अल-माइदा · 118/120
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-माइदा
إِن تُعَذِّبْهُمْ فَإِنَّهُمْ عِبَادُكَ ۖ وَإِن تَغْفِرْ لَهُمْ فَإِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ ۝١١٨
In tu`azzibhum fa innahum ibaaduka wa in taghfir lahum fa innaka Antal `Azzezul Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
तू अगर उन पर अज़ाब करेगा तो (तू मालिक है) ये तेरे बन्दे हैं और अगर उन्हें बख्श देगा तो (कोई तेरा हाथ नहीं पकड़ सकता क्योंकि) बेशक तू ज़बरदस्त हिकमत वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تُعَذِّبْهُمْ: तू उन्हें यातना दे
  • عِبَادُكَ: तेरे बंदे
  • تَغْفِرْ: क्षमा कर दे
  • الْعَزِيزُ: वह जो अत्यंत प्रभुत्वशाली और अजेय हो
  • الْحَكِيمُ: वह जो हर काम में पूर्ण ज्ञान और तदबीर (योजना) वाला हो

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की वह दुआ है जो वे अल्लाह तआला से उस दिन करेंगे जब अल्लाह उनसे पूछेगा कि क्या तूने लोगों से कहा था कि मुझे और मेरी माँ को अल्लाह के सिवा दो पूजनीय बना लो? तो वे इसका उत्तर देते हुए कहेंगे: "ऐ अल्लाह! यदि तू उन्हें यातना दे, तो वे तेरे बंदे हैं — तू उनके साथ जो चाहे कर सकता है, और तू उनके हाल को सबसे अच्छी तरह जानता है। तेरा फैसला पूर्ण न्याय पर आधारित है, और तेरी यातना उनके कर्मों के अनुरूप ही होगी। और यदि तू उन्हें क्षमा कर दे — विशेष रूप से उन लोगों को जिन्होंने तुझ पर ईमान लाया और तेरी इबादत की — तो यह तेरा अनुग्रह और उदारता है। निस्संदेह तू ही अल-अज़ीज़ है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता, और तू ही अल-हकीम है, जो हर काम में पूर्ण ज्ञान और तदबीर से कार्य करता है। तेरी यातना न्याय है और तेरी क्षमा अनुग्रह है — दोनों तेरी महिमा के अनुकूल हैं।"

इस आयत में अल्लाह तआला की तारीफ़ उसके न्याय, पूर्ण ज्ञान और बेहतरीन तदबीर के साथ की गई है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि अल्लाह के फैसले पर किसी को कोई आपत्ति नहीं हो सकती, चाहे वह यातना हो या क्षमा।

फ़ायदे (लाभ):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह तआला पूर्ण न्याय और पूर्ण अनुग्रह का स्वामी है — उसकी यातना न्याय पर आधारित है और उसकी क्षमा उसकी असीम दया पर। यह हमें उसके प्रति प्रेम और भय दोनों का संतुलन सिखाता है।
  2. हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) का यह विनम्र और आज्ञाकारी रुख़ हमें सिखाता है कि अल्लाह के सामने पूर्ण समर्पण और विनम्रता ही सच्ची इबादत है — वे अपनी उम्मत के लिए दुआ करते हैं और अपनी बेबसी का इज़हार करते हुए अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखते हैं।
  3. यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की क्षमा की कोई सीमा नहीं है — जब तक इंसान सच्चे दिल से तौबा करे और ईमान लाए, अल्लाह उसे क्षमा कर सकता है, चाहे उसके गुनाह कितने ही बड़े क्यों न हों।
  4. हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें अपने मामलों को अल्लाह के सुपुर्द कर देना चाहिए और उसके फैसले पर संतुष्ट रहना चाहिए, क्योंकि वही सबसे अच्छा जानने वाला और सबसे बुद्धिमान है।
  5. यह आयत हमें इस्लाम की सच्ची शिक्षा से परिचित कराती है कि हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) अल्लाह के नबी और बंदे थे, न कि पूजनीय — वे स्वयं अल्लाह के सामने अपनी बंदगी का इज़हार करते हैं, जो तौहीद (एकेश्वरवाद) की स्पष्ट शिक्षा है।


