अज़-ज़ुखरुफ · 6/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
وَكَمْ أَرْسَلْنَا مِن نَّبِيٍّ فِي الْأَوَّلِينَ ۝٦
Wa kam arsalnaa min Nabiyyin fil awwaleen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने अगले लोगों को बहुत से पैग़म्बर भेजे थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَمْ (कम): बहुत सारे, असंख्य।
  • أَرْسَلْنَا (अर्सलना): हमने भेजा।
  • نَبِيّ (नबी): अल्लाह का संदेशवाहक पैगंबर।
  • الأَوَّلِينَ (अल-अव्वलीन): पिछली उम्मतें, पहले की क़ौमें।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपने नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ को दिलासा देते हुए फ़रमाते हैं कि हे नबी! हमने आपसे पहले भी बहुत सी पिछली क़ौमों में कई नबी भेजे। यह सिलसिला आपसे शुरू नहीं हुआ, बल्कि आदम (अलैहिस्सलाम) के ज़माने से लेकर हर उम्मत में अल्लाह ने अपने पैगंबर भेजे। जब भी कोई नबी किसी क़ौम के पास आया, उस क़ौम ने उसका मज़ाक उड़ाया और उसे झुठलाया — ठीक उसी तरह जैसे आपकी क़ौम आपके साथ कर रही है।

मगर अल्लाह का क़ानून यह रहा है कि जिन क़ौमों ने अपने नबियों को झुठलाया और उनका मज़ाक उड़ाया, उन्हें अल्लाह ने हलाक कर दिया। वे क़ौमें आपकी क़ौम से कहीं ज़्यादा ताक़तवर और ज़बरदस्त थीं — उनके पास बड़ी सेनाएँ, शानदार इमारतें और लंबी उम्रें थीं — लेकिन उनकी ताक़त उन्हें अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकी। उनका अंजाम बर्बादी और तबाही के सिवा कुछ नहीं था।

इस आयत में नबी ﷺ के लिए बड़ी तसल्ली है कि आप अकेले नहीं हैं, बल्कि हर ज़माने में नबियों को इसी तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा। और साथ ही काफ़िरों के लिए एक सख़्त चेतावनी है कि अगर वे अपनी ज़िद और इनकार पर अड़े रहे, तो उनका अंजाम भी पिछली उम्मतों जैसा ही होगा।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों को हमेशा परीक्षाओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन अल्लाह का वादा है कि वह अपने नबियों और उनके सच्चे पैरोकारों की मदद करता है। इसलिए हमें सब्र और भरोसे के साथ अपने ईमान पर क़ायम रहना चाहिए, क्योंकि अल्लाह की मदद ज़रूर आती है — चाहे वह कितनी भी देर से क्यों न आए।



📜 आयत 4-8 — अज़-ज़ुखरुफ

4وَإِنَّهُ فِي أُمِّ الْكِتَابِ لَدَيْنَا لَعَلِيٌّ حَكِيمٌ
और बेशक ये (क़ुरान) असली किताब (लौह महफूज़) में (भी जो) मेरे पास है लिखी हुई है (और) यक़ीनन बड़े रूतबे की (और) पुरअज़ हिकमत है
5أَفَنَضْرِبُ عَنكُمُ الذِّكْرَ صَفْحًا أَن كُنتُمْ قَوْمًا مُّسْرِفِينَ
भला इस वजह से कि तुम ज्यादती करने वाले लोग हो हम तुमको नसीहत करने से मुँह मोड़ेंगे (हरगिज़ नहीं)
6وَكَمْ أَرْسَلْنَا مِن نَّبِيٍّ فِي الْأَوَّلِينَ
और हमने अगले लोगों को बहुत से पैग़म्बर भेजे थे
7وَمَا يَأْتِيهِم مِّن نَّبِيٍّ إِلَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
और कोई पैग़म्बर उनके पास ऐसा नहीं आया जिससे इन लोगों ने ठट्ठे नहीं किए हो
8فَأَهْلَكْنَا أَشَدَّ مِنْهُم بَطْشًا وَمَضَىٰ مَثَلُ الْأَوَّلِينَ
तो उनमें से जो ज्यादा ज़ोरावर थे तो उनको हमने हलाक कर मारा और (दुनिया में) अगलों के अफ़साने जारी हो गए
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीRevelation
6आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 6

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Tuesday, August 18, 2026

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