अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يُحْيِي: जीवन प्रदान करता है।
- يُمِيتُ: मृत्यु देता है।
- قَضَى أَمْرًا: किसी कार्य का फैसला करना या उसे दृढ़तापूर्वक तय कर लेना।
- كُن فَيَكُونُ: "हो जा" कहते ही वह हो जाता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत अल्लाह तआला की उस महान शक्ति और कुदरत को बयान करती है जो उसके सिवा किसी और को हासिल नहीं। अल्लाह ही वह इकलौता मालिक है जो जीवन देता है और मौत लाता है। उसकी इन दोनों सिफ़तों में कोई उसका साझी नहीं। जब वह किसी काम को करने का इरादा कर लेता है, तो उसके लिए किसी साधन या समय की ज़रूरत नहीं होती। बस वह उस चीज़ को कहता है "हो जा", और वह फौरन हो जाती है। उसके फैसले को कोई टाल नहीं सकता, न कोई उसकी मर्ज़ी के आगे रुकावट डाल सकता है।
यह अल्लाह की उस ताक़त का सबूत है जो हर चीज़ पर हावी है। जब वह किसी मामले का फैसला कर लेता है, तो उसमें देरी या इनकार की कोई गुंजाइश नहीं रहती। उसका हुक्म बस एक शब्द है, और वह पूरा हो जाता है। यही वह सच्चाई है जो हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह के आगे हर चीज़ बेबस है, और उसकी कुदरत के सामने हर ताक़त नाचीज़ है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें अल्लाह पर पूरा भरोसा रखने की तालीम देती है। जिस अल्लाह के पास जीवन और मौत की कुंजियाँ हैं, जो बस "कहने" से किसी भी चीज़ को अस्तित्व में ला सकता है, उस पर हमें अपने हर मामले में भरोसा करना चाहिए। जब हमारे पास ऐसा क़ादिर-ए-मुतलक़ (सर्वशक्तिमान) रब है, तो हमें किसी और से डरने या किसी और की उम्मीद रखने की ज़रूरत नहीं। यही ईमान की असली मिठास है — यह जानना कि हर काम उसी के हाथ में है, और वह अपने बंदों के लिए सबसे बेहतर फैसला करता है। जो शख्स इस हक़ीक़त को समझ लेता है, उसका दिल कभी मायूस नहीं होता, क्योंकि उसे यक़ीन होता है कि अल्लाह की मर्ज़ी के बिना कुछ नहीं हो सकता, और जो वह चाहता है, वह होकर रहता है।
📜 आयत 66-70 — ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 68
सूरा ग़ाफिर आयत 68 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ताकि तुम (उसकी क़ुदरत को समझो) वह वही (ख़ुदा)…सूरा आयत 68/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 66–70. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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