अल-माइदा · 119/120
अनुवाद उच्चारण — अल-माइदा
قَالَ اللَّهُ هَٰذَا يَوْمُ يَنفَعُ الصَّادِقِينَ صِدْقُهُمْ ۚ لَهُمْ جَنَّاتٌ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۚ رَّضِيَ اللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا عَنْهُ ۚ ذَٰلِكَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ ۝١١٩
Qaalal laahu haaza yawmu yanfa`us saadiqeena sidquhum; lahum janaatunn tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaaa abadaa; radiyal laahu `anhum wa radoo `anh; zaalikal fawzul `azeem
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा फरमाएगा कि ये वह दिन है कि सच्चे बन्दों को उनकी सच्चाई (आज) काम आएगी उनके लिए (हरे भरे बेहिश्त के) वह बाग़ात है जिनके (दरख्तो के) नीचे नहरे जारी हैं (और) वह उसमें अबादुल आबाद तक रहेंगे ख़ुदा उनसे राज़ी और वह ख़ुदा से खुश यही बहुत बड़ी कामयाबी है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَوْمُ يَنفَعُ الصَّادِقِينَ صِدْقُهُمْ: वह दिन जब सच्चे लोगों को उनका सच्चा होना लाभ पहुँचाएगा।
  • خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا: उनमें हमेशा हमेशा के लिए रहने वाले।
  • رَّضِيَ اللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا عَنْهُ: अल्लाह उनसे प्रसन्न हुआ और वे उससे प्रसन्न हुए।
  • الْفَوْزُ الْعَظِيمُ: बड़ी सफलता, महान विजय।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला क़ियामत के दिन हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) से फ़रमाएगा: "यह वह दिन है जिसमें सच्चे लोगों को उनका सच्चा होना नफ़ा देगा।" यानी जिन लोगों ने दुनिया में अल्लाह के साथ अपने ईमान, नीयत, बातों और कामों में सच्चाई अपनाई, उनका यह सच्चा होना आज उनके काम आएगा और उन्हें इसका अच्छा बदला मिलेगा।

उन सच्चे लोगों के लिए ऐसे बाग़ हैं जिनके नीचे नहरें बहती हैं, और वे उनमें हमेशा हमेशा रहेंगे। उन्हें कभी मौत नहीं आएगी और न ही वहाँ से निकाले जाएँगे। अल्लाह उनसे प्रसन्न होगा, यानी उनके अच्छे कर्मों को क़बूल करेगा और उन पर अपनी रहमत बरसाएगा, और वे भी अल्लाह से प्रसन्न होंगे क्योंकि उसने उन्हें अपनी ओर से बड़े-बड़े इनाम और अनगिनत नेमतें दी होंगी। यही वह बड़ी सफलता है जिससे बढ़कर कोई सफलता नहीं है — यही सबसे बड़ी कामयाबी है।


फ़ायदे (सीख):

  1. सच्चाई की अहमियत: यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई सिर्फ़ दुनिया में इज़्ज़त दिलाती है, बल्कि आख़िरत में भी नजात का ज़रिया बनेगी। अल्लाह के सामने वही सच्चे लोग कामयाब होंगे जिन्होंने अपने ईमान और अमल में सच्चाई अपनाई।
  2. अल्लाह की रज़ा सबसे बड़ी नेमत: जन्नत की नहरें और महल कितने भी खूबसूरत हों, लेकिन सबसे बड़ी नेमत अल्लाह की रज़ा और उसकी खुशी है। जब अल्लाह किसी बंदे से राज़ी हो जाता है, तो उसे हर भलाई मिल जाती है।
  3. अमल की पकड़: यह आयत हमें बताती है कि सिर्फ़ ज़ुबान से ईमान लाना काफ़ी नहीं, बल्कि नीयत, बात और काम — तीनों में सच्चाई होनी चाहिए। यही वह सच्चाई है जो आख़िरत में काम आएगी।
  4. उम्मीद और खुशी: यह आयत मोमिनों को उम्मीद देती है कि अगर वे दुनिया में सच्चाई पर क़ायम रहें, तो उनका अंजाम जन्नत और अल्लाह की रज़ा है — यही सबसे बड़ी कामयाबी है।


📜 आयत 117-120 — अल-माइदा

117مَا قُلْتُ لَهُمْ إِلَّا مَا أَمَرْتَنِي بِهِ أَنِ اعْبُدُوا اللَّهَ رَبِّي وَرَبَّكُمْ ۚ وَكُنتُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًا مَّا دُمْتُ فِيهِمْ ۖ فَلَمَّا تَوَفَّيْتَنِي كُنتَ أَنتَ الرَّقِيبَ عَلَيْهِمْ ۚ وَأَنتَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ
तूने मुझे जो कुछ हुक्म दिया उसके सिवा तो मैने उनसे कुछ भी नहीं कहा यही कि ख़ुदा ही की इबादत करो जो मेरा और तुम्हारा सबका पालने वाला है और जब तक मैं उनमें रहा उन की देखभाल करता रहा फिर जब तूने मुझे (दुनिया से) उठा लिया तो तू ही उनका निगेहबान था और तू तो ख़ुद हर चीज़ का गवाह (मौजूद) है
118إِن تُعَذِّبْهُمْ فَإِنَّهُمْ عِبَادُكَ ۖ وَإِن تَغْفِرْ لَهُمْ فَإِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
तू अगर उन पर अज़ाब करेगा तो (तू मालिक है) ये तेरे बन्दे हैं और अगर उन्हें बख्श देगा तो (कोई तेरा हाथ नहीं पकड़ सकता क्योंकि) बेशक तू ज़बरदस्त हिकमत वाला है
119قَالَ اللَّهُ هَٰذَا يَوْمُ يَنفَعُ الصَّادِقِينَ صِدْقُهُمْ ۚ لَهُمْ جَنَّاتٌ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۚ رَّضِيَ اللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا عَنْهُ ۚ ذَٰلِكَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
ख़ुदा फरमाएगा कि ये वह दिन है कि सच्चे बन्दों को उनकी सच्चाई (आज) काम आएगी उनके लिए (हरे भरे बेहिश्त के) वह बाग़ात है जिनके (दरख्तो के) नीचे नहरे जारी हैं (और) वह उसमें अबादुल आबाद तक रहेंगे ख़ुदा उनसे राज़ी और वह ख़ुदा से खुश यही बहुत बड़ी कामयाबी है
120لِلَّهِ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا فِيهِنَّ ۚ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ उनमें है सब ख़ुदा ही की सल्तनत है और वह हर चीज़ पर क़ादिर (व तवाना) है
अल-माइदाकुरान सूची
120आयत
मदनीRevelation
119आयत

अनुवाद — अल-माइदा 119

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Tuesday, August 18, 2026

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