Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَمْ تُؤْمِنُوا لِي – मेरी बात पर ईमान न लाओ, मुझे सच्चा न मानो
- فَاعْتَزِلُونِ – मुझे अकेला छोड़ दो, मेरा रास्ता छोड़ दो, मुझे नुकसान पहुँचाने से बाज़ आ जाओ
तफ़सीर:
यह आयत हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की कहानी से जुड़ी है, जब उन्होंने फ़िरऔन और उसकी क़ौम को तौहीद का पैग़ाम दिया और उन्हें अल्लाह की तरफ़ बुलाया। उन्होंने अपनी रिसालत के सुबूत के तौर पर वो मोजिज़े पेश किए जो अल्लाह ने उन्हें अता किए थे। जब फ़िरऔन और उसके साथियों ने हक़ को क़बूल करने से इनकार किया और मूसा (अलैहिस्सलाम) को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की, तो मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उनसे कहा: "अगर तुम मेरी बात पर ईमान नहीं लाते, तो कम से कम मुझे अकेला छोड़ दो, मेरे रास्ते में रुकावट मत डालो, और मुझे अपने हाथों और ज़ुबान से तकलीफ़ मत पहुँचाओ।"
इस आयत में एक बड़ी हिकमत और सबक है। यह हमें सिखाती है कि हक़ की दावत देने वाले को अपने मक़सद में पुख़्ता और साहसी होना चाहिए, लेकिन साथ ही उसे हिकमत से काम लेना चाहिए। जब सामने वाले लोग हठ और ज़िद पर अड़ जाएँ और हक़ क़बूल करने के लिए तैयार न हों, तो दावत देने वाला अपनी ज़िम्मेदारी अदा कर चुका है। उसे चाहिए कि वह अपनी जान और इज़्ज़त की हिफ़ाज़त करे और उन लोगों से अलग हो जाए जो उसका नुक़सान चाहते हैं।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि ईमान और कुफ्र के बीच कोई समझौता नहीं हो सकता। जो लोग हक़ को नकारें, उनसे अलग हो जाना ही बेहतर है, ताकि इंसान अपने दीन और अपनी इबादत में मज़बूत रहे। अल्लाह तआला ने मूसा (अलैहिस्सलाम) की इस दुआ को क़बूल किया और उन्हें फ़िरऔन के ज़ुल्म से नजात दी, और फ़िरऔन और उसके लश्कर को समुंदर में ग़रक़ कर दिया। यह उन लोगों के लिए बड़ी निशानी है जो अल्लाह के रसूलों की दावत को ठुकराते हैं।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने दीन पर साबित क़दम रहना चाहिए और हक़ की राह में किसी के डर से पीछे नहीं हटना चाहिए। अगर लोग हमारी बात न मानें, तो हमें अपनी ज़िम्मेदारी अदा करने के बाद उनसे अलग हो जाना चाहिए और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह ही बेहतर मददगार है और वही अपने नेक बंदों को कामयाबी अता करता है।
📜 आयत 19-23 — सूरा अद-दुखान
अनुवाद — अद-दुखान 21
सूरा अद-दुखान आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर तुम मुझ पर ईमान नहीं लाए तो तुम…सूरा आयत 21/59 — सूरा अद-दुखान الدخان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अद-दुखान सुनें, सूरा अद-दुखान अनुवाद, सूरा अद-दुखान mp3, सूरा अद-दुखान pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अद-दुखान
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


