Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تُعَذِّبْهُمْ: तू उन्हें यातना दे
- عِبَادُكَ: तेरे बंदे
- تَغْفِرْ: क्षमा कर दे
- الْعَزِيزُ: वह जो अत्यंत प्रभुत्वशाली और अजेय हो
- الْحَكِيمُ: वह जो हर काम में पूर्ण ज्ञान और तदबीर (योजना) वाला हो
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की वह दुआ है जो वे अल्लाह तआला से उस दिन करेंगे जब अल्लाह उनसे पूछेगा कि क्या तूने लोगों से कहा था कि मुझे और मेरी माँ को अल्लाह के सिवा दो पूजनीय बना लो? तो वे इसका उत्तर देते हुए कहेंगे: "ऐ अल्लाह! यदि तू उन्हें यातना दे, तो वे तेरे बंदे हैं — तू उनके साथ जो चाहे कर सकता है, और तू उनके हाल को सबसे अच्छी तरह जानता है। तेरा फैसला पूर्ण न्याय पर आधारित है, और तेरी यातना उनके कर्मों के अनुरूप ही होगी। और यदि तू उन्हें क्षमा कर दे — विशेष रूप से उन लोगों को जिन्होंने तुझ पर ईमान लाया और तेरी इबादत की — तो यह तेरा अनुग्रह और उदारता है। निस्संदेह तू ही अल-अज़ीज़ है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता, और तू ही अल-हकीम है, जो हर काम में पूर्ण ज्ञान और तदबीर से कार्य करता है। तेरी यातना न्याय है और तेरी क्षमा अनुग्रह है — दोनों तेरी महिमा के अनुकूल हैं।"
इस आयत में अल्लाह तआला की तारीफ़ उसके न्याय, पूर्ण ज्ञान और बेहतरीन तदबीर के साथ की गई है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि अल्लाह के फैसले पर किसी को कोई आपत्ति नहीं हो सकती, चाहे वह यातना हो या क्षमा।
फ़ायदे (लाभ):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह तआला पूर्ण न्याय और पूर्ण अनुग्रह का स्वामी है — उसकी यातना न्याय पर आधारित है और उसकी क्षमा उसकी असीम दया पर। यह हमें उसके प्रति प्रेम और भय दोनों का संतुलन सिखाता है।
- हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) का यह विनम्र और आज्ञाकारी रुख़ हमें सिखाता है कि अल्लाह के सामने पूर्ण समर्पण और विनम्रता ही सच्ची इबादत है — वे अपनी उम्मत के लिए दुआ करते हैं और अपनी बेबसी का इज़हार करते हुए अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखते हैं।
- यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की क्षमा की कोई सीमा नहीं है — जब तक इंसान सच्चे दिल से तौबा करे और ईमान लाए, अल्लाह उसे क्षमा कर सकता है, चाहे उसके गुनाह कितने ही बड़े क्यों न हों।
- हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें अपने मामलों को अल्लाह के सुपुर्द कर देना चाहिए और उसके फैसले पर संतुष्ट रहना चाहिए, क्योंकि वही सबसे अच्छा जानने वाला और सबसे बुद्धिमान है।
- यह आयत हमें इस्लाम की सच्ची शिक्षा से परिचित कराती है कि हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) अल्लाह के नबी और बंदे थे, न कि पूजनीय — वे स्वयं अल्लाह के सामने अपनी बंदगी का इज़हार करते हैं, जो तौहीद (एकेश्वरवाद) की स्पष्ट शिक्षा है।
📜 आयत 116-120 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 118
सूरा अल-माइदा आयत 118 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तू अगर उन पर अज़ाब करेगा तो (तू मालिक है)…सूरा आयत 118/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 116–120. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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