अनुवाद — Tafsir
वही अल्लाह है जो आसमान में भी पूजा के योग्य है और ज़मीन में भी पूजा के योग्य है। वही सबसे बुद्धिमान और सब कुछ जानने वाला है।
शब्दों के अर्थ:
- إِلَٰهٌ (इलाह): पूजा के योग्य, जिसकी बंदगी की जाए
- الْحَكِيمُ (अल-हकीम): पूर्ण ज्ञान और ताड़न वाला, जो हर काम में सही और उचित फैसला करे
- الْعَلِيمُ (अल-अलीम): सब कुछ जानने वाला, जिसके ज्ञान से कोई चीज़ छिपी न हो
विस्तृत व्याख्या:
यह आयत मुसलमानों के दिलों में अल्लाह की अज़मत और उसकी एकता का एहसास पैदा करती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि वही वह ज़ात है जो आसमान में भी सच्चा माबूद (पूजा के योग्य) है और ज़मीन में भी सच्चा माबूद है। यानी पूरी कायनात में — चाहे ऊपर के आसमान हों या नीचे की ज़मीन — हर जगह सिर्फ़ अल्लाह ही इबादत के लायक़ है। कोई और नहीं जो उसके साथ पूजा में शरीक हो सके।
यह बात हमें सिखाती है कि जिस तरह आसमान में फ़रिश्ते अल्लाह की इबादत करते हैं, उसी तरह ज़मीन पर हम इंसानों को भी सिर्फ़ उसी की इबादत करनी चाहिए। अल्लाह की इबादत का दामन हर जगह फैला हुआ है — चाहे हम सफ़र में हों, घर में हों, मस्जिद में हों या किसी भी जगह — हमें याद रखना चाहिए कि अल्लाह हमारे साथ है और वही हमारी इबादत का हक़दार है।
फिर अल्लाह अपनी दो ख़ूबियाँ बयान करता है: "अल-हकीम" यानी वह बड़ा ही बुद्धिमान और ताड़ने वाला है। उसने जो क़ुरआन नाज़िल किया, जो शरीयत दी, जो क़ानून बनाए — सब में हिकमत (बुद्धिमानी) भरी हुई है। उसकी हर मख़लूक़ (सृष्टि) में, हर हुक्म में, हर तदबीर में गहरी मस्लहत (भलाई) है। और "अल-अलीम" यानी वह सब कुछ जानने वाला है — हर इंसान के दिल की बात, उसकी नीयत, उसके अमल — सब कुछ उसके इल्म में है। उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है, न ज़मीन की गहराइयों में और न आसमान की बुलंदियों में।
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की इबादत सिर्फ़ एक जगह या एक वक़्त तक महदूद नहीं है। हमें हर हाल में, हर जगह अल्लाह को याद रखना चाहिए और उसकी इबादत करनी चाहिए। जब हम यह समझ लेंगे कि अल्लाह हर जगह मौजूद है और सब कुछ जानता है, तो हमारे दिलों में उसका ख़ौफ़ पैदा होगा, उसकी मुहब्बत बढ़ेगी और हम गुनाहों से बचेंगे।
यह आयत हमें तौहीद (एकेश्वरवाद) की तालीम देती है — कि सिर्फ़ अल्लाह ही इबादत के लायक़ है, आसमान में भी और ज़मीन में भी। और साथ ही हमें यह भी बताती है कि अल्लाह हकीम और अलीम है — वह जो कुछ करता है हिकमत से करता है और जो कुछ जानता है पूरी तरह जानता है। यही वजह है कि उसकी इबादत हमारे लिए सबसे बड़ी नेमत और सबसे अच्छा काम है।
📜 आयत 82-86 — अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 84
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 84 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उनके सामने आ मौजूद हो और आसमान में भी (उसी…सूरा आयत 84/89 — अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुखरुफ सुनें, अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, अज़-ज़ुखरुफ mp3, अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 82–86. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








