अज़-ज़ुखरुफ · 56/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
فَجَعَلْنَاهُمْ سَلَفًا وَمَثَلًا لِّلْآخِرِينَ ۝٥٦
Faja`alnaahum salafanw wa masalal lil aakhireen
📖 हिंदी अर्थ
फिर हमने उनको गया गुज़रा और पिछलों के वास्ते इबरत बना दिया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَلَفًا (सलफ़न): अग्रगामी, पूर्ववर्ती, आगे बढ़ने वाला, या वह समूह जो आगे चलकर दूसरों के लिए नमूना बने।
  • مَثَلًا (मसलन): उदाहरण, सबक़, इबरत, या वह चीज़ जिससे लोग सीख लें और उस पर अमल न करें।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने फ़िरऔन और उसकी क़ौम को, जिन्होंने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया और सरकशी पर अड़े रहे, समुद्र में ग़रक़ करके हलाक कर दिया। अल्लाह ने उन्हें "सलफ़" बनाया, यानी उन्हें आगे बढ़ने वाला और पेशरव बना दिया — लेकिन किस चीज़ का पेशरव? उन्हें अज़ाब और अल्लाह की नाराज़गी का अग्रदूत बना दिया, ताकि उनके बाद आने वाले लोगों के लिए वे एक चेतावनी और निशानी बन जाएँ। उन्हें "मसल" (उदाहरण) भी बनाया गया, यानी आने वाली नस्लें जब उनका ज़िक्र सुनें या उनके हालात पर ग़ौर करें, तो उनसे सबक़ हासिल करें और समझ लें कि अल्लाह की नाफ़रमानी और उसके नबियों की मुख़ालफ़त का अंजाम क्या होता है।

यह वाक़िया सिर्फ़ इतिहास का एक क़िस्सा नहीं, बल्कि हर ज़माने के लिए एक ज़िंदा नसीहत है। अल्लाह ने फ़िरऔनियों को हलाक करके यह साबित कर दिया कि उसकी क़ुदरत के आगे कोई ताक़त नहीं चल सकती। जो लोग उनके जैसी ज़ुल्म और सरकशी की राह पर चलेंगे, उनका अंजाम भी उन्हीं जैसा होगा। यह आयत हमें सिखाती है कि हम पिछली उम्मतों के हालात से इबरत हासिल करें, अपने अमल को दुरुस्त करें, और अल्लाह की रहमत और हिदायत के तालिब बनें। अल्लाह तआला ने हम पर यह एहसान किया है कि हमें क़ुरआन जैसी किताब दी, जिसमें ये नसीहतें मौजूद हैं — ताकि हम भटकने से बचें और सीधी राह पर चलें। जो इन निशानियों से सबक़ लेता है, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होता है।



📜 आयत 54-58 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

54فَاسْتَخَفَّ قَوْمَهُ فَأَطَاعُوهُ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا فَاسِقِينَ
ग़रज़ फिरऔन ने (बातें बनाकर) अपनी क़ौम की अक़ल मार दी और वह लोग उसके ताबेदार बन गये बेशक वह लोग बदकार थे ही
55فَلَمَّا آسَفُونَا انتَقَمْنَا مِنْهُمْ فَأَغْرَقْنَاهُمْ أَجْمَعِينَ
ग़रज़ जब उन लोगों ने हमको झुझंला दिया तो हमने भी उनसे बदला लिया तो हमने उन सब (के सब) को डुबो दिया
56فَجَعَلْنَاهُمْ سَلَفًا وَمَثَلًا لِّلْآخِرِينَ
फिर हमने उनको गया गुज़रा और पिछलों के वास्ते इबरत बना दिया
57۞ وَلَمَّا ضُرِبَ ابْنُ مَرْيَمَ مَثَلًا إِذَا قَوْمُكَ مِنْهُ يَصِدُّونَ
और(ऐ रसूल) जब मरियम के बेटे (ईसा) की मिसाल बयान की गयी तो उससे तुम्हारी क़ौम के लोग खिलखिला कर हंसने लगे
58وَقَالُوا أَآلِهَتُنَا خَيْرٌ أَمْ هُوَ ۚ مَا ضَرَبُوهُ لَكَ إِلَّا جَدَلًا ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ خَصِمُونَ
और बोल उठे कि भला हमारे माबूद अच्छे हैं या वह (ईसा) उन लोगों ने जो ईसा की मिसाल तुमसे बयान की है तो सिर्फ झगड़ने को
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
56आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 56

सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर हमने उनको गया गुज़रा और पिछलों के वास्ते इबरत…

सूरा आयत 56/89 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुखरुफ सुनें, सूरा अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुखरुफ mp3, सूरा अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.





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Saturday, October 3, 2026

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