अल-फतह · 21/29
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फतह
وَأُخْرَىٰ لَمْ تَقْدِرُوا عَلَيْهَا قَدْ أَحَاطَ اللَّهُ بِهَا ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرًا ۝٢١
Wa ukhraa lam taqdiroo `alaihaa qad ahaatal laahu bihaa; wa kaanal laahu `alaa kulli shai`in qadeera
📖 हिंदी अर्थ
और दूसरी (ग़नीमतें भी दी) जिन पर तुम क़ुदरत नहीं रखते थे (और) ख़ुदा ही उन पर हावी था और ख़ुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَأُخْرَىٰ: और एक (ग़नीमत/विजय)।
  • لَمْ تَقْدِرُوا عَلَيْهَا: जिस पर तुम क़ुदरत नहीं रखते।
  • قَدْ أَحَاطَ اللَّهُ بِهَا: अल्लाह ने उसे अपने क़ब्ज़े और नियंत्रण में ले रखा है।
  • وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرًا: और अल्लाह हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ और मोमिनीन को ख़ैबर की ग़नीमतें दीं और दुश्मनों के हाथों को उनसे रोक दिया, ताकि यह उनके लिए एक निशानी हो कि अल्लाह उनका हाफ़िज़ और मददगार है। इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है कि उसने उन्हें एक और ग़नीमत का वादा दिया है, जिसे वे अभी हासिल नहीं कर सकते—चाहे वह फ़ारस और रूम की फ़तह हो या मक्का की विजय—क्योंकि अल्लाह ने उसे अपनी क़ुदरत से घेर रखा है और वह उस पर पूरी तरह क़ादिर है। अल्लाह ने यह वादा अपने बन्दों से किया है, और उसका वादा अवश्य पूरा होकर रहेगा। अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है, उसके लिए कोई चीज़ मुश्किल नहीं, न कोई उसे आजिज़ कर सकता है।

यह आयत मोमिनीन के लिए बशारत (ख़ुशख़बरी) है कि अल्लाह उन्हें ऐसी फ़तहें देगा जिनका उन्होंने सोचा भी नहीं होगा। अगर मक्का के कुफ़्फ़ार उनसे जंग करते, तो वे मैदान से भाग खड़े होते और उन्हें कोई सहारा न मिलता। यह अल्लाह की रहमत और क़ुदरत का इज़हार है कि वह अपने नेक बन्दों की हिफ़ाज़त करता है और उन्हें ऐसी नेअमतें अता करता है जो उनके वश से बाहर होती हैं।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह पर भरोसा रखें और उसके वादों पर यक़ीन करें। जब अल्लाह किसी चीज़ का वादा करता है, तो वह अवश्य पूरी होती है, चाहे वह हमारी समझ से कितनी ही दूर क्यों न हो। मोमिन की शान यह है कि वह अल्लाह की क़ुदरत पर ईमान रखे और यह जाने कि अल्लाह हर मुश्किल को आसान कर सकता है। यह आयत हमें उम्मीद और सब्र सिखाती है—जो चीज़ आज नसीब नहीं, वह कल अल्लाह की मेहरबानी से मिल सकती है। अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें अपने वादों पर यक़ीन करने की तौफ़ीक़ दे और हमें दुनिया और आख़िरत की भलाइयाँ अता फ़रमाए।



📜 आयत 19-23 — सूरा अल-फतह

19وَمَغَانِمَ كَثِيرَةً يَأْخُذُونَهَا ۗ وَكَانَ اللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًا
और (इसके अलावा) बहुत सी ग़नीमतें (भी) जो उन्होने हासिल की (अता फरमाई) और ख़ुदा तो ग़ालिब (और) हिकमत वाला है
20وَعَدَكُمُ اللَّهُ مَغَانِمَ كَثِيرَةً تَأْخُذُونَهَا فَعَجَّلَ لَكُمْ هَٰذِهِ وَكَفَّ أَيْدِيَ النَّاسِ عَنكُمْ وَلِتَكُونَ آيَةً لِّلْمُؤْمِنِينَ وَيَهْدِيَكُمْ صِرَاطًا مُّسْتَقِيمًا
ख़ुदा ने तुमसे बहुत सी ग़नीमतों का वायदा फरमाया था कि तुम उन पर काबिज़ हो गए तो उसने तुम्हें ये (ख़ैबर की ग़नीमत) जल्दी से दिलवा दीं और (हुबैदिया से) लोगों की दराज़ी को तुमसे रोक दिया और ग़रज़ ये थी कि मोमिनीन के लिए (क़ुदरत) का नमूना हो और ख़ुदा तुमको सीधी राह पर ले चले
21وَأُخْرَىٰ لَمْ تَقْدِرُوا عَلَيْهَا قَدْ أَحَاطَ اللَّهُ بِهَا ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرًا
और दूसरी (ग़नीमतें भी दी) जिन पर तुम क़ुदरत नहीं रखते थे (और) ख़ुदा ही उन पर हावी था और ख़ुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर है
22وَلَوْ قَاتَلَكُمُ الَّذِينَ كَفَرُوا لَوَلَّوُا الْأَدْبَارَ ثُمَّ لَا يَجِدُونَ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا
(और) अगर कुफ्फ़ार तुमसे लड़ते तो ज़रूर पीठ फेर कर भाग जाते फिर वह न (अपना) किसी को सरपरस्त ही पाते न मददगार
23سُنَّةَ اللَّهِ الَّتِي قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلُ ۖ وَلَن تَجِدَ لِسُنَّةِ اللَّهِ تَبْدِيلًا
यही ख़ुदा की आदत है जो पहले ही से चली आती है और तुम ख़ुदा की आदत को बदलते न देखोगे
अल-फतहकुरान सूची
29आयत
मदनीअवतरण स्थान
21आयत

अनुवाद — अल-फतह 21

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Friday, October 2, 2026

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