, जिन लोगों ने किताबे (ख़ुदा) और उन बातों को जो हमने पैग़म्बरों को देकर भेजा था झुठलाया तो बहुत जल्द उसका नतीजा उन्हें मालूम हो जाएगा
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अनुवाद — ग़ाफिर 68

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Tuesday, August 18, 2026

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