खुदा ने फरमाया मै ख्वान तो तुम पर ज़रुर नाज़िल करुगाँ (मगर याद रहे कि) फिर तुममें से जो भी शख़्श उसके बाद काफ़िर हुआ तो मै उसको यक़ीन ऐसे सख्त अज़ाब की सज़ा दूँगा कि सारी ख़ुदायी में किसी एक पर भी वैसा (सख्त) अज़ाब न करुगाँ
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خدا نے فرمایا میں تم پر ضرور خوان نازل فرماؤں گا لیکن جو اس کے بعد تم میں سے کفر کرے گا اسے ایسا عذاب دوں گا کہ اہل عالم میں کسی کو ایسا عذاب نہ دوں گا
अल्लाह तआला ने हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की प्रार्थना स्वीकार करते हुए फ़रमाया: "मैं यह माइदा (भोजन की थाली) तुम पर उतारने वाला हूँ।" यह अल्लाह की क़ुदरत का एक महान चमत्कार था, जो उनके सच्चे नबी होने की पुष्टि करता था। लेकिन साथ ही अल्लाह ने एक सख़्त चेतावनी भी दी कि इस चमत्कार के बाद जो कोई भी कुफ़्र करेगा—अर्थात अल्लाह की वहदानियत (एकता) या हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की नबुव्वत का इनकार करेगा—तो अल्लाह उसे ऐसा अज़ाब देगा जो उसने पूरे संसार के किसी को नहीं दिया होगा। यह अज़ाब इसलिए होगा क्योंकि उसने इतना स्पष्ट चमत्कार देखने के बाद भी जानबूझकर सत्य को ठुकराया, यह सिर्फ़ हठधर्मी और ज़िद पर आधारित कुफ़्र था।
इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह ने अपना वादा पूरा किया और माइदा (भोजन की थाली) उतारी, जैसा कि क़ुरआन और हदीस की रिवायात से साबित है। यह चमत्कार उन लोगों के लिए एक परीक्षा थी—जो ईमान लाए वे सफल हुए, और जिन्होंने इनकार किया वे अल्लाह के सख़्त अज़ाब के हक़दार बने।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
अल्लाह की क़ुदरत और वादे की सच्चाई: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नबियों की प्रार्थना सुनता है और अपने वादे को पूरा करता है। जब अल्लाह किसी बात का वादा करता है, तो वह अवश्य पूरा होता है—चाहे वह दुनिया में हो या आख़िरत में।
चमत्कार देखने के बाद भी इनकार करना बहुत बड़ा गुनाह है: जब इंसान के सामने सत्य स्पष्ट हो जाए और फिर भी वह उसे ठुकराए, तो यह अल्लाह की नाराज़गी का सबसे बड़ा कारण बनता है। यह हमें सिखाता है कि सत्य को स्वीकार करने में देरी न करें और अपनी ज़िद को छोड़ दें।
अल्लाह का अज़ाब न्यायपूर्ण है: अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि जो स्पष्ट सत्य को जानबूझकर ठुकराता है, उसे उसकी हठधर्मिता की सज़ा मिलती है। यह हमें अल्लाह के इंसाफ़ की याद दिलाता है और उसके अज़ाब से डरने की तरग़ीब देता है।
नबियों की दुआ की अहमियत: हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी उम्मत के लिए दुआ की, और अल्लाह ने उसे क़बूल किया। यह हमें सिखाता है कि हमें अपने लिए और अपनी उम्मत के लिए दुआ करनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह अपने नेक बंदों की दुआएँ क़बूल करता है।
ईमान की नेमत की क़द्र: यह आयत हमें अपने ईमान की नेमत की क़द्र करना सिखाती है। जब अल्लाह हमें सत्य समझने की तौफ़ीक़ देता है, तो हमें उस पर साबित क़दम रहना चाहिए और उसे खोने से बचना चाहिए, क्योंकि ईमान के बाद कुफ़्र का अंजाम बहुत भयानक है।
खुदा ने फरमाया मै ख्वान तो तुम पर ज़रुर नाज़िल करुगाँ (मगर याद रहे कि) फिर तुममें से जो भी शख़्श उसके बाद काफ़िर हुआ तो मै उसको यक़ीन ऐसे सख्त अज़ाब की सज़ा दूँगा कि सारी ख़ुदायी में किसी एक पर भी वैसा (सख्त) अज़ाब न करुगाँ
वह अर्ज़ करने लगे हम तो फक़त ये चाहते है कि इसमें से (बरतकन) कुछ खाएँ और हमारे दिल को (आपकी रिसालत का पूरा पूरा) इत्मेनान हो जाए और यक़ीन कर लें कि आपने हमसे (जो कुछ कहा था) सच फरमाया था और हम लोग इस पर गवाह रहें
(तब) मरियम के बेटे ईसा ने (बारगाहे ख़ुदा में) अर्ज़ की ख़ुदा वन्दा ऐ हमारे पालने वाले हम पर आसमान से एक ख्वान (नेअमत) नाज़िल फरमा कि वह दिन हम लोगों के लिए हमारे अगलों के लिए और हमारे पिछलों के लिए ईद का करार पाए (और हमारे हक़ में) तेरी तरफ से एक बड़ी निशानी हो और तू हमें रोज़ी दे और तू सब रोज़ी देने वालो से बेहतर है
खुदा ने फरमाया मै ख्वान तो तुम पर ज़रुर नाज़िल करुगाँ (मगर याद रहे कि) फिर तुममें से जो भी शख़्श उसके बाद काफ़िर हुआ तो मै उसको यक़ीन ऐसे सख्त अज़ाब की सज़ा दूँगा कि सारी ख़ुदायी में किसी एक पर भी वैसा (सख्त) अज़ाब न करुगाँ
और (वह वक्त भी याद करो) जब क़यामत में ईसा से ख़ुदा फरमाएग कि (क्यों) ऐ मरियम के बेटे ईसा क्या तुमने लोगों से ये कह दिया था कि ख़ुदा को छोड़कर मुझ को और मेरी माँ को ख़ुदा बना लो ईसा अर्ज़ करेगें सुबहान अल्लाह मेरी तो ये मजाल न थी कि मै ऐसी बात मुँह से निकालूं जिसका मुझे कोई हक़ न हो (अच्छा) अगर मैने कहा होगा तो तुझको ज़रुर मालूम ही होगा क्योंकि तू मेरे दिल की (सब बात) जानता है हाँ अलबत्ता मै तेरे जी की बात नहीं जानता (क्योंकि) इसमें तो शक़ ही नहीं कि तू ही ग़ैब की बातें ख़ूब जानता है
तूने मुझे जो कुछ हुक्म दिया उसके सिवा तो मैने उनसे कुछ भी नहीं कहा यही कि ख़ुदा ही की इबादत करो जो मेरा और तुम्हारा सबका पालने वाला है और जब तक मैं उनमें रहा उन की देखभाल करता रहा फिर जब तूने मुझे (दुनिया से) उठा लिया तो तू ही उनका निगेहबान था और तू तो ख़ुद हर चीज़ का गवाह (मौजूद) है
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