अल-जासिया · 15/37
अनुवाद उच्चारण — अल-जासिया
مَنْ عَمِلَ صَالِحًا فَلِنَفْسِهِ ۖ وَمَنْ أَسَاءَ فَعَلَيْهَا ۖ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُمْ تُرْجَعُونَ ۝١٥
Maa `amila saalihan falinafsihee wa man asaaa`a fa`alaihaa summa ilaa Rabbikum turja`oon
📖 हिंदी अर्थ
जो शख़्श नेक काम करता है तो ख़ास अपने लिए और बुरा काम करेगा तो उस का वबाल उसी पर होगा फिर (आख़िर) तुम अपने परवरदिगार की तरफ लौटाए जाओगे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَنْ عَمِلَ صَالِحًا: जिसने अच्छा कर्म किया
  • فَلِنَفْسِهِ: तो उसका फल उसी के लिए है
  • وَمَنْ أَسَاءَ: और जिसने बुराई की
  • فَعَلَيْهَا: तो उसका वबाल उसी पर है
  • ثُمَّ إِلَى رَبِّكُمْ تُرْجَعُونَ: फिर तुम अपने रब की ओर लौटाए जाओगे

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में एक बुनियादी हक़ीक़त बयान फ़रमा रहे हैं जो इंसान की ज़िंदगी का मरकज़ी नुक़्ता है। अल्लाह फ़रमाता है कि जो शख्स नेक अमल करता है — चाहे वह नमाज़ हो, रोज़ा हो, सच्चाई हो, ईमानदारी हो, लोगों की मदद हो या कोई और अच्छा काम — तो इसका फायदा उसी को पहुँचता है। अल्लाह को किसी के अमल की ज़रूरत नहीं, वह बेनियाज़ है। नेकी का असल फल इंसान खुद भुगतता है — दुनिया में सुकून, दिल की तसल्ली और आख़िरत में जन्नत की नेअमतें।

इसी तरह, जो शख्स बुराई करता है — गुनाह करता है, ज़ुल्म करता है, लोगों को नुक़सान पहुँचाता है — तो उसका वबाल भी उसी पर पड़ता है। अल्लाह को उसकी बुराई से कोई नुक़सान नहीं पहुँचता। बुराई का अंजाम इंसान खुद भुगतता है — दुनिया में बेचैनी, पछतावा और आख़िरत में अल्लाह की पकड़।

फिर अल्लाह तआला एक अहम हक़ीक़त याद दिलाते हैं कि यहीं सब कुछ खत्म नहीं हो जाता। मौत के बाद तुम सबको अपने रब की तरफ लौटना है। उस दिन अल्लाह हर इंसान को उसके अमल का पूरा-पूरा बदला देगा — नेकी करने वाले को उसकी नेकी का अज्र और बुराई करने वाले को उसकी बुराई की सज़ा। यह अल्लाह का इंसाफ़ है जो कभी टलने वाला नहीं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें एक बहुत प्यारी बात सिखाती है — कि हमारा हर अमल हमारे अपने भले या बुरे के लिए है। अल्लाह को हमारी इबादत की ज़रूरत नहीं, बल्कि हमें अल्लाह की इबादत की ज़रूरत है। जब हम नेकी करते हैं, तो हम अपने ही भविष्य को रोशन करते हैं। यह कितनी बड़ी रहमत है कि अल्लाह ने हमें मौका दिया है कि हम अपने अमल से अपनी आख़िरत संवार सकें। और जो लोग बुराई में फंसे हैं, उनके लिए यह आयत एक दरवाज़ा खोलती है — कि अभी भी वक़्त है, पलट जाओ, नेकी की तरफ आ जाओ, क्योंकि अल्लाह की रहमत बहुत वसीअ है। क़यामत के दिन हर इंसान अपने अमल का नतीजा खुद देखेगा — तो क्यों न आज से ही ऐसे अमल करें जो कल हमारे लिए खुशियाँ लेकर आएँ?

🎧 सुनें

📜 आयत 13-17 — अल-जासिया

13وَسَخَّرَ لَكُم مَّا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا مِّنْهُ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सबको अपने (हुक्म) से तुम्हारे काम में लगा दिया है जो लोग ग़ौर करते हैं उनके लिए इसमें (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
14قُل لِّلَّذِينَ آمَنُوا يَغْفِرُوا لِلَّذِينَ لَا يَرْجُونَ أَيَّامَ اللَّهِ لِيَجْزِيَ قَوْمًا بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ
(ऐ रसूल) मोमिनों से कह दो कि जो लोग ख़ुदा के दिनों की (जो जज़ा के लिए मुक़र्रर हैं) तवक्क़ो नहीं रखते उनसे दरगुज़र करें ताकि वह लोगों के आमाल का बदला दे
15مَنْ عَمِلَ صَالِحًا فَلِنَفْسِهِ ۖ وَمَنْ أَسَاءَ فَعَلَيْهَا ۖ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُمْ تُرْجَعُونَ
जो शख़्श नेक काम करता है तो ख़ास अपने लिए और बुरा काम करेगा तो उस का वबाल उसी पर होगा फिर (आख़िर) तुम अपने परवरदिगार की तरफ लौटाए जाओगे
16وَلَقَدْ آتَيْنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ الْكِتَابَ وَالْحُكْمَ وَالنُّبُوَّةَ وَرَزَقْنَاهُم مِّنَ الطَّيِّبَاتِ وَفَضَّلْنَاهُمْ عَلَى الْعَالَمِينَ
और हमने बनी इसराईल को किताब (तौरेत) और हुकूमत और नबूवत अता की और उन्हें उम्दा उम्दा चीज़ें खाने को दीं और उनको सारे जहॉन पर फ़ज़ीलत दी
17وَآتَيْنَاهُم بَيِّنَاتٍ مِّنَ الْأَمْرِ ۖ فَمَا اخْتَلَفُوا إِلَّا مِن بَعْدِ مَا جَاءَهُمُ الْعِلْمُ بَغْيًا بَيْنَهُمْ ۚ إِنَّ رَبَّكَ يَقْضِي بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِيمَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
और उनको दीन की खुली हुई दलीलें इनायत की तो उन लोगों ने इल्म आ चुकने के बाद बस आपस की ज़िद में एक दूसरे से एख्तेलाफ़ किया कि ये लोग जिन बातों से एख्तेलाफ़ कर रहें हैं क़यामत के दिन तुम्हारा परवरदिगार उनमें फैसला कर देगा
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अनुवाद — अल-जासिया 15

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Tuesday, August 18, 2026

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