अद-दुखान · 21/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
وَإِن لَّمْ تُؤْمِنُوا لِي فَاعْتَزِلُونِ ۝٢١
Wa il lam tu`minoo lee fa`taziloon
📖 हिंदी अर्थ
और अगर तुम मुझ पर ईमान नहीं लाए तो तुम मुझसे अलग हो जाओ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَمْ تُؤْمِنُوا لِي – मेरी बात पर ईमान न लाओ, मुझे सच्चा न मानो
  • فَاعْتَزِلُونِ – मुझे अकेला छोड़ दो, मेरा रास्ता छोड़ दो, मुझे नुकसान पहुँचाने से बाज़ आ जाओ

तफ़सीर:

यह आयत हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की कहानी से जुड़ी है, जब उन्होंने फ़िरऔन और उसकी क़ौम को तौहीद का पैग़ाम दिया और उन्हें अल्लाह की तरफ़ बुलाया। उन्होंने अपनी रिसालत के सुबूत के तौर पर वो मोजिज़े पेश किए जो अल्लाह ने उन्हें अता किए थे। जब फ़िरऔन और उसके साथियों ने हक़ को क़बूल करने से इनकार किया और मूसा (अलैहिस्सलाम) को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की, तो मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उनसे कहा: "अगर तुम मेरी बात पर ईमान नहीं लाते, तो कम से कम मुझे अकेला छोड़ दो, मेरे रास्ते में रुकावट मत डालो, और मुझे अपने हाथों और ज़ुबान से तकलीफ़ मत पहुँचाओ।"

इस आयत में एक बड़ी हिकमत और सबक है। यह हमें सिखाती है कि हक़ की दावत देने वाले को अपने मक़सद में पुख़्ता और साहसी होना चाहिए, लेकिन साथ ही उसे हिकमत से काम लेना चाहिए। जब सामने वाले लोग हठ और ज़िद पर अड़ जाएँ और हक़ क़बूल करने के लिए तैयार न हों, तो दावत देने वाला अपनी ज़िम्मेदारी अदा कर चुका है। उसे चाहिए कि वह अपनी जान और इज़्ज़त की हिफ़ाज़त करे और उन लोगों से अलग हो जाए जो उसका नुक़सान चाहते हैं।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि ईमान और कुफ्र के बीच कोई समझौता नहीं हो सकता। जो लोग हक़ को नकारें, उनसे अलग हो जाना ही बेहतर है, ताकि इंसान अपने दीन और अपनी इबादत में मज़बूत रहे। अल्लाह तआला ने मूसा (अलैहिस्सलाम) की इस दुआ को क़बूल किया और उन्हें फ़िरऔन के ज़ुल्म से नजात दी, और फ़िरऔन और उसके लश्कर को समुंदर में ग़रक़ कर दिया। यह उन लोगों के लिए बड़ी निशानी है जो अल्लाह के रसूलों की दावत को ठुकराते हैं।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने दीन पर साबित क़दम रहना चाहिए और हक़ की राह में किसी के डर से पीछे नहीं हटना चाहिए। अगर लोग हमारी बात न मानें, तो हमें अपनी ज़िम्मेदारी अदा करने के बाद उनसे अलग हो जाना चाहिए और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह ही बेहतर मददगार है और वही अपने नेक बंदों को कामयाबी अता करता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 19-23 — अद-दुखान

19وَأَن لَّا تَعْلُوا عَلَى اللَّهِ ۖ إِنِّي آتِيكُم بِسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
और ख़ुदा के सामने सरकशी न करो मैं तुम्हारे पास वाज़ेए व रौशन दलीलें ले कर आया हूँ
20وَإِنِّي عُذْتُ بِرَبِّي وَرَبِّكُمْ أَن تَرْجُمُونِ
और इस बात से कि तुम मुझे संगसार करो मैं अपने और तुम्हारे परवरदिगार (ख़ुदा) की पनाह मांगता हूँ
21وَإِن لَّمْ تُؤْمِنُوا لِي فَاعْتَزِلُونِ
और अगर तुम मुझ पर ईमान नहीं लाए तो तुम मुझसे अलग हो जाओ
22فَدَعَا رَبَّهُ أَنَّ هَٰؤُلَاءِ قَوْمٌ مُّجْرِمُونَ
(मगर वह सुनाने लगे) तब मूसा ने अपने परवरदिगार से दुआ की कि ये बड़े शरीर लोग हैं
23فَأَسْرِ بِعِبَادِي لَيْلًا إِنَّكُم مُّتَّبَعُونَ
तो ख़ुदा ने हुक्म दिया कि तुम मेरे बन्दों (बनी इसराईल) को रातों रात लेकर चले जाओ और तुम्हारा पीछा भी ज़रूर किया जाएगा
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीRevelation
21आयत

अनुवाद — अद-दुखान 21

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Tuesday, August 18, 2026

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