अद-दुखान · 22/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
فَدَعَا رَبَّهُ أَنَّ هَٰؤُلَاءِ قَوْمٌ مُّجْرِمُونَ ۝٢٢
Fada`aa rabbahooo anna haaa`ulaaa`i qawmum mujrimoon
📖 हिंदी अर्थ
(मगर वह सुनाने लगे) तब मूसा ने अपने परवरदिगार से दुआ की कि ये बड़े शरीर लोग हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَدَعَا رَبَّهُ – उन्होंने अपने रब से दुआ की।
  • قَوْمٌ مُّجْرِمُونَ – अपराधी, पापी, मुशरिक (अल्लाह के साथ साझीदार ठहराने वाले) लोग।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन और उसकी क़ौम को अल्लाह की तौहीद (एकता) की दावत दी, उन्हें अज़ाब से डराया और साफ़-साफ़ पैग़ाम पहुँचाया, तो उन्होंने ईमान लाने से इनकार कर दिया और अपने कुफ़्र व इनकार पर अड़े रहे। यहाँ तक कि उन्होंने मूसा (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया और उनकी दावत का मज़ाक उड़ाया। जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने देखा कि ये लोग हिदायत क़बूल करने के बजाय सरकशी और ज़ुल्म पर ही डटे हुए हैं, और उनके ईमान लाने की कोई उम्मीद नहीं बची, तो उन्होंने अपने रब की तरफ रुजू किया और दुआ की: "ऐ मेरे रब! ये लोग बड़े अपराधी हैं, ये मुशरिक हैं, तेरे साथ कुफ़्र करने वाले हैं, ये अज़ाब के हक़दार हैं।"

यह दुआ किसी बदले की भावना से नहीं थी, बल्कि यह अल्लाह की रहमत और उसके इंसाफ़ की पुकार थी। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने यह बात अल्लाह के सामने रखी कि ये लोग हिदायत की हर दावत को ठुकरा चुके हैं, और अब इन पर तेरा अज़ाब नाज़िल होना ही इनके लिए सबसे बड़ी नसीहत और इबरत बन सकता है। यह दुआ उनके सब्र और अल्लाह पर पूरे भरोसे का सबूत है — उन्होंने अपनी ताक़त पर नहीं, बल्कि अल्लाह की क़ुदरत पर भरोसा किया।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि जब इंसान अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर ले और हक़ की दावत पहुँचा दे, तो उसे चाहिए कि मामला अल्लाह के सुपुर्द कर दे और उसी से मदद माँगे। अल्लाह अपने नबियों की दुआ ज़रूर सुनता है और अपने बंदों के हक़ में इंसाफ़ करता है। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह के नबी भी इंसान थे और मुश्किलों में उसी की तरफ रुजू करते थे — यह हमारे लिए सबसे बड़ी नसीहत है कि हम भी हर मुश्किल में अल्लाह ही से दुआ करें, क्योंकि वही सुनने वाला, जानने वाला और क़ुदरत रखने वाला है।

🎧 सुनें

📜 आयत 20-24 — अद-दुखान

20وَإِنِّي عُذْتُ بِرَبِّي وَرَبِّكُمْ أَن تَرْجُمُونِ
और इस बात से कि तुम मुझे संगसार करो मैं अपने और तुम्हारे परवरदिगार (ख़ुदा) की पनाह मांगता हूँ
21وَإِن لَّمْ تُؤْمِنُوا لِي فَاعْتَزِلُونِ
और अगर तुम मुझ पर ईमान नहीं लाए तो तुम मुझसे अलग हो जाओ
22فَدَعَا رَبَّهُ أَنَّ هَٰؤُلَاءِ قَوْمٌ مُّجْرِمُونَ
(मगर वह सुनाने लगे) तब मूसा ने अपने परवरदिगार से दुआ की कि ये बड़े शरीर लोग हैं
23فَأَسْرِ بِعِبَادِي لَيْلًا إِنَّكُم مُّتَّبَعُونَ
तो ख़ुदा ने हुक्म दिया कि तुम मेरे बन्दों (बनी इसराईल) को रातों रात लेकर चले जाओ और तुम्हारा पीछा भी ज़रूर किया जाएगा
24وَاتْرُكِ الْبَحْرَ رَهْوًا ۖ إِنَّهُمْ جُندٌ مُّغْرَقُونَ
और दरिया को अपनी हालत पर ठहरा हुआ छोड़ कर (पार हो) जाओ (तुम्हारे बाद) उनका सारा लशकर डुबो दिया जाएगा
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीRevelation
22आयत

अनुवाद — अद-दुखान 22

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Tuesday, August 18, 2026

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