अल-फतह · 22/29
अनुवाद उच्चारण — अल-फतह
وَلَوْ قَاتَلَكُمُ الَّذِينَ كَفَرُوا لَوَلَّوُا الْأَدْبَارَ ثُمَّ لَا يَجِدُونَ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا ۝٢٢
Wa law qaatalakumul lazeena kafaroo la wallawul adbaara summa laa yajidoona waliyanw-wa laa naseeraa
📖 हिंदी अर्थ
(और) अगर कुफ्फ़ार तुमसे लड़ते तो ज़रूर पीठ फेर कर भाग जाते फिर वह न (अपना) किसी को सरपरस्त ही पाते न मददगार
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَوَلَّوُا الْأَدْبَارَ: वे पीठ फेर कर भाग जाते (पराजित होकर मैदान छोड़ देते)।
  • وَلِيًّا: कोई संरक्षक या मददगार जो उनकी हिफ़ाज़त करे।
  • نَصِيرًا: कोई सहायक जो उनकी मदद करे।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मोमिनों को एक ऐसी ख़ुशख़बरी सुना रहा है जो उनके दिलों को सुकून और इत्मिनान देती है। अगर कुफ्फ़ार (इनकार करने वाले) तुमसे जंग करने की जुर्रत भी करते, तो वे हार मानकर मैदान से भाग खड़े होते, अपनी पीठ दिखा देते। उनके पास न कोई वली (संरक्षक) होता जो उन्हें तुम्हारे हमले से बचाता, और न कोई नसीर (सहायक) जो उनकी मदद करता। यह अल्लाह की ओर से मोमिनों के लिए एक ग़ैबी मदद और नुसरत का वादा है।

यह आयत दरअसल उस वक़्त नाज़िल हुई जब मुशरिकीन ए कुरैश ने मुसलमानों से लड़ने का इरादा किया था, लेकिन अल्लाह ने उनके दिलों में रौब डाल दिया और वे बिना लड़े ही पीछे हट गए। यह अल्लाह की क़ुदरत का नमूना है कि वह अपने बंदों की हिफ़ाज़त उन तरीक़ों से करता है जिनका अंदाज़ा इंसान को नहीं होता।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि जब अल्लाह किसी की मदद करता है, तो उसे कोई हरा नहीं सकता। मोमिन को चाहिए कि वह अल्लाह पर भरोसा रखे और यक़ीन रखे कि अल्लाह उसका हाफ़िज़ और नासिर है। अल्लाह के वादे सच्चे हैं, और वह अपने बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। यही वो चीज़ है जो मोमिन को ताक़त देती है और उसके दिल को मज़बूत करती है। जो लोग अल्लाह की राह में लड़ते हैं, उनके लिए अल्लाह की तरफ़ से फ़तह और कामयाबी का वादा है, चाहे दुश्मन कितने भी ताक़तवर क्यों न हों।

🎧 सुनें

📜 आयत 20-24 — अल-फतह

20وَعَدَكُمُ اللَّهُ مَغَانِمَ كَثِيرَةً تَأْخُذُونَهَا فَعَجَّلَ لَكُمْ هَٰذِهِ وَكَفَّ أَيْدِيَ النَّاسِ عَنكُمْ وَلِتَكُونَ آيَةً لِّلْمُؤْمِنِينَ وَيَهْدِيَكُمْ صِرَاطًا مُّسْتَقِيمًا
ख़ुदा ने तुमसे बहुत सी ग़नीमतों का वायदा फरमाया था कि तुम उन पर काबिज़ हो गए तो उसने तुम्हें ये (ख़ैबर की ग़नीमत) जल्दी से दिलवा दीं और (हुबैदिया से) लोगों की दराज़ी को तुमसे रोक दिया और ग़रज़ ये थी कि मोमिनीन के लिए (क़ुदरत) का नमूना हो और ख़ुदा तुमको सीधी राह पर ले चले
21وَأُخْرَىٰ لَمْ تَقْدِرُوا عَلَيْهَا قَدْ أَحَاطَ اللَّهُ بِهَا ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرًا
और दूसरी (ग़नीमतें भी दी) जिन पर तुम क़ुदरत नहीं रखते थे (और) ख़ुदा ही उन पर हावी था और ख़ुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर है
22وَلَوْ قَاتَلَكُمُ الَّذِينَ كَفَرُوا لَوَلَّوُا الْأَدْبَارَ ثُمَّ لَا يَجِدُونَ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا
(और) अगर कुफ्फ़ार तुमसे लड़ते तो ज़रूर पीठ फेर कर भाग जाते फिर वह न (अपना) किसी को सरपरस्त ही पाते न मददगार
23سُنَّةَ اللَّهِ الَّتِي قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلُ ۖ وَلَن تَجِدَ لِسُنَّةِ اللَّهِ تَبْدِيلًا
यही ख़ुदा की आदत है जो पहले ही से चली आती है और तुम ख़ुदा की आदत को बदलते न देखोगे
24وَهُوَ الَّذِي كَفَّ أَيْدِيَهُمْ عَنكُمْ وَأَيْدِيَكُمْ عَنْهُم بِبَطْنِ مَكَّةَ مِن بَعْدِ أَنْ أَظْفَرَكُمْ عَلَيْهِمْ ۚ وَكَانَ اللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرًا
और वह वही तो है जिसने तुमको उन कुफ्फ़ार पर फ़तेह देने के बाद मक्के की सरहद पर उनके हाथ तुमसे और तुम्हारे हाथ उनसे रोक दिए और तुम लोग जो कुछ भी करते थे ख़ुदा उसे देख रहा था
अल-फतहकुरान सूची
29आयत
मदनीRevelation
22आयत

अनुवाद — अल-फतह 22

सूरा अल-फतह आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और) अगर कुफ्फ़ार तुमसे लड़ते तो ज़रूर पीठ फेर कर…

सूरा आयत 22/29 — अल-फतह الفتح (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फतह सुनें, अल-फतह अनुवाद, अल-फतह mp3, अल-फतह pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए