अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَفَنَضْرِبُ عَنكُمُ الذِّكْرَ صَفْحًا: क्या हम तुमसे क़ुरआन की शिक्षा और नसीहत को रोक दें, यानी तुम्हें छोड़ दें और तुम्हारी ओर से मुँह मोड़ लें?
- صَفْحًا: यहाँ इसका अर्थ है "छोड़ देना" या "दरगुज़र करना", यानी किसी चीज़ को पूरी तरह त्याग देना।
- مُسْرِفِينَ: हद से बढ़ने वाले, यानी कु़फ़्र और गुनाहों में इंतिहा करने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों से पूछ रहे हैं: क्या हम तुम्हारे इस हाल की वजह से कि तुम कु़फ़्र और गुनाहों में हद से बढ़ गए हो, तुम्हारी तरफ़ से क़ुरआन और नसीहत को रोक दें? क्या हम तुम्हें उनके हाल पर छोड़ दें और तुम पर हुज्जत क़ाइम न करें?
यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब साफ़ है: हरगिज़ नहीं! अल्लाह तआला अपनी रहमत और करम से तुम पर क़ुरआन उतारता रहेगा, चाहे तुम कितना भी इनकार और सरकशी क्यों न करो। अल्लाह की रहमत उसके ग़ज़ब से पहले है, और वह अपने बंदों को मौका देता है, ताकि वे रूजू करें और हिदायत पाएँ।
यह आयत अल्लाह की उस महान रहमत की तरफ़ इशारा करती है जो वह अपने बंदों पर करता है। अगर अल्लाह चाहता तो जब लोग इनकार करते, तो वह उन पर से अपनी नेमतें रोक लेता और उन्हें उनके हाल पर छोड़ देता। लेकिन अल्लाह की शान इससे बहुत ऊँची है — वह अपने बंदों पर रहमत और एहसान करता रहता है, उन्हें किताब और हिदायत भेजता रहता है, ताकि वे अंधेरों से निकलकर रौशनी की तरफ़ आएँ।
दावती पहलू:
यह आयत हमें अल्लाह की असीम रहमत और मेहरबानी पर ग़ौर करने की तरफ़ बुलाती है। जब हम गुनाहों में डूबे होते हैं, तो शैतान हमें यह वहम देता है कि अल्लाह ने हमें छोड़ दिया है, लेकिन यह आयत उस झूठ का जवाब है। अल्लाह तआला अपने बंदों से इतना प्यार करता है कि उनके इनकार के बावजूद उन पर क़ुरआन उतारता रहता है, उन्हें नसीहत भेजता रहता है। यह हमारे लिए कितनी बड़ी ख़ुशख़बरी है कि अल्लाह का दरवाज़ा हमेशा खुला है, और वह हमारी तौबा का इंतज़ार कर रहा है।
तो आइए, हम इस रहमत का फ़ायदा उठाएँ, क़ुरआन की तरफ़ रूजू करें, और अल्लाह की रहमत के साये में आकर अपनी ज़िंदगी को रौशन करें। अल्लाह कभी अपने बंदों से निराश नहीं होता, बल्कि वह हमेशा उन्हें बुलाता है कि "ऐ मेरे बंदो, मेरी तरफ़ आओ, मैं तुम्हें माफ़ कर दूँगा।"
📜 आयत 3-7 — अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 5
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 5 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : भला इस वजह से कि तुम ज्यादती करने वाले लोग…सूरा आयत 5/89 — अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुखरुफ सुनें, अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, अज़-ज़ुखरुफ mp3, अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 3–7. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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