फुस्सिलत · 20/54
अनुवाद उच्चारण — फुस्सिलत
حَتَّىٰ إِذَا مَا جَاءُوهَا شَهِدَ عَلَيْهِمْ سَمْعُهُمْ وَأَبْصَارُهُمْ وَجُلُودُهُم بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ ۝٢٠
Hattaaa izaa maa jaaa`oohaa shahida `alaihim samu`uhum wa absaaruhum wa julooduhum bimaa kaanoo ya`maloon
📖 हिंदी अर्थ
यहाँ तक की जब सब के सब जहन्नुम के पास जाएँगे तो उनके कान और उनकी ऑंखें और उनके (गोश्त पोस्त) उनके ख़िलाफ उनके मुक़ाबले में उनकी कारस्तानियों की गवाही देगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • شَهِدَ عَلَيْهِمْ: उनके विरुद्ध गवाही देना
  • سَمْعُهُمْ: उनके कान (सुनने की शक्ति)
  • أَبْصَارُهُمْ: उनकी आँखें (देखने की शक्ति)
  • جُلُودُهُمْ: उनकी खालें (त्वचा)

तफसीर:

यह आयत उस भयानक दिन का वर्णन कर रही है जब अल्लाह के दुश्मनों को जहन्नम की ओर हाँका जाएगा। जब वे आग के पास पहुँचेंगे और अपने किए हुए गुनाहों से मुकरने की कोशिश करेंगे, तो अल्लाह तआला उनके ही अंगों को बोलने की शक्ति प्रदान करेगा। उनके कान, उनकी आँखें और उनकी खालें — सब कुछ उनके विरुद्ध गवाही देंगे। वे बताएँगे कि उन्होंने दुनिया में क्या-क्या सुना, क्या-क्या देखा और किन-किन पापों में अपने शरीर को शामिल किया।

यह अल्लाह की कुदरत का अद्भुत नज़ारा होगा — वही अंग जो दुनिया में इंसान के आज्ञाकारी थे और गुनाहों में मदद करते थे, उस दिन अल्लाह के आदेश से उसी इंसान के खिलाफ गवाह बन जाएँगे। यह उस दिन की सच्चाई है जब कोई झूठ नहीं बोल सकेगा और न ही कोई बहाना काम आएगा।

यह आयत हमें बहुत बड़ी सीख देती है कि हमारे अंग हमारे खिलाफ गवाही देने वाले हैं। अगर हम अपनी आँखों से हराम देखते हैं, अपने कानों से हराम सुनते हैं, और अपने शरीर को गुनाहों में इस्तेमाल करते हैं, तो याद रखें — यह सब कुछ एक दिन हमारे सामने पेश किया जाएगा। लेकिन अगर हम इन अंगों को अल्लाह की इबादत और नेक कामों में लगाएँ, तो यही अंग हमारे लिए गवाही देंगे और हमारे पक्ष में बोलेंगे।

इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत भी बहुत बड़ी है। जो लोग दुनिया में अल्लाह की नाफरमानी से बाज़ आ जाएँ और तौबा कर लें, उनके लिए अल्लाह की मगफिरत का दरवाज़ा खुला है। इसलिए आज ही अपने अंगों को नेकी की तरफ मोड़ें, क्योंकि कल का दिन बहुत कठिन होगा और उस दिन कोई मदद नहीं कर सकेगा। अल्लाह हम सबको उस दिन की शर्मिंदगी से बचाए और हमारे अंगों को हमारे पक्ष में गवाह बनाए। आमीन।



📜 आयत 18-22 — फुस्सिलत

18وَنَجَّيْنَا الَّذِينَ آمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَ
और जो लोग ईमान लाए और परहेज़गारी करते थे उनको हमने (इस) मुसीबत से बचा लिया
19وَيَوْمَ يُحْشَرُ أَعْدَاءُ اللَّهِ إِلَى النَّارِ فَهُمْ يُوزَعُونَ
और जिस दिन ख़ुदा के दुशमन दोज़ख़ की तरफ हकाए जाएँगे तो ये लोग तरतीब वार खड़े किए जाएँगे
20حَتَّىٰ إِذَا مَا جَاءُوهَا شَهِدَ عَلَيْهِمْ سَمْعُهُمْ وَأَبْصَارُهُمْ وَجُلُودُهُم بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
यहाँ तक की जब सब के सब जहन्नुम के पास जाएँगे तो उनके कान और उनकी ऑंखें और उनके (गोश्त पोस्त) उनके ख़िलाफ उनके मुक़ाबले में उनकी कारस्तानियों की गवाही देगें
21وَقَالُوا لِجُلُودِهِمْ لِمَ شَهِدتُّمْ عَلَيْنَا ۖ قَالُوا أَنطَقَنَا اللَّهُ الَّذِي أَنطَقَ كُلَّ شَيْءٍ وَهُوَ خَلَقَكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
और ये लोग अपने आज़ा से कहेंगे कि तुमने हमारे ख़िलाफ क्यों गवाही दी तो वह जवाब देंगे कि जिस ख़ुदा ने हर चीज़ को गोया किया उसने हमको भी (अपनी क़ुदरत से) गोया किया और उसी ने तुमको पहली बार पैदा किया था और (आख़िर) उसी की तरफ लौट कर जाओगे
22وَمَا كُنتُمْ تَسْتَتِرُونَ أَن يَشْهَدَ عَلَيْكُمْ سَمْعُكُمْ وَلَا أَبْصَارُكُمْ وَلَا جُلُودُكُمْ وَلَٰكِن ظَنَنتُمْ أَنَّ اللَّهَ لَا يَعْلَمُ كَثِيرًا مِّمَّا تَعْمَلُونَ
और (तुम्हारी तो ये हालत थी कि) तुम लोग इस ख्याल से (अपने गुनाहों की) पर्दा दारी भी तो नहीं करते थे कि तुम्हारे कान और तुम्हारी ऑंखे और तुम्हारे आज़ा तुम्हारे बरख़िलाफ गवाही देंगे बल्कि तुम इस ख्याल मे (भूले हुए) थे कि ख़ुदा को तुम्हारे बहुत से कामों की ख़बर ही नहीं
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अनुवाद — फुस्सिलत 20

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Tuesday, August 18, 2026

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