Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَخْرُصُونَ (यख़रुसून): अटकलें लगाना, झूठ बोलना, बिना किसी ज्ञान के अनुमान लगाना।
तफ़सीर (व्याख्या):
ये आयत मक्का के मुशरिकों (बहुदेववादियों) के उस झूठे तर्क का खंडन करती है जो वे अपने शिर्क (ईश्वर के साथ साझीदार ठहराने) को सही ठहराने के लिए इस्तेमाल करते थे। उन्होंने कहा: "अगर अल्लाह (रहमान) चाहता तो हम इन मूर्तियों और फ़रिश्तों की पूजा नहीं करते।" यानी वे अपनी गलतियों को अल्लाह की इच्छा पर थोप रहे थे, जैसे कि अल्लाह ने ही उन्हें ऐसा करने का आदेश दिया हो या उनकी यह हरकत अल्लाह की मर्ज़ी से हुई हो।
अल्लाह तआला ने इस बात को सख्ती से खारिज किया और फ़रमाया कि इन लोगों के पास इस दावे का कोई ज्ञान नहीं है। वे केवल अटकलें लगा रहे हैं और झूठ बोल रहे हैं। अल्लाह ने इंसानों को समझने के लिए अक्ल दी, हिदायत के लिए रसूल भेजे, और किताबें उतारीं। उसने कभी किसी को अपनी पूजा के सिवा किसी और की पूजा करने का आदेश नहीं दिया। अल्लाह की इच्छा का मतलब यह नहीं कि वह गुनाह से राज़ी है, बल्कि उसने इंसान को चुनने की आज़ादी दी और सच्चा रास्ता दिखाया।
यहाँ एक बड़ी सीख है: इंसान अपनी गलतियों को क़िस्मत या अल्लाह की इच्छा पर डालकर ज़िम्मेदारी से भाग नहीं सकता। अल्लाह ने हमें साफ़-साफ़ बता दिया है कि सिर्फ़ उसी की इबादत करो। जो कोई इसके खिलाफ जाता है, वह अपनी मर्ज़ी से करता है, और उसका अंजाम उसे भुगतना होगा।
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ज्ञान अल्लाह की तरफ से आता है, और जो लोग बिना ज्ञान के बातें बनाते हैं, वे केवल धोखे में हैं। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की इबादत में पूरी तरह सच्चे हों, क्योंकि वही सब कुछ सुनने और जानने वाला है। उसकी रहमत उन्हीं के लिए है जो उसकी इबादत को सिर्फ़ उसी के लिए खास करते हैं। याद रखें, अल्लाह ने कभी किसी को गुमराही का हुक्म नहीं दिया — उसने तो हमेशा हिदायत का रास्ता दिखाया है।
📜 आयत 18-22 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 20
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (क़यामत) में उनसे बाज़पुर्स की जाएगी और कहते हैं…सूरा आयत 20/89 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुखरुफ सुनें, सूरा अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुखरुफ mp3, सूरा अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 18–22. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ुखरुफ
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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