ग़ाफिर · 73/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
ثُمَّ قِيلَ لَهُمْ أَيْنَ مَا كُنتُمْ تُشْرِكُونَ ۝٧٣
Summaa qeela lahum ayna maa kuntum tushrikoon
📖 हिंदी अर्थ
फिर उनसे पूछा जाएगा कि ख़ुदा के सिवा जिनको (उसका) शरीक बनाते थे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ثُمَّ قِيلَ لَهُمْ: फिर उनसे कहा जाएगा
  • أَيْنَ: कहाँ हैं
  • مَا كُنتُمْ تُشْرِكُونَ: जिन्हें तुम (अल्लाह के साथ) साझीदार बनाते थे

विस्तृत तफ़सीर:

यह वह भयानक क्षण होगा जब अल्लाह तआला ने जहन्नम की आग में झोंक दिए जाने के बाद काफ़िरों से पूछताछ करेगा। यह प्रश्न केवल प्रश्न नहीं, बल्कि उन्हें झिड़कने, लज्जित करने और उनके कुकर्मों को उनके सामने उजागर करने के लिए होगा। उनसे कहा जाएगा: "कहाँ हैं वे (तथाकथित) देवता जिन्हें तुम अल्लाह के साथ साझीदार बनाते थे? आज उन्हें बुलाओ, देखो क्या वे तुम्हारी कोई सहायता कर सकते हैं? क्या वे तुम्हें इस यातना से बचा सकते हैं?"

यह प्रश्न उनके लिए अत्यंत अपमानजनक होगा, क्योंकि वे जिन्हें दुनिया में पूजते थे, जिनके आगे सिर झुकाते थे, जिनसे मदद की उम्मीद रखते थे, आज उनमें से कोई भी उनके काम नहीं आएगा। वे सब गायब होंगे, कोई जवाब नहीं देगा, कोई मदद नहीं करेगा। यह उनके लिए सबसे बड़ी निराशा और पछतावे का क्षण होगा।

इस प्रश्न का उद्देश्य यह साबित करना है कि जो लोग दुनिया में अल्लाह के अलावा किसी और की इबादत करते हैं, वे पूरी तरह निराश और असहाय होंगे। उनके वे तथाकथित देवता न तो उन्हें बचा सकेंगे और न ही अपनी ओर से कोई सहायता कर सकेंगे। यह उनके अंधविश्वास और झूठे विश्वास का परिणाम होगा।

इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपनी सारी आशाएँ, भरोसा और इबादत केवल अल्लाह पर ही केंद्रित रखनी चाहिए। दुनिया में कोई भी शक्ति, कोई भी व्यक्ति, कोई भी वस्तु हमें अल्लाह की पकड़ से नहीं बचा सकती। जो लोग अल्लाह के अलावा किसी और पर भरोसा करते हैं, वे क़ियामत के दिन बुरी तरह निराश होंगे। अतः हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में केवल अल्लाह की इबादत करें, उसी से मदद माँगें और उसी की राह पर चलें। यही सच्ची सफलता का मार्ग है, और यही हमें जहन्नम की आग से बचाकर जन्नत की नेमतों तक पहुँचा सकता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 71-75 — ग़ाफिर

71إِذِ الْأَغْلَالُ فِي أَعْنَاقِهِمْ وَالسَّلَاسِلُ يُسْحَبُونَ
जब (भारी भारी) तौक़ और ज़ंजीरें उनकी गर्दनों में होंगी (और पहले) खौलते हुए पानी में घसीटे जाएँगे
72فِي الْحَمِيمِ ثُمَّ فِي النَّارِ يُسْجَرُونَ
फिर (जहन्नुम की) आग में झोंक दिए जाएँगे
73ثُمَّ قِيلَ لَهُمْ أَيْنَ مَا كُنتُمْ تُشْرِكُونَ
फिर उनसे पूछा जाएगा कि ख़ुदा के सिवा जिनको (उसका) शरीक बनाते थे
74مِن دُونِ اللَّهِ ۖ قَالُوا ضَلُّوا عَنَّا بَل لَّمْ نَكُن نَّدْعُو مِن قَبْلُ شَيْئًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ اللَّهُ الْكَافِرِينَ
(इस वक्त) क़हाँ हैं वह कहेंगे अब तो वह हमसे जाते रहे बल्कि (सच यूँ है कि) हम तो पहले ही से (ख़ुदा के सिवा) किसी चीज़ की परसतिश न करते थे यूँ ख़ुदा काफिरों को बौखला देगा
75ذَٰلِكُم بِمَا كُنتُمْ تَفْرَحُونَ فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَبِمَا كُنتُمْ تَمْرَحُونَ
(कि कुछ समझ में न आएगा) ये उसकी सज़ा है कि तुम दुनिया में नाहक (बात पर) निहाल थे और इसकी सज़ा है कि तुम इतराया करते थे
ग़ाफिरकुरान सूची
85आयत
मक्कीRevelation
73आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 73

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Tuesday, August 18, 2026

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