अज़-ज़ुखरुफ · 28/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
وَجَعَلَهَا كَلِمَةً بَاقِيَةً فِي عَقِبِهِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ ۝٢٨
Wa ja`alahaa Kalimatam baaqiyatan fee `aqibihee la`al lahum yarji`oon
📖 हिंदी अर्थ
और उसी (ईमान) को इब्राहीम ने अपनी औलाद में हमेशा बाक़ी रहने वाली बात छोड़ गए ताकि वह (ख़ुदा की तरफ रूजू) करें

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • جَعَلَهَا (जअलहा): उसे बनाया/कर दिया
  • كَلِمَةً (कलिमतन): वचन/कलिमा
  • بَاقِيَةً (बाक़ियतन): स्थायी, शेष रहने वाली
  • عَقِبِهِ (अक़िबिही): उसकी संतान/वंशज
  • لَعَلَّهُمْ (लअल्लहुम): ताकि वे / आशा है कि वे
  • يَرْجِعُونَ (यर्जिऊन): लौट आएं

विस्तृत तफ़सीर:

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी ज़िंदगी में जो सबसे बड़ा और अनमोल काम किया, वह यह था कि उन्होंने तौहीद का कलिमा (ला इलाहा इल्लल्लाह) को अपनी औलाद और वंशजों में हमेशा के लिए बाक़ी रहने वाला वचन बना दिया। यह कोई साधारण बात नहीं थी, बल्कि यह एक ऐसी अमानत थी जिसे उन्होंने अपने बाद आने वाली पीढ़ियों को सौंपा।

यह कलिमा उनकी संतान में इस तरह जड़ पकड़ गया कि हर ज़माने में उनकी औलाद में से कुछ लोग ऐसे होते रहे जो अल्लाह की वहदानिय्यत (एकता) पर क़ायम रहे, किसी को उसका शरीक नहीं बनाया। यह सिलसिला यूँ ही चलता रहा, यहाँ तक कि अल्लाह ने उन्हीं की संतान में से आख़िरी नबी मुहम्मद ﷺ को मब'अस (नबी बनाकर भेजा)।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें बताते हैं कि इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने यह वचन इसलिए छोड़ा था ताकि उनकी औलाद और उनके बाद आने वाले लोग, ख़ासकर मक्का के काफ़िर, जब इस बात को जानें कि उनके बाप दादा इब्राहीम ने तौहीद की वसीयत की थी, तो वे अपनी ग़लती को समझें, शिर्क और गुनाहों से तौबा करके अल्लाह की तरफ़ लौट आएं।

यह आयत हमें सिखाती है कि एक सच्चे मुसलमान की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ अपनी निजी ज़िंदगी को सुधारना नहीं है, बल्कि अपनी औलाद और आने वाली पीढ़ियों को भी सही रास्ते पर चलाना है। हज़रत इब्राहीम ने यह काम किया और हमें भी चाहिए कि अपने बच्चों के दिलों में तौहीद का कलिमा और अल्लाह की मोहब्बत इस तरह बिठाएं कि वह उनके सीने में हमेशा के लिए बाक़ी रहे।

यह कितनी बड़ी नेमत है कि अल्लाह ने हमें मुसलमान बनाया और हमें वह कलिमा दिया जो इब्राहीम अलैहिस्सलाम की सबसे बड़ी विरासत है। हमें चाहिए कि इस कलिमा की क़द्र करें, इसे अपनी ज़िंदगी में अपनाएं और अपनी आने वाली नस्लों तक पहुंचाएं। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देगा।



📜 आयत 26-30 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

26وَإِذْ قَالَ إِبْرَاهِيمُ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِ إِنَّنِي بَرَاءٌ مِّمَّا تَعْبُدُونَ
(और वह वख्त याद करो) जब इब्राहीम ने अपने (मुँह बोले) बाप (आज़र) और अपनी क़ौम से कहा कि जिन चीज़ों को तुम लोग पूजते हो मैं यक़ीनन उससे बेज़ार हूँ
27إِلَّا الَّذِي فَطَرَنِي فَإِنَّهُ سَيَهْدِينِ
मगर उसकी इबादत करता हूँ, जिसने मुझे पैदा किया तो वही बहुत जल्द मेरी हिदायत करेगा
28وَجَعَلَهَا كَلِمَةً بَاقِيَةً فِي عَقِبِهِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
और उसी (ईमान) को इब्राहीम ने अपनी औलाद में हमेशा बाक़ी रहने वाली बात छोड़ गए ताकि वह (ख़ुदा की तरफ रूजू) करें
29بَلْ مَتَّعْتُ هَٰؤُلَاءِ وَآبَاءَهُمْ حَتَّىٰ جَاءَهُمُ الْحَقُّ وَرَسُولٌ مُّبِينٌ
बल्कि मैं उनको और उनके बाप दादाओं को फायदा पहुँचाता रहा यहाँ तक कि उनके पास (दीने) हक़ और साफ़ साफ़ बयान करने वाला रसूल आ पहुँचा
30وَلَمَّا جَاءَهُمُ الْحَقُّ قَالُوا هَٰذَا سِحْرٌ وَإِنَّا بِهِ كَافِرُونَ
और जब उनके पास (दीन) हक़ आ गया तो कहने लगे ये तो जादू है और हम तो हरगिज़ इसके मानने वाले नहीं
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
28आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 28

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Saturday, October 3, 2026

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