अज़-ज़ुखरुफ · 20/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
وَقَالُوا لَوْ شَاءَ الرَّحْمَٰنُ مَا عَبَدْنَاهُم ۗ مَّا لَهُم بِذَٰلِكَ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِنْ هُمْ إِلَّا يَخْرُصُونَ ۝٢٠
Wa qaaloo law shaaa`ar Rahmaanu maa `abadnaahum; maa lahum bizaalika min `ilmin in hum illaa yakhrusoon
📖 हिंदी अर्थ
और (क़यामत) में उनसे बाज़पुर्स की जाएगी और कहते हैं कि अगर ख़ुदा चाहता तो हम उनकी परसतिश न करते उनको उसकी कुछ ख़बर ही नहीं ये लोग तो बस अटकल पच्चू बातें किया करते हैं

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَخْرُصُونَ (यख़रुसून): अटकलें लगाना, झूठ बोलना, बिना किसी ज्ञान के अनुमान लगाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

ये आयत मक्का के मुशरिकों (बहुदेववादियों) के उस झूठे तर्क का खंडन करती है जो वे अपने शिर्क (ईश्वर के साथ साझीदार ठहराने) को सही ठहराने के लिए इस्तेमाल करते थे। उन्होंने कहा: "अगर अल्लाह (रहमान) चाहता तो हम इन मूर्तियों और फ़रिश्तों की पूजा नहीं करते।" यानी वे अपनी गलतियों को अल्लाह की इच्छा पर थोप रहे थे, जैसे कि अल्लाह ने ही उन्हें ऐसा करने का आदेश दिया हो या उनकी यह हरकत अल्लाह की मर्ज़ी से हुई हो।

अल्लाह तआला ने इस बात को सख्ती से खारिज किया और फ़रमाया कि इन लोगों के पास इस दावे का कोई ज्ञान नहीं है। वे केवल अटकलें लगा रहे हैं और झूठ बोल रहे हैं। अल्लाह ने इंसानों को समझने के लिए अक्ल दी, हिदायत के लिए रसूल भेजे, और किताबें उतारीं। उसने कभी किसी को अपनी पूजा के सिवा किसी और की पूजा करने का आदेश नहीं दिया। अल्लाह की इच्छा का मतलब यह नहीं कि वह गुनाह से राज़ी है, बल्कि उसने इंसान को चुनने की आज़ादी दी और सच्चा रास्ता दिखाया।

यहाँ एक बड़ी सीख है: इंसान अपनी गलतियों को क़िस्मत या अल्लाह की इच्छा पर डालकर ज़िम्मेदारी से भाग नहीं सकता। अल्लाह ने हमें साफ़-साफ़ बता दिया है कि सिर्फ़ उसी की इबादत करो। जो कोई इसके खिलाफ जाता है, वह अपनी मर्ज़ी से करता है, और उसका अंजाम उसे भुगतना होगा।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ज्ञान अल्लाह की तरफ से आता है, और जो लोग बिना ज्ञान के बातें बनाते हैं, वे केवल धोखे में हैं। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की इबादत में पूरी तरह सच्चे हों, क्योंकि वही सब कुछ सुनने और जानने वाला है। उसकी रहमत उन्हीं के लिए है जो उसकी इबादत को सिर्फ़ उसी के लिए खास करते हैं। याद रखें, अल्लाह ने कभी किसी को गुमराही का हुक्म नहीं दिया — उसने तो हमेशा हिदायत का रास्ता दिखाया है।



📜 आयत 18-22 — अज़-ज़ुखरुफ

18أَوَمَن يُنَشَّأُ فِي الْحِلْيَةِ وَهُوَ فِي الْخِصَامِ غَيْرُ مُبِينٍ
क्या वह (औरत) जो ज़ेवरों में पाली पोसी जाए और झगड़े में (अच्छी तरह) बात तक न कर सकें (ख़ुदा की बेटी हो सकती है)
19وَجَعَلُوا الْمَلَائِكَةَ الَّذِينَ هُمْ عِبَادُ الرَّحْمَٰنِ إِنَاثًا ۚ أَشَهِدُوا خَلْقَهُمْ ۚ سَتُكْتَبُ شَهَادَتُهُمْ وَيُسْأَلُونَ
और उन लोगों ने फ़रिश्तों को कि वह भी ख़ुदा के बन्दे हैं (ख़ुदा की) बेटियाँ बनायी हैं लोग फरिश्तों की पैदाइश क्यों खड़े देख रहे थे अभी उनकी शहादत क़लम बन्द कर ली जाती है
20وَقَالُوا لَوْ شَاءَ الرَّحْمَٰنُ مَا عَبَدْنَاهُم ۗ مَّا لَهُم بِذَٰلِكَ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِنْ هُمْ إِلَّا يَخْرُصُونَ
और (क़यामत) में उनसे बाज़पुर्स की जाएगी और कहते हैं कि अगर ख़ुदा चाहता तो हम उनकी परसतिश न करते उनको उसकी कुछ ख़बर ही नहीं ये लोग तो बस अटकल पच्चू बातें किया करते हैं
21أَمْ آتَيْنَاهُمْ كِتَابًا مِّن قَبْلِهِ فَهُم بِهِ مُسْتَمْسِكُونَ
या हमने उनको उससे पहले कोई किताब दी थी कि ये लोग उसे मज़बूत थामें हुए हैं
22بَلْ قَالُوا إِنَّا وَجَدْنَا آبَاءَنَا عَلَىٰ أُمَّةٍ وَإِنَّا عَلَىٰ آثَارِهِم مُّهْتَدُونَ
बल्कि ये लोग तो ये कहते हैं कि हमने अपने बाप दादाओं को एक तरीके पर पाया और हम उनको क़दम ब क़दम ठीक रास्ते पर चले जा रहें हैं
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीRevelation
20आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 20

सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (क़यामत) में उनसे बाज़पुर्स की जाएगी और कहते हैं…

सूरा आयत 20/89 — अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुखरुफ सुनें, अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, अज़-ज़ुखरुफ mp3, अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 18–22. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए