अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَوَلَّوُا الْأَدْبَارَ: वे पीठ फेर कर भाग जाते (पराजित होकर मैदान छोड़ देते)।
- وَلِيًّا: कोई संरक्षक या मददगार जो उनकी हिफ़ाज़त करे।
- نَصِيرًا: कोई सहायक जो उनकी मदद करे।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मोमिनों को एक ऐसी ख़ुशख़बरी सुना रहा है जो उनके दिलों को सुकून और इत्मिनान देती है। अगर कुफ्फ़ार (इनकार करने वाले) तुमसे जंग करने की जुर्रत भी करते, तो वे हार मानकर मैदान से भाग खड़े होते, अपनी पीठ दिखा देते। उनके पास न कोई वली (संरक्षक) होता जो उन्हें तुम्हारे हमले से बचाता, और न कोई नसीर (सहायक) जो उनकी मदद करता। यह अल्लाह की ओर से मोमिनों के लिए एक ग़ैबी मदद और नुसरत का वादा है।
यह आयत दरअसल उस वक़्त नाज़िल हुई जब मुशरिकीन ए कुरैश ने मुसलमानों से लड़ने का इरादा किया था, लेकिन अल्लाह ने उनके दिलों में रौब डाल दिया और वे बिना लड़े ही पीछे हट गए। यह अल्लाह की क़ुदरत का नमूना है कि वह अपने बंदों की हिफ़ाज़त उन तरीक़ों से करता है जिनका अंदाज़ा इंसान को नहीं होता।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि जब अल्लाह किसी की मदद करता है, तो उसे कोई हरा नहीं सकता। मोमिन को चाहिए कि वह अल्लाह पर भरोसा रखे और यक़ीन रखे कि अल्लाह उसका हाफ़िज़ और नासिर है। अल्लाह के वादे सच्चे हैं, और वह अपने बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। यही वो चीज़ है जो मोमिन को ताक़त देती है और उसके दिल को मज़बूत करती है। जो लोग अल्लाह की राह में लड़ते हैं, उनके लिए अल्लाह की तरफ़ से फ़तह और कामयाबी का वादा है, चाहे दुश्मन कितने भी ताक़तवर क्यों न हों।
📜 आयत 20-24 — अल-फतह
अनुवाद — अल-फतह 22
सूरा अल-फतह आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और) अगर कुफ्फ़ार तुमसे लड़ते तो ज़रूर पीठ फेर कर…सूरा आयत 22/29 — अल-फतह الفتح (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फतह सुनें, अल-फतह अनुवाद, अल-फतह mp3, अल-फतह pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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