Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَوَفَّيْتَنِي: मुझे (दुनिया से) उठा लिया, मेरी मृत्यु का समय पूरा कर दिया — यहाँ इसका अर्थ है मुझे अपनी ओर उठा लेना (आसमान की ओर)।
- الرَّقِيبَ: निगरानी करने वाला, देखभाल करने वाला, जो हर चीज़ पर नज़र रखे।
- شَهِيدًا: गवाह, जो देखता और जानता हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) क़यामत के दिन अपनी उम्मत के बारे में पूछे जाने पर अल्लाह तआला के सामने यह बयान देंगे कि: "ऐ मेरे रब! मैंने उन लोगों से कभी कुछ नहीं कहा, सिवाय उस चीज़ के जो तूने मुझे आदेश दिया था। और तूने मुझे यही आदेश दिया था कि मैं उन्हें तेरी इबादत का हुक्म दूँ — यानी सिर्फ़ अल्लाह की बंदगी करें, उसे अकेला मानें, और उसके साथ किसी को साझी न बनाएं। वही मेरा रब है और वही तुम्हारा रब है।"
फिर हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने कहा: "जब तक मैं उनके बीच मौजूद रहा, मैं उनके ऊपर गवाह था — मैं देखता था कि वे क्या कहते हैं और क्या करते हैं। मैंने उन्हें तौहीद की तरफ़ बुलाया और शिर्क से रोका। लेकिन जब तूने मुझे अपनी ओर उठा लिया — यानी मेरी ज़िंदगी की मुद्दत पूरी करके मुझे आसमान पर उठा लिया — तो फिर ऐ मेरे रब! तू ही उनका निगरान रहा। तू ही उनके दिलों के राज़ और उनके अमल को जानता है। और तू हर चीज़ पर गवाह है — न ज़मीन में कोई चीज़ तुझसे छिपी है, न आसमान में। तू जानता है कि मैंने उनसे क्या कहा और उन्होंने मेरे बाद क्या किया।"
यह बयान हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की बरात (बेगुनाही) है — वे उन झूठे दावों से पाक हैं जो उनकी तरफ़ निस्बत किए जाते हैं कि उन्होंने लोगों को अपनी इबादत का हुक्म दिया या ख़ुद को अल्लाह का बेटा कहलवाया। उन्होंने साफ़ कहा कि मेरा पैग़ाम सिर्फ़ यही था: अल्लाह की इबादत करो, जो मेरा और तुम्हारा रब है।
दावत और नसीहत:
यह आयत हमें सिखाती है कि नबियों की ज़िंदगी और उनका पैग़ाम कितना साफ़ और सीधा था — सिर्फ़ अल्लाह की इबादत और उसकी वहदानिय्यत का एलान। हमें भी अपनी ज़िंदगी में इसी तौहीद को अपनाना चाहिए और किसी को भी अल्लाह का साझी नहीं बनाना चाहिए। यह आयत हमें यह भी याद दिलाती है कि अल्लाह हर चीज़ पर गवाह है — हमारे अच्छे और बुरे सारे अमल उसके सामने हैं। इसलिए हमें अपने अमल को सुधारना चाहिए और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाना चाहिए। जिस तरह हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी उम्मत को सिर्फ़ अल्लाह की इबादत की तरफ़ बुलाया, उसी तरह हमें भी अपने घर, समाज और दुनिया में तौहीद का पैग़ाम फैलाना है — और यही कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 115-119 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 117
सूरा अल-माइदा आयत 117 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तूने मुझे जो कुछ हुक्म दिया उसके सिवा तो मैने…सूरा आयत 117/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 115–119. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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