अज़-ज़ुखरुफ · 84/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
وَهُوَ الَّذِي فِي السَّمَاءِ إِلَٰهٌ وَفِي الْأَرْضِ إِلَٰهٌ ۚ وَهُوَ الْحَكِيمُ الْعَلِيمُ ۝٨٤
Wa Huwal lazee fissamaaa`i Ilaahunw wa fil ardi Ilaah; wa Huwal Hakeemul`Aleem
📖 हिंदी अर्थ
उनके सामने आ मौजूद हो और आसमान में भी (उसी की इबादत की जाती है और वही ज़मीन में भी माबूद है और वही वाकिफ़कार हिकमत वाला है
📜

अनुवाद — Tafsir

वही अल्लाह है जो आसमान में भी पूजा के योग्य है और ज़मीन में भी पूजा के योग्य है। वही सबसे बुद्धिमान और सब कुछ जानने वाला है।

शब्दों के अर्थ:

  • إِلَٰهٌ (इलाह): पूजा के योग्य, जिसकी बंदगी की जाए
  • الْحَكِيمُ (अल-हकीम): पूर्ण ज्ञान और ताड़न वाला, जो हर काम में सही और उचित फैसला करे
  • الْعَلِيمُ (अल-अलीम): सब कुछ जानने वाला, जिसके ज्ञान से कोई चीज़ छिपी न हो

विस्तृत व्याख्या:

यह आयत मुसलमानों के दिलों में अल्लाह की अज़मत और उसकी एकता का एहसास पैदा करती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि वही वह ज़ात है जो आसमान में भी सच्चा माबूद (पूजा के योग्य) है और ज़मीन में भी सच्चा माबूद है। यानी पूरी कायनात में — चाहे ऊपर के आसमान हों या नीचे की ज़मीन — हर जगह सिर्फ़ अल्लाह ही इबादत के लायक़ है। कोई और नहीं जो उसके साथ पूजा में शरीक हो सके।

यह बात हमें सिखाती है कि जिस तरह आसमान में फ़रिश्ते अल्लाह की इबादत करते हैं, उसी तरह ज़मीन पर हम इंसानों को भी सिर्फ़ उसी की इबादत करनी चाहिए। अल्लाह की इबादत का दामन हर जगह फैला हुआ है — चाहे हम सफ़र में हों, घर में हों, मस्जिद में हों या किसी भी जगह — हमें याद रखना चाहिए कि अल्लाह हमारे साथ है और वही हमारी इबादत का हक़दार है।

फिर अल्लाह अपनी दो ख़ूबियाँ बयान करता है: "अल-हकीम" यानी वह बड़ा ही बुद्धिमान और ताड़ने वाला है। उसने जो क़ुरआन नाज़िल किया, जो शरीयत दी, जो क़ानून बनाए — सब में हिकमत (बुद्धिमानी) भरी हुई है। उसकी हर मख़लूक़ (सृष्टि) में, हर हुक्म में, हर तदबीर में गहरी मस्लहत (भलाई) है। और "अल-अलीम" यानी वह सब कुछ जानने वाला है — हर इंसान के दिल की बात, उसकी नीयत, उसके अमल — सब कुछ उसके इल्म में है। उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है, न ज़मीन की गहराइयों में और न आसमान की बुलंदियों में।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की इबादत सिर्फ़ एक जगह या एक वक़्त तक महदूद नहीं है। हमें हर हाल में, हर जगह अल्लाह को याद रखना चाहिए और उसकी इबादत करनी चाहिए। जब हम यह समझ लेंगे कि अल्लाह हर जगह मौजूद है और सब कुछ जानता है, तो हमारे दिलों में उसका ख़ौफ़ पैदा होगा, उसकी मुहब्बत बढ़ेगी और हम गुनाहों से बचेंगे।

यह आयत हमें तौहीद (एकेश्वरवाद) की तालीम देती है — कि सिर्फ़ अल्लाह ही इबादत के लायक़ है, आसमान में भी और ज़मीन में भी। और साथ ही हमें यह भी बताती है कि अल्लाह हकीम और अलीम है — वह जो कुछ करता है हिकमत से करता है और जो कुछ जानता है पूरी तरह जानता है। यही वजह है कि उसकी इबादत हमारे लिए सबसे बड़ी नेमत और सबसे अच्छा काम है।

🎧 सुनें

📜 आयत 82-86 — अज़-ज़ुखरुफ

82سُبْحَانَ رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ رَبِّ الْعَرْشِ عَمَّا يَصِفُونَ
ये लोग जो कुछ बयान करते हैं सारे आसमान व ज़मीन का मालिक अर्श का मालिक (ख़ुदा) उससे पाक व पाक़ीज़ा है
83فَذَرْهُمْ يَخُوضُوا وَيَلْعَبُوا حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي يُوعَدُونَ
तो तुम उन्हें छोड़ दो कि पड़े बक बक करते और खेलते रहते हैं यहाँ तक कि जिस दिन का उनसे वायदा किया जाता है
84وَهُوَ الَّذِي فِي السَّمَاءِ إِلَٰهٌ وَفِي الْأَرْضِ إِلَٰهٌ ۚ وَهُوَ الْحَكِيمُ الْعَلِيمُ
उनके सामने आ मौजूद हो और आसमान में भी (उसी की इबादत की जाती है और वही ज़मीन में भी माबूद है और वही वाकिफ़कार हिकमत वाला है
85وَتَبَارَكَ الَّذِي لَهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَعِندَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
और वही बहुत बाबरकत है जिसके लिए सारे आसमान व ज़मीन और दोनों के दरमियान की हुक़ुमत है और क़यामत की ख़बर भी उसी को है और तुम लोग उसकी तरफ लौटाए जाओगे
86وَلَا يَمْلِكُ الَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِهِ الشَّفَاعَةَ إِلَّا مَن شَهِدَ بِالْحَقِّ وَهُمْ يَعْلَمُونَ
और ख़ुदा के सिवा जिनकी ये लोग इबादत करतें हैं वह तो सिफारिश का भी एख्तेयार नहीं रख़ते मगर (हॉ) जो लोग समझ बूझ कर हक़ बात (तौहीद) की गवाही दें (तो खैर)
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84आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 84

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Tuesday, August 18, 2026

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