📜 आयत 116-120 — सूरा अल-माइदा

116وَإِذْ قَالَ اللَّهُ يَا عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ أَأَنتَ قُلْتَ لِلنَّاسِ اتَّخِذُونِي وَأُمِّيَ إِلَٰهَيْنِ مِن دُونِ اللَّهِ ۖ قَالَ سُبْحَانَكَ مَا يَكُونُ لِي أَنْ أَقُولَ مَا لَيْسَ لِي بِحَقٍّ ۚ إِن كُنتُ قُلْتُهُ فَقَدْ عَلِمْتَهُ ۚ تَعْلَمُ مَا فِي نَفْسِي وَلَا أَعْلَمُ مَا فِي نَفْسِكَ ۚ إِنَّكَ أَنتَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ
और (वह वक्त भी याद करो) जब क़यामत में ईसा से ख़ुदा फरमाएग कि (क्यों) ऐ मरियम के बेटे ईसा क्या तुमने लोगों से ये कह दिया था कि ख़ुदा को छोड़कर मुझ को और मेरी माँ को ख़ुदा बना लो ईसा अर्ज़ करेगें सुबहान अल्लाह मेरी तो ये मजाल न थी कि मै ऐसी बात मुँह से निकालूं जिसका मुझे कोई हक़ न हो (अच्छा) अगर मैने कहा होगा तो तुझको ज़रुर मालूम ही होगा क्योंकि तू मेरे दिल की (सब बात) जानता है हाँ अलबत्ता मै तेरे जी की बात नहीं जानता (क्योंकि) इसमें तो शक़ ही नहीं कि तू ही ग़ैब की बातें ख़ूब जानता है
117مَا قُلْتُ لَهُمْ إِلَّا مَا أَمَرْتَنِي بِهِ أَنِ اعْبُدُوا اللَّهَ رَبِّي وَرَبَّكُمْ ۚ وَكُنتُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًا مَّا دُمْتُ فِيهِمْ ۖ فَلَمَّا تَوَفَّيْتَنِي كُنتَ أَنتَ الرَّقِيبَ عَلَيْهِمْ ۚ وَأَنتَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ
तूने मुझे जो कुछ हुक्म दिया उसके सिवा तो मैने उनसे कुछ भी नहीं कहा यही कि ख़ुदा ही की इबादत करो जो मेरा और तुम्हारा सबका पालने वाला है और जब तक मैं उनमें रहा उन की देखभाल करता रहा फिर जब तूने मुझे (दुनिया से) उठा लिया तो तू ही उनका निगेहबान था और तू तो ख़ुद हर चीज़ का गवाह (मौजूद) है
118إِن تُعَذِّبْهُمْ فَإِنَّهُمْ عِبَادُكَ ۖ وَإِن تَغْفِرْ لَهُمْ فَإِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
तू अगर उन पर अज़ाब करेगा तो (तू मालिक है) ये तेरे बन्दे हैं और अगर उन्हें बख्श देगा तो (कोई तेरा हाथ नहीं पकड़ सकता क्योंकि) बेशक तू ज़बरदस्त हिकमत वाला है
119قَالَ اللَّهُ هَٰذَا يَوْمُ يَنفَعُ الصَّادِقِينَ صِدْقُهُمْ ۚ لَهُمْ جَنَّاتٌ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۚ رَّضِيَ اللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا عَنْهُ ۚ ذَٰلِكَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
ख़ुदा फरमाएगा कि ये वह दिन है कि सच्चे बन्दों को उनकी सच्चाई (आज) काम आएगी उनके लिए (हरे भरे बेहिश्त के) वह बाग़ात है जिनके (दरख्तो के) नीचे नहरे जारी हैं (और) वह उसमें अबादुल आबाद तक रहेंगे ख़ुदा उनसे राज़ी और वह ख़ुदा से खुश यही बहुत बड़ी कामयाबी है
120لِلَّهِ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا فِيهِنَّ ۚ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ उनमें है सब ख़ुदा ही की सल्तनत है और वह हर चीज़ पर क़ादिर (व तवाना) है
अल-माइदाकुरान सूची
120आयत
मदनीअवतरण स्थान
118आयत

अनुवाद — अल-माइदा 118

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Friday, October 2, 2026

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