अज़-ज़ुखरुफ · 55/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
فَلَمَّا آسَفُونَا انتَقَمْنَا مِنْهُمْ فَأَغْرَقْنَاهُمْ أَجْمَعِينَ ۝٥٥
Falammaaa aasafoonan taqamnaa minhum fa aghraqnaahum ajma`een
📖 हिंदी अर्थ
ग़रज़ जब उन लोगों ने हमको झुझंला दिया तो हमने भी उनसे बदला लिया तो हमने उन सब (के सब) को डुबो दिया

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آسَفُونَا (आसफ़ूना): हमें क्रोधित किया, हमारा प्रकोप भड़काया।
  • انتَقَمْنَا (इंतक़मना): हमने बदला लिया, दंड दिया।
  • أَغْرَقْنَاهُمْ (अग़रक़नाहुम): हमने उन्हें डुबो दिया।
  • أَجْمَعِينَ (अजमईन): सभी को, एक साथ, बिना किसी को छोड़े।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब फ़िरऔन और उसकी क़ौम ने हद से गुज़रकर हमें क्रोधित किया — यानी उन्होंने मूसा (अलैहिस्सलाम) की दावत को ठुकराया, अल्लाह की आयतों (निशानियों) को झुठलाया और अपने कुफ़्र और सरकशी पर अड़े रहे — तो हमने उनसे बदला लिया। हमारा बदला उनके लिए ऐसा था कि हमने उन्हें समुद्र में डुबो दिया, और उनमें से एक भी व्यक्ति बचकर नहीं निकला। यह उनके घमंड और ज़ुल्म का नतीजा था कि जो लोग अल्लाह की निशानियों को झुठलाते हैं और उसके रसूलों का विरोध करते हैं, वे अल्लाह के प्रकोप से नहीं बच सकते।

यह घटना हमारे लिए एक बड़ी सीख है। अल्लाह तआला बहुत दयालु और क्षमाशील है, लेकिन जब कोई क़ौम अपनी सरकशी में हद से गुज़र जाती है और अल्लाह के रसूलों को झुठलाने पर अड़ जाती है, तो उसका अंजाम विनाश के सिवा कुछ नहीं होता। फ़िरऔन ने सोचा था कि उसकी ताक़त और उसकी सेना उसे बचा लेगी, लेकिन अल्लाह की क़ुदरत के आगे कोई ताक़त टिक नहीं सकती।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अल्लाह के हुक्मों का पालन करना चाहिए और उसके रसूलों की बात माननी चाहिए। जो लोग अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं और उसकी आयतों को झुठलाते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होता है। अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन वह उन्हीं पर आती है जो हक़ (सच्चाई) से मुँह मोड़ते हैं।

आज भी जो लोग अल्लाह के दीन से दुश्मनी रखते हैं और उसकी निशानियों का मज़ाक उड़ाते हैं, उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डरना चाहिए। अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) कभी नहीं बदलती — जो क़ौमें सरकशी करती हैं, वे तबाह हो जाती हैं। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत के तलबगार बनें, और उसकी नाफ़रमानी से बचें, ताकि हम उसके प्रकोप से महफ़ूज़ रहें और उसकी रहमत के हक़दार बनें।



📜 आयत 53-57 — अज़-ज़ुखरुफ

53فَلَوْلَا أُلْقِيَ عَلَيْهِ أَسْوِرَةٌ مِّن ذَهَبٍ أَوْ جَاءَ مَعَهُ الْمَلَائِكَةُ مُقْتَرِنِينَ
कहीं बहुत बेहतर हूँ (अगर ये बेहतर है तो इसके लिए सोने के कंगन) (ख़ुदा के हॉ से) क्यों नहीं उतारे गये या उसके साथ फ़रिश्ते जमा होकर आते
54فَاسْتَخَفَّ قَوْمَهُ فَأَطَاعُوهُ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا فَاسِقِينَ
ग़रज़ फिरऔन ने (बातें बनाकर) अपनी क़ौम की अक़ल मार दी और वह लोग उसके ताबेदार बन गये बेशक वह लोग बदकार थे ही
55فَلَمَّا آسَفُونَا انتَقَمْنَا مِنْهُمْ فَأَغْرَقْنَاهُمْ أَجْمَعِينَ
ग़रज़ जब उन लोगों ने हमको झुझंला दिया तो हमने भी उनसे बदला लिया तो हमने उन सब (के सब) को डुबो दिया
56فَجَعَلْنَاهُمْ سَلَفًا وَمَثَلًا لِّلْآخِرِينَ
फिर हमने उनको गया गुज़रा और पिछलों के वास्ते इबरत बना दिया
57۞ وَلَمَّا ضُرِبَ ابْنُ مَرْيَمَ مَثَلًا إِذَا قَوْمُكَ مِنْهُ يَصِدُّونَ
और(ऐ रसूल) जब मरियम के बेटे (ईसा) की मिसाल बयान की गयी तो उससे तुम्हारी क़ौम के लोग खिलखिला कर हंसने लगे
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीRevelation
55आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 55

सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 55 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ग़रज़ जब उन लोगों ने हमको झुझंला दिया तो हमने…

सूरा आयत 55/89 — अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुखरुफ सुनें, अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, अज़-ज़ुखरुफ mp3, अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 53–57. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए